बुधवार, 1 मार्च 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी-22 बोल सारा रा रा / अनूप शुक्ल

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व्यंग्य की जुगलबंदी -22 का विषय था -बोल सारा रा रा। होली से इतना मिलता-जुलता होने के चलते साथियों ने खूब होलियाया।

सबसे पहले Yamini Chaturvedi आईं अपना हिसाब लेकर और शुरुआत की :

जोगिरा सा रा रा रा
होली रंग त्यौहार है, रिमझिम बरसै फाग
रंग भंग की मस्ती मैं बाढ़े जोगीरा तान
जोगीरा सा रा रा रा

आगे समसामयिक घटनाओं से जोड़कर लिखते हुये नोटबंदी पर लिखा:
नोट बंद कर लाइन में जनता दई लगाय
कालाधन तो ना मिलो, कैशलेस हुई जाय
जोगीरा सा रा रा रा

फ़िनिशिंग टच देते हुये सोशल मीडिया की कहानी उजागर कर दी:
गोरी सोवे सेज पै, मुख पे डारे केस
केसन पाछे कर रई व्हाट्सएप पे चैट
जोगीरा सा रा रा रा

ये तो हमने बस नमूने बताये। पूरे सारा रा रा देखने के लिये आप उनकी पोस्ट पर पहुंचिये। लिंक यह रहा :

https://www.facebook.com/yamini.chaturvedi.92/posts/1376818565672989

Udan Tashtari ने खुद भले सातवीं में पढ़ते हुये कभी होली पर निबंध न लिखा हो लेकिन दूसरे बच्चे की कापी में होली का निबंध देख लिया। बच्चे से लिखवाया:
“होली के दिन स्कूल की छुट्टी होती है. इस दिन हम मम्मी, पापा और उनके खूब सारे दोस्तों के साथ मिल कर पिकनिक पर जाते है. सब एक दूसरे से गले मिलते हैं और हैप्पी होली बोलते हैं. बच्चे दिन भर खूब खेलते हैं. पापा मम्मी और उनके दोस्त बीयर पीते है. केटरर खूब सारा खाना बनता है. डी जे वाला गाना बजाता है. सब लोग नाचते हैं. देर शाम को सब थक कर घर वापस आ कर सो जाते हैं... “
संस्कारधानी वाले इसको देखेंगे तो दौड़ा लेंगे कि यहां बीयर कौन पीता है होली में। इसके बाद समीरलाल व्यंग्यात्मक मोड़ में आ गये और कहने लगे:

बाथरुम में झाँक के बोले अपनी ये सरकार
रेनकोट में नल के नीचे, बैठे हैं सरदार
जोगी रा सा रा रा रा, जोगी रा सा रा रा रा

अमेरिका को भी लेकर आ गये समीर बाबू होली के बहाने और बोले:

सच को झूठ बताने वाले, जीत रहे हैं जंग
सीएनएन को रोज झिड़कते, राष्ट्रपति जी ट्रम्प..
जोगी रा सा रा रा रा, जोगी रा सा रा रा रा
पूरा लेख बांचने के लिये उड़नतश्तरी का इधर आइये

https://www.facebook.com/udantashtari/posts/10154770373896928

Sanjay Jha Mastan ने शुरुआत हर-हर गंगे से किया और लिखा:

मैश - अप के हमाम में बोलो हर हर गंगे
मिडिया के रिवेंज पोर्न में सब के पंगे नंगे
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

सारा रा रा के बहाने सरकार का भी अबार्शन करा दिया:

बूथ दर बूथ पानी हुआ और दूध का दूध
प्रेग्नेंट थी सरकार अब है अबॉर्शन का मूड
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

फ़ाइनली मन की बात करने लगे संजय झा मस्तान :
दो पाटन के बीच में कोई बाकी बचा न जात
रेडियो में कौन कर रहा है अपने मन की बात
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

पूरी पोस्ट इधर देखिये संजय की : https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=10155067451062658&id=640082657

Anshu Mali Rastogi होली के इतने मूड में थे कि इनबॉक्स में ही धमक गये। कारण बताते हुये बोले भी:

“लाइफ में आदमी दो स्टेजस पर ही ‘बौराता’ है। पहला- शादी का प्रस्ताव स्वीकारते वक्त और दूसरा- फागुन के महीने में। शादी की बौराहट जब तलक तलाक की नौबत न आए तब तलक यों ही बनी रहती है। किंतु फागुन की बौराहट महीने भर में खुद ही ‘ठंडी’ पड़ जाती है। “

इनबॉक्स में होली का कारण भी बताया:

“हालांकि होली के रंगों से मुझे एलर्जी तो नहीं मगर रंगने-पुतने से जरा बचता ही हूं। एंवई, अच्छा-खासा टाइम खोटी हो लेता है रंगों को छुटाने में। इसीलिए फेसबुक के ‘इन-बॉक्स’ में होली खेलना अधिक पसंद करता हूं। यहां न रंग लगाने-लगवाने का झंझट, न छुटाने का संघर्ष। एकदम सिंपल डिजिटल तरीके से होली का लुत्फ। “

आखिर तक पहुंचते हुये अपनी मंशा भी साफ़ कर दी:

“होली पर महिला मित्र से इन-बॉक्सिए रंग खेलने में बुराई तो कोई नहीं बस जोगी रा सा रा रा रा रा... बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए। अपनी मंशा तो बस इत्ती रहती है कि अबीर-गुलाल इन-बॉक्स में थोड़ी-बहुत हंसी-ठिठोली के साथ उड़ते रहें। न हम ओवर होएं। न महिला मित्र ओवर होए। हां, तबीयत में रंगीनियत बनी रहे। और क्या चाहिए। “

अंशुमाली रस्तोगी का लेख पढ़ने के लिये इधर आइये: https://www.facebook.com/anshurstg/posts/200438177103211

Alok Puranik होली में गालव गजक खाते हुये लेख लिखते हुये बताया:

“स्वाद और सुंदरियों की साधना तो इधर के कुछ नये ऋषिवर कर रहे हैं। पहले तो ऋषि की जिंदगी खासी स्वादहीन ही होती होगी। ऋषिगिरी पर्याप्त नोटप्रदायक कैरियर तो इधर ही हुई है। एक बहुत ही प्रख्यात और सम्मानित प्राचीन ऋषि के नाम पर स्थापित संस्था कब्जनाशक और वीर्य को पुष्ट करने वाली दवाओं की बिक्री करती है।”

पूर्वजों के पल्ले सेल्समैन शिप का काम आ गया है। खुलासा करते हुये बताया :

“पुरानों के नाम पर जाने क्या क्या हो रहा है। गजक से लेकर जूते तक बिक रहे हैं।”

पूर्वजों का भविष्य देखते हुये आलोक जी लिखते हैं:

“ शाहजहां साहब क्या पता पाँच दस हजार सालों बाद कारोबारी के तौर पर चिह्नित किये जायें, जिनके चाय ब्रांड और जूता ब्रांड थे। गालवजी की नाम परमानेंटली गजक के साथ जोड़ दिया जाये।”

हमने तो बस झलकियां दिखाईं लेख की। पूरी पोस्ट बांचने के लिये आप इधर पहुंचिये:
https://www.facebook.com/puranika/posts/10154475061578667

Nirmal Gupta जी ने होली में अप्रैल फ़ूल मना लिया। होली के बहाने शोले फ़िल्म की याद करते हुये लिखा:

“अब सवाल किसी जवाब की प्रत्याशा में पूछे भी नहीं जाते ,अब प्रश्न उठाये जाते हैं।ठीक उसी तरह उठाये जाते हैं जैसे हेल्थ कांशस लोग जिम में जाकर बहुरंगी वजन उठाते हैं।जैसे सिक्स या एट एब्स वाले नायक फूल –सी नायिका को बड़े सलीके से उठाया करते थे / हैं।”

हाल में हो रहे चुनाव की असलियत की तरफ़ इशारा करते हुये कहा:

“अलबत्ता राजनीतिक बयानों के जरिये फाग तो शुरू हो लिया है।हर दल इतनी इतनी सीटों पर काबिज होने वाला है कि एक एक राज्य में अनेकानेक सरकारों का गठन होगा ।इतने अधिक मुख्यमंत्री बनेगे कि पदानुकूल कुर्सियों का टोटा पड़ने वाला है।इस बार सारे राजनीतिक दल जीतने वाले हैं।लेकिन जनता को नहीं पता कि उसकी करारी हार कितने मार्जिन से होगी।उसे जोगी सा रे रे का न तो ठीक से पता है और न उसे पता लगाने की कोई आतुरता है।उसे तो यह पता है कि इस बार होली से पहले फर्स्ट अप्रेल फूल को आ जाना है। “
आखिर में निर्मल जी लिखते हैं:

“यह रंगपाशी का नहीं वक्त के अनुरूप रंग बदलते रहने का अवसर है।यह रंगदारी का गिरगिटिया समय है।यह रंगदारों के लिए मनोनुकूल मौका है।वाटर प्रूफ दस्ताने पहन कर बहते दरिया में हाथ धोने में ही बचाव है।एक दूसरे के गले रेतने की इस मारक होड़ में खुल्लमखुल्ला कुछ न करने में ही भलाई है। “

यह लेख बाद में हरिभूमि में छपा भी। पूरा लेख पढने के लिये इधर आयें।

https://www.facebook.com/gupt.nirmal/posts/10211356565245504

रविरतलामी जी का फ़ेसबुक खाता फ़ेसबुक पेज में बदल गया अत: टैग करने में लफ़ड़ा होता है। उन्होंने हालिया बयानबाजी को अपने लेख में शामिल करते हुये सारा रारा तुकबंदी की। देखिये नमूना:

शौचालय में लगे ताले को दिखाते हुये लिखा:

शौचालय तीन ताले में
जनता निपटे मैदान में
बोलो सा रा रा रा रा रा

हालिया गधा गीरी वाले बयानों पर लिखते हैं:

गुजराती गधे चले दिल्ली
और सैफई के नखलऊ में
बोलो सा रा रा रा रा रा

लेख का पूरा मजा फ़ोटो सहित लेने के लिये इधर आइये

http://raviratlami.blogspot.in/2017/02/22.html

अनूप शुक्ल ने लिखने में देरी की। जब लिखा तो जोगी रा सारा रा रा की उत्पत्ति खोजने लगे:

“लगता है कभी, किसी ने किसी जोगी को शरारा पहने देख लिया होगा कभी। जटा-जूट धारी ,’स्त्री संग-संसर्ग पलायन कारी जोगी को कम कपड़ों में देख अटपटा लगा होगा उसको। औचक उसके मुंह से निकल गया होगा -जोगी रा सा रा रा। “

जोगीरा सारा रा रा में साम्प्रदायिक सद्भाव देखने की कसरत भी की:

“बताने वाले बताते हैं कि जोगी रा सारा रा रा में साम्प्रदायिक सद्भाव की छटा दर्शनीय है। जोगी का संबंध हिन्दू और हिन्दी है शरारा का जुड़ाव मुस्लिम मने उर्दू से है। दोनों को मिलाकर जो बना जोगी रा सारा रा रा उससे हिन्दुस्तानी मेलजोल की संस्कृति का झण्डा फ़हराने लगा।”

अंतत: राजनीति के मैदान में पहुंच ही गये अनूप शुक्ल भी और लिखते भये:
“नेता जी भाषण दे रहे हैं। बिजली, पानी, लैपटाप, साड़ी ब्लाउज, मकान, रोजगार देने का वादा करते हैं। जनता सुन रही है। जनता जानती है नेता जी मजाक के मूड में हैं। वह बोलती है जोगी रा सारा रारा। नेता जी को सुनाई पड़ता है- ’जिन्दाबाद , नेता जी जिन्दाबाद।’ वे अविभूत हो जाते हैं। फ़िर नये वादे करते हैं। चुनाव में वोट देने के लिये कहते हैं। जनता कहती है -जोगी रा सारा रा रा। “

लेख पूरा बांचने के लिये इधर पहुंचिये। https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10210638998024595

बाकी साथी शायद व्यस्तता के चलते लिख नहीं पाये। शायद आगे लिखें। लिखेंगे तो इसमें शामिल करेंगे उनको भी।

फ़िलहाल इतना ही । व्यंग्य की जुगलबंदी कैसी लगी बताइयेगा। clip_image001:)

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