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वरिष्ठ कवि राजेन्द्र नागदेव की दसवीं काव्यकृति ‘सुरंग में लड़की’ का लोकार्पण

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अम्बिकाप्रसाद दिव्य साहित्य समिति के तत्वावधान में 25 दिसंबर 2016 को महादेवी वर्मा सभाकक्ष, हिंदी भवन, भोपाल में वरिष्ठ साहित्यकार श्री संतोष चौबे की अध्यक्षता, कवि श्री बलराम गुमास्ता के मुख्य आतिथ्य, चर्चित युवा कथाकार डॉ. विवेक मिश्र (दिल्ली) व कवि-अनुवादक डॉ. मणिमोहन (गंजबासौदा) के विशिष्ट आतिथ्य और कवि-अनुवादक आनंदकृष्ण के संचालन में वरिष्ठ कवि राजेन्द्र नागदेव के दसवें कविता संग्रह ‘सुरंग में लड़की’ का लोकार्पण सम्पन्न हुआ ।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों के स्वागत के पश्चात अपने वक्तव्य में समकालीन पीढ़ी के चर्चित कवि श्री राग तेलंग ने कहा कि आज के इस कठिन समय में भी कुछ लोग विचार की डोर थामे हुए हैं जिससे बँधी संवेदनशीलता की पतंग समय के झोंकों से उद्वेलित होते हुए भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्षरत है। ये लोग समय को जागृत कर रहे हैं । इनकी प्रतिबद्धता “व्यक्ति के व्यक्ति बने रहने देने के प्रति” है। वरिष्ठ कवि राजेन्द्र नागदेव ऐसे ही जीवंत रचनाकार के रूप में हमारे बीच निरंतर सृजनरत हैं ।

कृति के लोकार्पण के बाद आनंदकृष्ण ने अपना समीक्षा आलेख प्रस्तुत किया । उन्होंने कहा कि राजेन्द्र नागदेव यथार्थ को उसकी संपूर्णता में ग्रहण करने में विश्वास रखते हैं । वे मानते हैं कि यथार्थ की समझ को वे अनुभव और भी अधिक अर्थवान बनाएँगे जो सीधे जीवन से रचना में आविर्भूत होते हैं । वस्तुतः वह विचारशैली किसी रचनाकार का जुड़ाव यथार्थ को संपूर्णता में ग्रहण करने के लिए अनिवार्य है जो सामाजिक यथार्थ को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में समझने की कोशिश करती है तथा सर्वजन के हित में उसे बदलना चाहती है । राजेन्द्र नागदेव इसी रचनात्मकता को स्वीकार करते हैं । इसीलिए आशंकाओं का मुखर कवि होते हुए भी उनकी कविता में अर्थवत्ता, जीवंतता और सारगर्भिता है ।

राजेंद्र नागदेव ने कहा की उनकी कविताएँ ही उनका वक्तव्य हैं । जो देखा, अनुभव किया वही शब्दों में ढल कर कविता बन गया । कविता लिखने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया । उन्होने “सुरंग में लड़की” संग्रह से “कविता की किताब”, “पृथ्वी के लिए दयामृत्यु”, “चिड़िया” और कविता”, “समय से बाहर”, “बच्चो ! मैं आ रहा हूँ”, “सुरंग में लड़की” कविताओं का पाठ किया जिसे सभी श्रोताओं ने मुक्त कंठ से सराहा ।

गंजबासौदा से पधारे चर्चित कवि-अनुवादक डॉ. मणिमोहन ने पाठकीय दृष्टि से राजेन्द्र जी के कविताकर्म का विश्लेषण करते हुए कहा कि उनकी कविता हमेशा आम जन के साथ उसके समर्थन में खड़ी दिखती है । उन्होने प्रतीकों और बिंबों का भरपूर प्रयोग किया है ।

विशेष अतिथि डॉ. विवेक मिश्र (दिल्ली) ने कहा कि राजेन्द्र नागदेव की कविताओं में जो तरलता है वह उन्हें भूत, वर्तमान और भविष्य में सहज ही तिर जाने की सुविधा देती है । वे मूर्त को अमूर्त और अमूर्त को मूर्त करते हुए अपनी बात कहते हैं । वे एक स्वप्नदृष्टा कवि हैं जो हर हाल में जीवन की कोमलता, उसकी सरसता को बचाए रखना चाहते हैं । कवि मणिमोहन ने कहा कि राजेन्द्र नागदेव अपनी कविताओं में बहुत बारीक डिटैल्स में जाते हैं । वे अपनी रचना में प्रकृति और मनुष्य के अंतर्सम्बंध को रूपायित करते हैं ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, वरिष्ठ कवि श्री बलराम गुमास्ता ने कहा कि राजेन्द्र नागदेव की कविताएँ पाखण्ड को तोड़ कर असली संवेदना और प्रेम को पकड़ती हैं । उनकी कविताओं में देश, पर्यावरण और क्षय होती मनुष्यता से जुड़ी चिंताएँ बार-बार आतीं हैं ।

कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री संतोष चौबे ने कविताओं पर अपने वक्तव्य में कहा कि राजेन्द्र नागदेव की कविताओं का रंग धूसर है । वे संशय के कवि हैं और संवाद की शैली में अपनी बात कविता में रखते हैं। वे पूरी तरह भारतीय और स्थानिय बिंबों को चुनते हैं। हमें देखना चाहिए कि क्यों राजेन्द्र नागदेव की कविता में अस्सी के दशक के प्रचलित बिंब जैसे चिड़िया, नदी, बच्चे वापसी कर रहे हैं। शायद ये बिंब समय और समस्याओं की समानता के कारण हों। उनकी कविताओं में आई प्रलय की इच्छा ध्वंस की नहीं बल्कि नवनिर्माण एवं पुनर्सृजन की आकांक्षा के साथ है।

कार्यक्रम के अंत में श्री जगदीश किंजल्क ने आभार प्रकट किया । इस अवसर पर सर्वश्री मुकेश वर्मा, पलाश सुरजन, महेन्द्र गगन, राम मेश्राम, वरिष्ठ चित्रकार सच्चिदा नागदेव, नवल जायसवाल, ज़हीर कुरेशी, दिनेश प्रभात, विपुल श्रीवास्तव, संजय सिंह राठौर, डॉ. उर्मिला शिरीष, सुश्री शीला नागदेव, राजो किंजल्क, नीतिका वर्मा, रेखा भटनागर आदि सहित नगर के प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ।

* * * - अम्बिकाप्रसाद दिव्य साहित्य समिति, भोपाल

* संलग्न छायाचित्र में बाएँ से- राग तेलंग, जगदीश किंजल्क, राजेन्द्र नागदेव, मणिमोहन, संतोष चौबे, बलराम गुमास्ता, विवेक मिश्र, आनंदकृष्ण

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