बुधवार, 8 मार्च 2017

अनेक तेवरी-संग्रहों का एक ही पुस्तकाकार रूप- “ रमेशराज के चर्चित तेवरी संग्रह “

अनेक तेवरी-संग्रहों का एक ही पुस्तकाकार रूप-

“ रमेशराज के चर्चित तेवरी संग्रह “

+अशोक अंजुम

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सार्थक सृजन प्रकाशन, 15/109, ईसानगर, अलीगढ़ से प्रकाशित पुस्तक “ रमेशराज के चर्चित तेवरी संग्रह “ में तेवरी की स्थापना में प्राण-प्रण से जुटे तेवरीकार श्री रमेशराज ने अनेक तेवरी संग्रहों को एक ही स्थान पर पुस्तकाकार परोसा है।

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‘ सिस्टम में बदलाव ला ‘ के अंतर्गत जहाँ जनकछंद में 19 तेवरियाँ हैं, वहीं ‘ घड़ा पाप का भर रहा ’ तथा ‘ धन का मद गदगद करे ’, ‘रावण कुल के लोग ’, ‘ककड़ी के चोरों को फांसी ‘, ‘ दे लंका में आग ‘, लम्बी तेरी [तेवर-शतक ] हैं। ‘ होगा वक्त दबंग ‘ के अंतर्गत नवछ्न्दों में तेवरियाँ हैं। ‘ आग जरूरी ‘, ‘ मोहन भोग खलों को ‘, ‘ आग कैसी लगी ‘, बाजों के पंख कतर रसिया ‘ आदि संग्रहों में अनेक छंदों के साथ-साथ हाइकु छंद का भी प्रयोग है। ‘ मन के घाव नये न ये ‘ में यमकदार तेवरियाँ हैं, देखें-

इज्जत यूं उतार, तू मजदूर-गरीब की

रोजनामचा मत दिखा, रोज ना मचा रार।

पुस्तक की विस्तृत भूमिका ‘ तेवरी इसलिए तेवरी है ‘ के अंतर्गत श्री रमेशराज ने तेवरी के विरोधियों के उपहासों व सवालों का बड़ी बेबाकी से तार्किक समाधान दिया है।

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अभिनव प्रयास, जनवरी-मार्च 2016, पृष्ठ-33

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