बुधवार, 5 अप्रैल 2017

प्राची - फरवरी 2017 / साहित्य समाचार

साहित्य समाचार

काव्यायनी 24 वां स्थापना उत्सव एवं ‘’दरबान ऊंघते खड़े रहे’’ का विमोचन

clip_image002

साहित्यिक संस्था ‘काव्यायनी’ का चौबीसवाँ स्थापना दिवस दिनांक 31 दिसंबर 2016 को वाराणसी के बड़ा लालपुर में आयोजित किया गया. देवरिया से पधारे साहित्यिक पत्रिका ‘अंचल भारती’ के संपादक डॉ. जय नारायण मणि त्रिपाठी ने समारोह की अध्यक्षता की. इस अवसर पर काशी से प्रकाशित पत्रिका ‘सोच विचार’ के संपादक एवं वरिष्ठ समालोचक डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. वक्ताओं ने कहा कि काशी की साहित्य परम्परा अत्यंत समृद्ध एवं प्राचीन है. वर्तमान में इस परंपरा के पोषण में ‘काव्यायनी’ का योगदान अमूल्य है.

[ads-post]

समारोह में सूर्यप्रकाश मिश्र के काव्य संग्रह ‘दरबान ऊंघते खड़े रहे’ का विमोचन किया गया. आयोजन का संचालन वाराणसी से प्रकाशित ‘समकालीन स्पंदन’ के संपादक गजलकार धर्मेन्द्र गुप्त साहिल ने किया.

इस अवसर पर अवकाश प्राप्त न्यायाधीश डॉ. चंद्रभाल सुकुमार के जन्मदिन पर उन्हें मुबारकबाद दी गयी . समारोह में काव्य गोष्ठी भी हुई जिसमें मुख्य अतिथि डॉ. जितेन्द्रनाथ मिश्र, अध्यक्ष डॉ. जयनारायण मणि त्रिपाठी, गोहना, मऊ से

पधारे ‘काव्यमुखी साहित्य अकादमी’ के महानिदेशक वरिष्ठ शायर डॉ. मधुर नज्मी, संचालक धर्मेन्द्र गुप्त साहिल, चर्चित युवा शायर अभिनव अरुण, डॉ. चंद्रभाल सुकुमार, गीतकार सुरेंद्र वाजपेयी, सूर्यप्रकाश मिश्र और ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने काव्यपाठ किया. आरम्भ में स्वागत ‘‘काव्यायनी’’ की अध्यक्ष श्रीमती लीला श्रीवास्तव ने और अंत में आभार प्रकाश डॉ. चंद्रभाल सुकुमार ने किया.

प्रस्तुति : - अभिनव अरुण, वाराणसी (उ.प्र.)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------