सोमवार, 6 मार्च 2017

प्राची - जनवरी 2017 : आपने कहा है - दिसम्बर अंक ऐतिहासिक अंक है

आपने कहा है

दिसम्बर अंक ऐतिहासिक अंक है

सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मासिक पत्रिका प्राची का नयनाभिरामी सुन्दर, रंगीन मुखपृष्ठ लिये हुए दिसम्बर 2016 का नवीनतम अंक मेरे हाथों में है. हिन्दी साहित्य की नियमित प्रकाशित होने वाली, मासिक पत्रिकाओं में अपना एक अलग ही मुकाम स्थापित करने वाली इस ‘प्राची’ मासिक पत्रिका का मैं उस अवधि से नियमित पाठक हूं, जब प्राची, प्रज्ञा के नाम से प्रकाशित हुआ करती थी. मुझे सदैव से यह पत्रिका प्रिय रही है और प्राची के स्थाई स्तंभों में सबसे अधिक मुझे संपादकीय ही प्रभावित किया करती है. विगत एक-दो अंकों से प्राची में संपादकीय प्रकाशित नहीं हो रही थी. लेकिन प्राची के इस नवीनतम अंक में भी आदरणीय राकेश भ्रमर जी की संपादकीय का प्रकाशन न होने से मैं अचंभित हो उठा, क्योंकि भम्रर साहब संपादकीय में निरंतर उन विषयों पर बेबाकी से अपनी कलम चलाते रहे हैं, जिन विषयों का आम आदमी और आम पाठक से उसका गहरा सरोकार रहता है. मैं सोचता हूं कि यदि दिसम्बर के अंक में भ्रमर जी की संपादकीय प्रकाशित होती तो निश्चित ही उसका विशय ‘नोटबंदी’ ही होता, क्योंकि वर्तमान में भारत में सबसे ज्यादा चर्चा यदि किसी बात की हो रही है तो वह केवल नोटबंदी की ही हो रही है. आशा है आगामी अंकों में निश्चित रूप से फिर आदरणीय राकेश जी की वही सारगर्भित संपादकीय पढ़ने मिला करेगी, जिसे हम पूर्व में नियमित पढ़ा करते थे.

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प्रिय प्राची में सुखद परिर्वतन स्पष्ट परिलक्षित हो रहे हैं. जिन्हें मैंने ही नहीं प्राची के हर पाठक ने महसूस किया होगा. प्राची में हो रहे इन परिर्वतनों से निश्चित ही प्राची की लोकप्रियता में श्रीवृद्धि होगी, ऐसा मैं मानता हूं. देखते ही देखते प्राची के पृष्ठों की संख्या कब 76 पृष्ठों से 88 पृष्ठों की हो गई, पता ही नहीं चला. यही कार्यशैली और कार्यकुशलता पाठकों के मन को भाती है.

यदि यह कहा जाये कि प्राची का दिसम्बर 2016 का यह अंक ऐतिहासिक है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि इस अंक में भारत के अभिन्न अंग कश्मीर पर सार्थक संस्मरण, आलेख, कहानियां, कविताएं, दोहे इत्यादि साहित्य सामग्री प्रचुर मात्रा में प्रकाशित की गई है जिनमें कश्मीर की सुंदरता, उसकी गरीबी, बेरोजगारी, उसके पर्यटन व्यवसाय पर पड़ने वाले प्रभाव, उसके द्वारा भोगे गये आतंकवाद का सटीक और जीवंत चित्रण पाठकों को प्रभावित ही नहीं अपितु द्रवित करने में भी सफल हुआ है. इसीलिये यह अंक पठनीय ही नहीं संग्रणीय भी बन गया है.

संपादकीय में प्रकाशित इन्द्रेष कुमार के व्यक्तव्य ‘आतंक शून्य भारत’ में आतंक के जन्म के कारण, आतंक का प्रभाव एवं समाधान दर्शाते हुए इन्देश कुमार जी का यह ज्ञानवर्धक, उद्देश्यपरक, उद्बोधन पाठकों को प्रभावित करने में पूर्णतः सफल हुआ है. इस अंक में प्रकाशित सभी कहानियां सशक्त एवं पठनीय है. ये कहानियां पाठक के मन को छूने में पूर्णतः सफल भी हुई हैं.

हिन्दी साहित्य की कठिनतम विधाओं में दोहे और कुण्डलियों पर वैसे भी बहुत कम लिखा जा रहा है जिसमें महिलाओं की उपस्थिति नगण्य सी है. तभी सरिता भाटिया के दोहे और कुण्डलियां पढ़कर इस बात की सुखद अनुभूति हुई कि अब इन विधाओं में महिलायें भी आगे आने लगी हैं. सरिता जी के दोहे और कुण्डलियां पठनीय और बढ़िया हैं. युनूस अदीब की गजल काफी प्रभावित करती है और मुझे पढ़ कर यही लगता है कि उर्दू शेरो शाइरी को पसंद करने वाले, उसमें रुचि रखने वाले पाठक भविष्य में यूनुस अदीब से इसी तरह की मन को छूने वाली, अच्छी गजलों को सुनने और पढ़ने की आशा अवश्य कर सकते हैं. हिन्दी साहित्य में डॉ. मधुर नज्मी का एक जाना पहचाना नाम है. वे उर्दू साहित्य को पूर्व में भी अच्छी गजलें दे चुके हैं. उनकी दोनों गजलें अच्छी बन पड़ी हैं. इस अंक में कवि राजेश जैन राही के कश्मीर पर लिखे गये दोहे उनकी योग्यता और प्रतिष्ठा के अनुरूप ही सृजित किये गये हैं. सदैव की तरह स्थाई स्तम्भ में दिनेश बैस पाठकों को प्रभावित करने में पूर्णतः सफल हुए हैं. पढ़कर अच्छा लगा. बहुत दिनो ंबाद साहित्य मर्मज्ञ डॉ. राजकुमार ‘सुमित्र’ के दोहे पढ़कर मन आनंदित हुआ. प्राची की सबसे अच्छी और आह्लादकारी बात यह है कि इसमें सुप्रतिष्ठित और नवांतुक सभी लेखकों को समुचित स्थान दिया जाता है. यही बात प्राची को अन्य पत्रिकाओं से अलग करती है.

डॉ. भावना शुक्ल द्वारा इन्द्रेश कुमार जी से की गई बातचीत पढ़कर मुझे ऐसा लगता है कि पाठकों को प्रायः उन सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो जायेंगे जो बरसों से पाठकों के मन में विद्यमान हैं. यह उनका एक सशक्त साक्षात्कार है. इसे प्रकाशित करने के लिये संपादक जी को धन्यवाद.

जब आप सभी मेरा यह पत्र पढ़ रहे होंगे, तब तक जनवरी 2017 की आमद हो चुकी होगी. इसलिये प्राची परिवार के सभी लेखकों, पाठकों, शुभचिंतकों को नववर्ष की ढेरों शुभकामनायें. इस नववर्ष 2017 में हमारी प्रिय प्राची उन्नति के नये आसमान छुए यही शुभ कामना है.

प्रभात दुबे, शक्तिनगर, जबलपुर

मो. 9424310984

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