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होली विशेष आयोजन : होली की हुड़दंग / शोभा श्रीवास्तव

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बाल कविता - होली की हुड़दंग

होली की हुड़दंग
भैया, होली की हुड़दंग।
रंग लगाने को आपस में,
मची हुई है जंग।
भैया, होली की हुड़दंग॥

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लाल, गुलाबी, नीला,पीला,
ये त्यौहार है बड़ा रंगीला।
प्रेम से सबको रंग लगाओ,
झूमो, नाचो, खुशी मनाओ,
एक - दूजे के संग,
भैया ,होली की हड़दंग।

मम्मी बाँटे खील- बताशा।
बच्चे करते खूब तमाशा॥
भूख लगी, घर की याद आई,
सबने खाई खूब मिठाई॥
किसी ने पी ली भंग,
भैया, होली की हुड़दंग॥

हम सबसे कहती है होली
बोलो सबसे प्यार की बोली।
रंग-अबीर सभी पर फेंको,
लेकिन किसी को बच्चों देखो
न करना तुम तंग,
भैया, होली की हुड़दंग॥

                            डाँ शोभा श्रीवास्तव

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