बुधवार, 1 मार्च 2017

रामनरेश उज्जवल की बाल कविताएँ

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बाल कविताएँ

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1-निंदिया

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नींद से अच्छा नहीं लगे कुछ,

सबसे प्यारी निंदिया रे।

सपने नए अनोखी लाती,

जादू वाली पुड़िया रे।।

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थपकी दे माँ हमें सुलाती,

लोरी गा-गा कर बहलाती।

धीरे से है तब आ जाती,

मीठी-मीठी निंदिया रे।।

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उड़न खटोले पर बैठाती,

दूर देा की सैर कराती।

परियों वाले लाल महल में,

लेकर जाती निंदिया रे।।

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चन्दा मामा से मिलवाती,

तारों से बातें करवाती।

सात समुन्दर पार घुमा कर,

वापस लाती निंदिया रे।।

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2-ईद मुबारकclip_image010

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चाँद निकलते हल्ला-गुल्ला,

वाह-वाह क्या बात।

लाई फिर से ईद मुबारक,

खुशियों की सौगात।।clip_image003[5]

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पकवानों के थाल सजे हैं,

खोए वाली खीर।

खुशबू से भरपूर सिवंइयाँ,

कैसे रखूँ धीर।।

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कपड़े नए-निराले पहने,

मस्ती में सब चूर।

दौड़-दौड़ कर घर-घर जाएँ,

ईद मिलें भरपूर।।

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अपने संगी-साथी के हम

संग मचाएँ धूम।।

नाचें-गाएँ, खुशी मनाएँ,

तन-मन जाए झूम।।

3-चुन्नू-मुन्नू clip_image003[6]clip_image014

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चुन्नू-मुन्नू बड़े गुनी।

बातें करते नहीं सुनी।।

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सुनते बागों में हैं भूत,

यमराजों के हैं ये दूत,

जो भी इनके पकड़ में आए,

नहीं कभी फिर पाए छूट,

दादा से ये कथा सुनी।

चुन्नू-मुन्नू बड़े गुनी।।

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पर ये सारी बातें झूठ,

जो भी माने वो है मूर्ख,

चुन्नू बोला सच्ची बात,

कभी नहीं होते हैं भूत,

अफवाहें हैं कही-सुनी।

चुन्नू-मुन्नू बड़े गुनी।।

4-बन्द पढ़ाई

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छुट्टी के दिन हैं जोशीले।

लटके देखो आम रसीले।।

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बागों की है छटा निराली।

मस्त पवन से झूमें डाली।।

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जब चलती ठण्डी पुरवाई।

लगती सबको ये सुखदाई।।

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बच्चों के मन ऐसे भाई।

खुशी भरी ज्यों थैली लाई।।

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डाँट-डपट न मार-पिटार्ई।

फुरसत के दिन बन्द पढ़ाई।।

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कुल्फी सबको है बहलाती।

गरमी में राहत पहुँचाती।।

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5-मैंने ढूँढी है भाहजादी

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मम्मी कर दो मेरी शादी,

मैंने ढूँढी है शाहजादी।

काम करेगी घर का सारा,

तुमको देगी वह छुटकारा।।

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प्यार करेगी सबसे बढ़कर,

तुम भी चाहोगी जी भरकर।

रूठोगी जब गाल फुला कर,

खुश कर देगी पाँव दबा कर।।

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पापा से भी बात करो ना,

धीमे से शुरूआत करो ना।

दीदी से तो मैं कह दूँगा,

चुटकी में राजी कर लूँगा।।

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कहो तो सेहरा भी मँगवा लूँ,

लोगों को न्योता बँटवा दूँ।

सजकर आएगी शाहजादी,

हो जाएगी मेरी शादी।।

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6-बादलclip_image003[12]

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बादल आए, बादल आए,

झूम-झूम कर पानी लाए।

मोर मगन हो लगे नाचने,

कोयल कुहू-कुहू कर गाए।।

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आँगन तक पानी भर आया,

मेंढक ने अब शोर मचाया।

सभी जगह चिड़ियों की चैं-चैं,

झींगुर ने संगीत सुनाया।।

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जंगल में फैली हरियाली,

बरखा का है मौसम आया।

सूख रहे थे पेड़ जहाँ के,

पत्ता-पत्ता फिर लहराया।।

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झोकम्-झोंक चले पुरवाई,

खेतों में हो रही जुताई।

निखर गए सब-बगीचे,

हरी-भरी धरती मुस्काई।।

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7-उड़ता गुलाल

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होली के रंग।

मित्रों के संग।।

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उड़ता गुलाल।

चेहरा है लाल।।

पकड़ लो इन्हें।

रंग दो उन्हें।।

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पप्पू के गाल।

करो लाल-लाल।।

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दो हों या तीन।

कर दो रंगीन।।

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होली के गीत।

गाएँगें मीत।।

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नाचे मन-मोर।

खूब करे शोर।।

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8-पथ पर बढ़ते जाना

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कभी न रोना, हँसना-गाना।

जीवन का हो नया तराना।।

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बुरा-भला जो बीत गया है,

मत उस पर आँसू बरसाना।

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कटुता मन में कुछ भर जाए,

नेह से उसको सदा मिटाना।

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चलते-चलते यदि थक जाना,

ठहर छाँव में कुछ सुस्ताना।

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गिरना, उठना और सँभलनाा,

लेकिन पथ पर बढ़ते जाना।

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9-बात निराली

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कल-कल-कल-कल बहती जाती,

सबको भाती है।

निर्मल-निर्मल धारा का,

संगीत सुनाती है।।

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हरदम ही यह चलती जाती,

आगे बढ़ती है।

कभी न रूकती,कभी न थकती,

बढ़ती जाती है।।

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जीवन भर कुछ करते रहना,

हमें सिखाती है।

अपनी धुन में, अपनी गुन में,

गाती जाती है।।

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गंगा-जमुना के पानी की

बात निराली है।

अपने जल से आस-पास,

करती हरियाली है।।

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10-शायद मैं भी हीरो बनकर

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गोविन्दा का नाच देखकर,

मैंने सोचा नाचूँ।

शायद मैं भी हीरों बनकर,

हीरोइन को फासूँ।।

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यही सोच मैं गया किचन में,

कुण्डी जल्द लगाई।

हाथ-पैर फिर लगा पटकने,

खूब बजी शहनाई।।

शहनाई की आवाजों ने,

मन में उमंग जगाई।

एक पैर पर लगा नाचने,

सूरत गजब बनाई।।

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उसी समय मम्मी ने आकर,

कुण्डी ज्यों खड़काई।

घबरा कर मैं गिरा फर्श पर,

मुँह से निकला आई।।

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11-तोते का बच्चा

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मुझे मिला तोते का बच्चा।

भोला-भाला लगता अच्छा।।

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घायल देख उठा मैं लाया।

मरहम-पट्टी कर सहलाया।।

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घाव कुछ दिन में भर आया।

स्वस्थ हुआ तो मैं मुस्काया।।

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बिल्ली से भी उसे बचाया।

पिंजड़े में भोजन करवाया।।

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अब तक उसके 'पर' जम आए।

मुझे देख कर पंख हिलाए।।

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मैंने सोचा दिल बहलाऊँ।

फुदक-फुदक कर इसे नचाऊँ।।

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लेकिन वह तो गजब कर गया।

पिंजड़ा खुलते फुर्र उड़ गया।।

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12-नए सिरे से जोड़ो कड़ियाँ

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साल पुराना गया है बीत।clip_image003[14]

खुशी मनाओ, गाओ गीत।।

नए वर्ष का नया विचार।

गलत काम में करो सुधार।।

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भूलो अपनी मुश्किल घड़ियाँ।

नए सिरे से जोड़ो कड़ियाँ।।

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लालच त्यागो बदलो रीत।

सच्चाई की होती जीत।।

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खुद पर रखो दृढ़ विश्वास।

पूरी होगी मन की आशा।।

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13-सबको बाटूँगा मैं पैसा

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पेड़ लगाऊँगा एक ऐसा।

जिसमें खूब लगेगा पैसा।।

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दस्सी-पंजी और अठन्नी,

एक-दूजे पे लदी चवन्नी,

नोटों के पत्ते लहराएँ,

दूर-दूर तक उड़के जाएँ,

सबको बाटूँगा मैं पैसा।

पेड़ लगाऊँगा एक ऐसा।।

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पैसे से अपना घर भर दूँ ,

सारी ख्वाहिश पूरी कर लूँ ,

गरम जलेबी, बर्फी खाऊँ,

सभी जगह मैं धूम मचाऊँ,

ठाट-बाट राजाओं जैसा।

पेड़ लगाऊँगा एक ऐसा।।

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सभी जगह मेला लगवा दूँ ,

सारी दुनिया को चमका दूँ ,

रोज सिनेमा, सरकस जाऊँ,

शीशमहल-सा घर बनवाऊँ,

चम-चम चमके चाँदी जैसा।

पेड़ लगाऊँगा एक ऐसा।।

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14-एक दोस्त

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एक दोस्त है मेरा मोटा,

जिसको कहते बाथम।

उससे जब भी मिलने जाता,

खाता रहता हरदम।।

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गैण्डे जैसी चाल है उसकी ,

झूमें हाथी जैसा।

काम करे तो गिर-गिर जाए,

लुढ़के मटके जैसा।।

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पैर हैं उसके भारी-भरकम,

धरती भी घबराए।

रिक्शे वाला देख के भागे,

दूर खड़ा हो जाए।।

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इतना मोटा होने पर भी,

कहता-'मै हूँ दुबला।

काँटे जैसा सूख गया हूँ ,

टहनी जैसा पतला।।'

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15-नन्हें-नन्हें तारे

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नन्हें-नन्हें तारे।

लगते सबसे प्यारे।।

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नील-गगन में चमकें,

भोले-भाले सारे।

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अपने पास बुलाएँ,

लुक-छिप करें इशारे।

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मोती-माला जैसे,

लटके हुए सितारे।

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लगें सभी को प्यारे,

नन्हें-नन्हें तारे।

.........

जीवन-वृत्त

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नाम : राम नरेश 'उज्ज्वल'

पिता का नाम : श्री राम नरायन

विधा : कहानी, कविता, व्यंग्य, लेख, समीक्षा आदि

अनुभव : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लगभग पाँच सौ

रचनाओं का प्रकाशन

प्रकाशित पुस्तकें : 1-'चोट्टा'(राज्य संसाधन केन्द्र,उ0प्र0

द्वारा पुरस्कृत)

2-'अपाहिज़'(भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत)

3-'घुँघरू बोला'(राज्य संसाधन केन्द्र,उ0प्र0 द्वारा पुरस्कृत)

4-'लम्बरदार'

5-'ठिगनू की मूँछ'

6- 'बिरजू की मुस्कान'

7-'बिश्वास के बंधन'

8- 'जनसंख्या एवं पर्यावरण'

सम्प्रति : 'पैदावार' मासिक में उप सम्पादक के पद पर कार्यरत

सम्पर्क : उज्ज्वल सदन, मुंशी खेड़ा, पो0- अमौसी हवाई अड्डा, लखनऊ-226009

मोबाइल : 09616586495

-मेल : ujjwal226009@gmail.com

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