बुधवार, 22 मार्च 2017

हास्य व्यंग्य कविता/दोहे - हुये रिटायर जॉब से - हरिहर झा

मयंक घेदिया की कलाकृति

हुये रिटायर जोब से, अब पूरा आराम   
बीवी से लो मिल गये, बर्तन घीसू काम

रिटायर हैं ऑफिस की, दौड़ गई अब छूट
चक्कर सैन्ट्रल-लिंक के, घिसते जाते बूट

ऐलारम टिन टिन करे, गुस्सा ऐसा आय
एक हथोड़ा मार कर, कचरे में हो बाय

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चांद सितारे सो गये, पक्षी को विश्राम
नर मूरख है जाग कर, सपने में भी काम

जमी आसमाँ सो रहे, पृथ्वी ऊंघे खूब
खर्राटे भरती हवा नर क्यों जाता ऊब

दस घंटा ऑफिस रहे, लेपटॉप ले साथ
करो वर्क घर से अलग, मैनेजर है नाथ

बोर हुआ है उद्यमी, खालीपना उबाय
सुस्त बड़े आराम से, कुर्सी पर ले चाय

मन की वृत्ति शान्त है, करे जुगाली  गाय  
नर ठूँसता फास्ट फूड   जल्द निवाला खाय

झर झर झरना, सो रहा   बगुला आँखें मींच
नर सोता तकिया लिये खर्राटों के बीच

ढांढस बँधी-पगार से, मस्ती का बीज बोय
पेंशन में टेंशन बहुत, जल्दी खाली होय।
 

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हरिहर झा

जन्म स्थान: बांसवाड़ा ( राजस्थान )

प्रकाशित कृतियाँ:  "भीग गया मन", और “Agony churns my heart”। मेलबर्न पोयेट्स एसोसियेशन द्वारा द्विभाषी काव्यसंग्रह “Hidden Treasure” में तथा गेलेक्सी पब्लिकेशन द्वारा “Boundaries of the Heart” में कविता प्रकाशित हुई।
सरिता में लेख व वेब-दुनिया, साहित्य-कुंज, पूर्वाभास, काव्यालय , परिकल्पना, अनुभूति़, हिन्दीनेस्ट, कृत्या़ (हिन्दी व अँगरेजी), काव्यालय आदि में कवितायें प्रकाशित हुई। ’इंटरनेशनल लाइब्रेरी इन पोयट्री’ ने दो कविताओं को “Sound of Poetry” कविता की एलबम में शामिल किया। स्वयं की हिन्दी कविताओं पर दो संगीतबद्ध एलबम निकले।

लेखन: सृजनगाथा के स्तंभलेखक की हैसियत से आस्ट्रेलिया की संस्कृति और इतिहास पर लिखने के अलावा जोन हॉवर्ड, केरी पेकर, बुकर एवार्ड के विजेता पीटर केरी आदि कईं प्रसिद्ध व्यक्तियों पर आलेख लिखे तथा यहाँ के जाने माने भारतवंशियों के साक्षात्कार लिये। आपने ’हिन्द-युग्म’ के लिये रचनात्मक सहयोग दिया। शेक्सपियर के सोनेट का अनुवाद भी किया। काव्यसंग्रह में - देशान्तर, गुलदस्ता,बूमरैंग, अंग अंग में अनंग, मृत्युंजय, नवगीत-२०१३, VerbalArts(GJPP Author Press).

 

सम्मान: अँगरेजी कविताओं पर boloji द्वारा सम्मान और ’इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ पोयट्स’ (लास वेगास) तथा ’इंटरनेशनल लाइब्रेरी इन पोयट्री’ द्वारा एवार्ड मिले । हिन्दी व अँगरेजी कविताओं के योगदान के लिये भारतीय प्रौढ़ संघ (NRISA) ने इस वर्ष आपको “Community Service Award” प्रदान किया। साथ ही आपको परिकल्पना हिन्दी भूषण सम्मान (2013) भी मिला। 2015 में अनहद कृति द्वारा काव्य-प्रतिष्ठा-सम्मान मिला।[

 

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