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होली विशेष आयोजन - सुशील शर्मा के होली के तांका, सेदोका और हाइकु

तांका -19
होली
सुशील शर्मा

होली बहार
फूला है कचनार
बाजे मृदंग
होली की हुड़दंग
गुलाल सतरंग

फागुनी प्यार
सपने सतरंगी
उड़े अबीर
साजन का आँगन
रंगों से सराबोर।

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टेसू के फूल
सुगंध बिखराये
भीनी सी गंध
फागुन की दस्तक
पहुंची मन तक।

सेदोका-1
5 7 7 5 7 7 ( षट्पदी कुल 38 वर्ण )
होली
सुशील शर्मा

ब्रज की बाला
कान्हा ने रंग डाला
उमड़ा ब्रज गांव
उड़ा गुलाल
मस्ती भरी उमंग
सतरंगी चेहरे।

चुनरी लाल
कुमकुम केसर
होंठ रंगे गुलाबी
फागुन आया
मधुवन महका
लाल टेसू दहका।

होली आई रे
बौराई अमराई
भगोरिया नचाई
पलाशी रंग
साजन बरजोरी
चोली रंग भिगोई।

माहिया -1
(तीन पदी 12 ,10 ,12 मात्राएँ )
होली
सुशील शर्मा

रोम रोम सहर उठा
ये फागुनी हवा
तन मन में चढ़ा नशा।

आयो फागुन झूमत
ऋतु बसंत के साथ
तन मोहित मन हर्षित।

राधा खेलत होरी
ग्वालन बालन संग
श्याम करत बरजोरी।

हवा में बिखरे रंग
पीली चुनरिया
बुरांस के दरख्तों पर

रंग भरी पिचकारी
होली में मन भर
कपट कन्हाई मारी
/////////////////////
हाइकु -76
होली ,रंग ,गुलाल
सुशील शर्मा

कान्हा की होरी
संग है राधा गोरी
रंगी है छोरी।

होली के रंग
साजन सतरंग
चढ़ी है भंग।

हंसी ठिठौली
हुरियारों की होली
भौजी है भोली।

भीगा सा मन
प्रियतम आँगन
रंगी दुल्हन।

शर्म से लाल
हुए गुलाल गाल
मचा धमाल।

रिश्तों के रंग
ख़ुशी की पिचकारी
भौजी की गारी

राधा है न्यारी
सखियों के संग में
कान्हा को रंगा

मौर रसाल
दहके टेसू लाल
गाल गुलाल।

केसरी रंग
राधा के गोरे अंग
कृष्ण आनंद।

बृज की बाला
कान्हा ने रंग डाला
मस्ती की हाला।
गाल गुलाल
चुनरी भयी लाल
रंगा जमाल।


ब्रज की होरी
कान्हा रंग रसिया
मन बसिया

फागुन सजा
अब आएगा मजा
मृदंग बजा।

महंगे रंग
गरीब कैसे खेले
होली बेरंग।

सफ़ेद साड़ी
इंतजार करती
सत रंगों का
////////////////

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