प्राची - फरवरी 2017 / कहानी / उनका मन / देवेन्द्र कुमार मिश्रा

SHARE:

कहानी उनका मन देवेन्द्र कुमार मिश्रा ऐ सा पहली बार नहीं हुआ. पहले भी हो चुका है. हां, लोग इसे अच्छी नजरों से नहीं देखते. समाज इस तरह के र...

कहानी

उनका मन

देवेन्द्र कुमार मिश्रा

सा पहली बार नहीं हुआ. पहले भी हो चुका है. हां, लोग इसे अच्छी नजरों से नहीं देखते. समाज इस तरह के रिश्तों को बेमेल, अनैतिक कहता है. बहुत हद तक इस सम्बंध, जिसे आप प्यार कहते हैं, शादी कहते हैं, इनकी उम्र कितनी होती है. महज आकर्षण है, वासना है या कुछ और...

क्या पूर्व समय में 50 का दूल्हा और 20 या 25 की दुल्हन का विवाह नहीं हुआ है. वजह धर्म रहा हो या धन या अभी ऐसा हो नहीं रहा है. क्या शिष्या गुरू में विवाह नहीं हुए हैं? फिर ये वे गुरुवर्य तो नहीं हैं. ये तो आम आदमी हैं, त्रस्त और परेशान, पीड़ित. इन्हें गुरु की बजाय शासकीय कर्मचारी शिक्षक, प्रोफेसर कहें तो ज्यादा अच्छा है. फिर कई लोगों पर बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम वाली बात भी सिद्ध होती है. कई बुजुर्गवार हैं जिनके दिल अभी भी जवान हैं. हां हमारे शासकीय प्राध्यापक चतुरसेन की दिलेरी है ये तो कि प्यार भी किया और खुलेआम स्वीकार भी. प्यार की जगह लफड़ा भी कह सकते हैं. अब इस तरह के सम्बंधों को यदि मीडिया दिखाये तो फिर वो घटनायें हो जाती हैं. फिर ऐसी चटपटीदार घटना का जनता जनार्दन में चर्चा का विषय होना स्वाभाविक ही है. विरोध किये बगैर नहीं जी सकते.

58 वर्ष के चतुरसेनजी जो कि रिटायर होने की दहलीज पर हैं...साधारण सी शक्ल सूरत वाले. 58 की उम्र में जो एक व्यक्ति के लक्षण होने चाहिए, पूरे के पूरे हैं. मसलन बचे-खुचे सफेद बाल. मुंह में दांतों का अकाल. पिलपिली सी चमड़ी. नजर का चश्मा. चार जवान बच्चे. एक बीबी, पूर्ण गृहस्थन, ठीक-ठाक. चतुरसेन जी के बच्चों की उम्र की मौली चतुरसेनजी की शिष्या. नई उम्र, खूबसूरती. फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली. क्या उम्र होगी 20 या 22 वर्ष, पर कानूनी दृष्टि से बालिग. कॉलेज में एम.ए. कर रही है. मतलब उच्चशिक्षित. पर कहते हैं कि समझ अनुभव से आती है और अनुभव उम्र से. शिक्षा भर से आती तो क्या मौली ऐसी हरकत करती? अब क्या करें? दिल है कि मानता नहीं. फिर एक कहावत है. मेढकी से दिल लगा तो परी क्या चीज है? इसे थोड़ा उलट लीजिए मौली के हिसाब से. मेंढक पर दिल आया तो चतुरसेन क्या चीज है?

मौली कहती है कि वह बालिग है. पढ़ी-लिखी है. समझदार है. वह अपने निर्णय खुद ले सकती है. वह जो कर रही है. उसकी अपनी इच्छा है. किसी प्रकार का कोई दवाब नहीं. वह अपना भला-बुरा समझ सकती है. स्त्री शिक्षा, स्त्री शक्ति, स्त्री स्वतंत्रता वाली सभी बातें. समाज का क्या है? करते रहो- हाय-हाय. जलाते रहो पुतला.

इधर चतुरसेन की धर्मनिष्ठ पत्नी रूपा का कहना है कि उनका आदमी तो सज्जन है. इस कमीनी मौली ने अपने रूप, जवानी के जलवे से सीधे-सीधे उनके पति को फांस लिया है. इसी वजह से धर्मनिष्ठ पत्नी रूपा ने अपने पति को कुछ कहने की बजाय एक बार कॉलेज में, एक बार अपने घर में मौली की धुनाई की. औरत जात जो ठहरी, औरत को ही कोसेगी. कुतिया, कमीनी, चरित्रहीन, वेश्या न जाने क्या-क्या कहा? मीडिया वालों ने तो बाकायदा मौली की धुनाई होते हुए चित्र भी प्रसारित किये और बच्चे बेचारे शर्म से इधर-उधर मुंह छिपाये घूमते रहे. कहीं कोई मीडिया वाले उनसे उनके पिता की करतूत पर प्रश्नोत्तर न करें. जैसे लड़का कितना भी खराब हो, मां हमेशा अपनी बहू को ही कोसेगी. लड़के को नहीं. ऐसे ही चतुरसेन को छोड़ रूपा ने मौली की ही करतूत बताई. अब ऐसी पतिभक्त पत्नियां हो तो आदमी को काहे की टेंशन, चिंता.

मौली ने एम.ए. फाइनल हिंदी साहित्य में दाखिला लिया तो उसके प्रोफेसर थे चतुरसेन. चतुरसेन को धीरे-धीरे आभास हुआ कि इस उम्र में कोई उनकी तरफ ध्यान दे रही है. तब से वे थोड़ा सज संवरकर आने लगे. इससे पहले, इस आभास के पहले, वे ठीक उसी ढंग से रहते थे जैसे 58 वर्ष का पुरुष रहता है. करते भी क्या बेचारे? उनकी पत्नी रूपा जब देखो उनसे झगड़ती रहती. रूपा का ध्यान बच्चों पर ही रहता. चतुरसेन को तो घर में सुबह अपने साथ-साथ पत्नी-बच्चों के और घर-गृहस्थी के काम भी करने होते. सुबह पानी भरना. गैस की टंकी लाना, फोन का बिल, बिजली का बिल, अनाज, राशन का सामान लाने से लेकर सुबह का दूध लाने तक. कई बार तो पत्नी को, बच्चों को चाय बनाकर भी देना पड़ता. बच्चों को केवल रुपयों से मतलब रहता. कॉलेज की फीस हो या जेब खर्च. बस तभी पिता याद आते. पत्नी थी कि जमाने भर का गुस्सा पति पर उतारती. जमाने भर की शिकायतें भी. पड़ोसी के घर में ये है. हमारे घर में नहीं है वगैरा-वगैरा. शिकायत ये भी रहती कि बाकी के प्रोफेसर ट्यूशन, कोंचिंग, पेपर सुधारने के नाम पर कितना पैसा बना रहे हैं और चतुरसेनजी निरा मूर्ख. ईमानदारी के पुजारी. चार बच्चों का परिवार. कल बच्चों की शादी करना. पड़ोसियों की रईसी के हिसाब से खुद को मेंटेन करना है. ऐसे में क्या इज्जत रह जायेगी उनकी? पर चतुसेनजी है कि कुछ समझते ही नहीं, मूर्ख कहीं के.

सो चतुरसेनजी को अक्सर जली-काटी सुननी पड़ती. जीवन जैसे बेरंग हो चला. अस्वाद भोजन और रंगहीन जीवन एक सा. मौली हिंदी के प्रोफेसर चतुरसेन की सादगी से प्रभावित थी. उनकी वाकपटुता से भी. उनकी बुद्धिमानी से भी. चतुरसेन जी कॉलेज में कोई प्रश्न पूछते तो मौली सबसे पहले जवाब देती सम्मान सहित. बहुत से छात्र तो गंवार किस्म के थे. जो न तो चतुरसेन की इज्जत करते, न सम्मान. बल्कि मजाक उड़ाते रहते. चतुरसेन मजाक से तिलमिलाते नहीं थे. कई छात्रों का तो कहना ही ये था कि हिंदी कोई पढ़ने, सर छपाने का विषय है. ये तो टाईमपास है. केवल डिग्री लेने के लिए उन्होंने हिंदी साहित्य लिया.

चतुरसेन से छात्रों को इस बात की उम्मीद भी नहीं थी कि उन्हें उत्तीर्ण करवाएं अच्छे नंबरों से. सो वे तो उन प्रोफेसरों को पैसा और मान देते जो उनके रिजल्ट सुधारे. चतुरसेन तो गोबर गणेश ठहरे. ये किस काम के और काम के नहीं तो इज्जत भी नहीं. बहुत से छात्र तो उनका पीरियड गोलकर सिनेमा चले जाते. क्लास रूम में मौली ही उनकी तरफ एकटक देखती सुनती-पढ़ती. अन्य छात्र-छात्रायें या तो धीरे-धीरे आपस में बतियाते. आपस में मजाक करते, चिढ़ाते एक-दूसरे को. कुछ कॉपियों में उल्टे-सीधे चित्र बनाते और कुछ प्रेम-पत्र लिखते.

ऐसे में किसी एक खूबसूरत जवान पढ़ी-लिखी लड़की का चतुरसेन को सम्मान देना उन्हें सुनना काफी था, चतुरसेन का ध्यान खींचने के लिए. रही बात मौली की. तहसील स्तर पर बी.ए. किया. आगे पढ़ने की इच्छा थी. घर का माहौल भी उसे कुछ रास नहीं आया. पिता से 15 साल छोटी मां. पिता 50 के मां 35 की. पिता अपनी उम्र के हिसाब से सज्जन, शांत, धीर, गंभीर. सादा जीवन उच्च विचार वाले और मां अपनी उम्र के हिसाब से चंचल, चपल, हंसी मजाक करने वाली. सजने संवरने में मस्त.

मां और उसके पिता की कम ही बनती थी. मां कभी पड़ोसन के जवान होते लड़कों के साथ सिनेमा, बाजार जाने में भी संकोच नहीं करती. जिस रुचि और निगाह के साथ पति को देखना चाहिए, वैसी रुचि और निगाह उसकी मां की लड़कों में होती. शायद उसे अपने 50 वर्षीय पति से वो सब कुछ न मिल पा रहा हो जो वो चाहती थी. पिता को इस बारे में उसने कभी मां को टोकते हुए भी नहीं देखा. पता नहीं शायद इसी कारण मां उसे कुछ अच्छी नहीं लगती.

एक-दो बार उसने मां को समझाया तो मां ने मौली को ये कहते हुए डांटा-फटकारा- ‘‘तुम बेटी होकर मां को नसीहत देती हो. मेरा हंसना, बोलना, घूमना अच्छा नहीं लगता. एक तो ऐसा पति मिला, फिर ऐसी लड़की.’’ कई दिनों तक घर का माहौल बोझिल रहता. मौली फिर मां से कुछ नहीं कहती.

अपने पिता के शांत, गंभीर, सादा जीवन से वह बहुत प्रभावित थी. उसने 15 वर्ष की उम्र में जाना बुजुर्ग व्यक्ति धोखा नहीं दे सकता. उनमें चंचलता नहीं होती. उनमें होती है गंभीरता, ईमानदारी, सहन करने की क्षमता. जवान व्यक्ति का कोई भरोसा नहीं. जवान उसकी मां की तरह होते हैं. उसके हमउम्र कॉलेज में साथ पढ़ने वाले लड़के कभी इस लड़की के साथ कभी उस लड़की के साथ. बेईमान कहीं के.

अपने पिता की छवि उसने प्रोफेसर चतुरसेन में दिखाई दी. इकलौती लड़की होने के बाद भी मौली की इच्छा पर पिता ने उसे एम.ए. के लिए जिले के कॉलेज में दाखिल करवा दिया और छात्रावास में रहने खाने का इंतजाम भी. हर महीने रुपये पैसे भी भेजते.

प्रोफेसर चतुरसेन और मौली. कभी पढ़ाई के नाम पर. कभी ट्यूशन, कभी कॉलेज की पिकनिक के नाम पर एक-दूसरे से मिलते रहे. बातचीत होती रही और कब एक-दूसरे के इतने करीब आ गये कि दोनों को पता भी न चला. समाज, घर-परिवार दुनियादारी का उन्हें ध्यान ही नहीं आया. दोनों एक साथ घूमते-फिरते. बगीचे में बैठकर घंटों बातें करते. सिनेमा देखते. कभी चतुरसेन मौली की गोद में सिर रखकर दुनिया भूल जाते. कभी मौली चतुरसेन के सीने से लगकर अपने को शांत, हल्का महसूस करती.

मगर समाज की दो नहीं, दो हजार आंखें होती हैं और मुंह तो पूछो मत...लाखों-करोड़ों. खुसर-पुसर होने लगी. वे चलते तो लोग हंसते. वे मिलते तो समाज के ठेकेदार सिर फोड़ने को तैयार. किसी ने चतुरसेन की स्त्री रूपा के कान भर दिये. रूपा ने भरे बाजार में अपने चारों लड़कों को सामने खड़ा कर मौली की पिटाई कर दी. लड़के पिता को डांटते घसीटते घर ले आये. मौली रोते-रोते छात्रावास पहुंची.

दूसरे दिन अखबार वालों ने खूब मजे ले लेकर इस खबर को छापा. लोगों ने मजे लेकर पढ़ा. चूंकि चतुरसेन को कॉलेज पढ़ाने तो जाना ही पढ़ता, वहीं मौली से मुलाकात भी हो जाती. मौली भी कोई डरपोक लड़की नहीं थी. उसने स्वयं को गलत माना ही नहीं. सो उनका मिलना जारी रहा. अखबार छापते रहे. लोग हंसते रहे. उनके पुतले जलते रहे. इलैक्ट्रॉनिक मीडिया भनक लगते ही पहुंच गई. प्रोफेसर चतुरसेन और मौली से सीधी बात की. चतुरसेन की स्त्री से बात की. आस-पड़ोस से बातें की. कुल मिलाकर चतुरसेन का अपनी छात्रा से प्रेम स्वीकार करना और मौली का अपने प्रोफेसर से प्रेम का इकरार करना, दोनों का इसे गलत न मानना. मौली का अपनी उम्र, प्रोफेसर की उम्र का अंतर को महत्व न देना. दोनों का खुश रहना एक-दूसरे के साथ और इसका टी.वी. चैनलों पर सीधा प्रसारण. यह प्रेम-प्रसंग एक घटना बन गई.

नैतिकता की दुहाई देने वाले धार्मिक, सामाजिक संगठनों की बैठकें हुईं. निन्दा हुई. अखबार में बड़े-बड़े कॉलम छपने लगे. चौराहों पर बहसें होने लगीं. मीडिया वालों ने अपने कार्यक्रमों- सीधी बात, परिचर्चा में इस विषय को रखा. जमकर आलोचना हुई. इसे अनैतिक, अवैध संबंधों का नाम दिया गया.

मौली के पिता तक बात पहुंची. मां चीखी चिल्लाई, पिता खामोश रहे. हजारों विरोध, बंदिशों के बाद भी वे मिलते रहे. उन्हें नहीं लगा कि वे कुछ गलत कर रहे हैं. हालांकि चतुरसेन ने उम्र के इस अंतर को समझा. वे ये भी जान गये थे कि इस तरह मौली के जीवन से खिलवाड़ होगा. अब बस...मौली भी समझती थी उम्र के अंतर को. उसने अपने जीवन के विषय में भी सोचा. वो ये भी जानती थी कि प्रोफेसर का परिवार है. वो समझती थी. लेकिन मौली को प्रोफेसर में एक ईमानदार व्यक्तित्व दिखता था. उनके साथ वह स्वयं को सुरक्षित महसूस करती थी और प्रोफेसर भी मौली के साथ स्वयं को हल्का महसूस करते थे. प्रोफेसर को लगा कि उनकी उम्र जवान लड़की के साथ घूमने की नहीं है. भजन-पूजन भगवान में रमने और मरने की उम्र है. लेकिन पूरी जिंदगी तो जिम्मेदारियों के नाम पर कुर्बान कर दी थी. बेरंग से बदतर होती जिंदगी में मौली के साथ यही उन्होंने महसूस किया कि उनके जीवन के रंगहीन फूल रंग-बिरंगे होने लगे हैं.

मौली भी समझती थी कि प्रोफेसर से उन्हें न तो शारीरिक सुख मिल सकता है न ये साथ बहुत लंबा हो सकता है, लेकिन क्या करें वो, यदि उसका मन प्रोफेसर के साथ रहने में शांत होता है. दिल की अपनी मजबूरियां होती हैं. समाज किसी को माफ नहीं करता. समाज की परवाह करता कौन है? भौतिकवादी इसे अनैतिक कहते हैं. मनोचिकित्सक इसे बीमारी का नाम देते हैं. समाज के ठेकेदार इसे हवस, बुढ़ापे की आखिरी गर्मी कहते हैं. कुछ का कहना है कि बुढ़ऊ घाघ है. वासना प्रेमी है.

महिला संगठन कभी कभी तो मौली को समझाती-बुझाती हैं. कभी विरोध करती हैं. फिर पक्ष में बोलती हैं. धार्मिक संस्थायें इसे पाप, अनाचार कहती हैं, भारतीय संस्कृति के खिलाफ कहती हैं. कुछ दिन सभी कहते रहे. समझाते रहे. फिर शांत हो गये.

मीडिया वालों ने कुछ दिन खूब चटखारे लगाकर इस बेमेल प्रेम प्रसंग को खूब बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया. चैनलों की खूब टी.आर.पी. बढ़ी. इसके बाद वे भी एक गड्ढे में गिरे बच्चे की जीवन-मौत की कहानी दिखाने लगे. कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें दुनिया जहान से कोई विशेष लगाव नहीं था. उनका एक ही कहना रहता है. जो हो रहा है अच्छा हो रहा है...वे जाने उनका काम जाने. अपने को क्या लेना-देना? भारत क्रिकेट मैच जीते या हारे. कोई भी सरकार आये. कहीं कुछ भी हो जाये, इनके ठेंगें से. ऐसे लोग बड़े संत स्वभाव के होते हैं. लेकिन प्रेम, मोहब्बत, आशिकी पर ऐसे ही थोड़ी सदियों से कहानियां लिखी जाती रही हैं. फिल्में बनती रही हैं. आखिर कोई तो बात होगी.

तभी तो प्रोफेसर चतुरसेन और उनकी छात्रा मौली, एक बुढ़ऊ और एक जवान तमाम विरोधों को ठेंगा दिखाते हुए आज भी घूम रहे हैं. अभी-अभी निःशब्द फिल्म देखकर आये हैं. फिल्म देखते समय एक किशोर उम्र के लड़के की आवाज उनके कानों में पड़ी. ‘‘हमारी क्लास में भी एक टीचर है सेक्सी....मैं भी लाइन मारना शुरू करता हूं.’’ दोनों में विचार विमर्श चल रहा है और द्वन्द्व भी. क्या ये बेशर्मी नहीं? माना कि आपको प्रेम है एक-दूसरे से. पर क्या समाज के प्रति आपका कोई कर्त्तव्य नहीं? आने वाली पीढ़ी को आप क्या संदेश देकर जायेंगे और क्या सीखेंगे लोग इस घटना से. क्या त्याग, बलिदान से प्रेम की चमक और नहीं बढ़ेगी. ऐसा नहीं होना था. चलो ऐसा हो गया, तो क्या वे इतने स्वार्थी हो गये हैं. अपने प्रेम में इतने अंधे हो गये कि सिर्फ एक-दूसरे के अलावा उन्हें कुछ नहीं दिखाई दे रहा. क्या उनकी उच्च शिक्षा पूर्णतः संस्कार हीन है? क्या शिक्षा केवल उदरपोषण, जीविकोपार्जन का माध्यम भर है. क्या आने वाले शिक्षक, बच्चे आगे आने वाली पीढ़ी उनका उदाहरण दे-देकर इस तरह...नहीं...नहीं... हमने कोई पाप नहीं किया. हमने तो प्रेम किया है. सिर्फ प्रेम...

राम सीता से बड़ा तो नहीं हैं उनका प्रेम. राम ने सीता का परित्याग किया...मर्यादा के कारण...राज्य...समाज के कारण...ऐसी आदर्श जोड़ी फिर भी त्याग और हम शिक्षक एक आदरणीय पद, एक आदर्श और आदर्श ही अगर अमर्यादित हो जायें...क्या करें...क्या न करें...क्या भाग जाये कहीं? क्यों भागेंगे? क्या कोई अपराध किया है? पलायनवादिता कायरों, चोरों का काम है. क्या वे कायर हैं, चोर हैं?

लेकिन उनका मन...कैसे जियेंगे वे एक-दूसरे के बिना..? दिल से ऊपर दिमाग होता है. सोचो समझो फिर निर्णय लो. क्या परिणिति होगी उनके प्रेम की...लेकिन उनका मन...कितने दिन चलेगा उनका ये प्रेम...कल उनका उदाहरण देकर अन्य विवाहित पुरुष बहकेंगे. स्त्रियां, बच्चे उनको गालियां देंगे. घर बर्बाद होंगे. माता-पिता अपनी जवान बच्चियों को पढ़ने नहीं भेजेंगे. भेजेंगे भी तो शिक्षकों को शक, संदेह की दृष्टि से देखेंगे. शिक्षा बदनाम, शिक्षक बदनाम. शिक्षा के केन्द्र को व्यभिचार के दायरे में लिया जायेगा.

फिर विवाह के समय अग्नि के समक्ष लिये सात फेरे, सात वचन भंग के आरोपी नहीं हैं वे. नहीं...नहीं ये सब बकवास है...क्या दिया उन्हें समाज ने...समझा हमेशा...जली-कटी सुनाती रही...छोड़कर भागी तो नहीं किसी के साथ...निभा तो रही है...क्या उसके साथ विश्वासघात नहीं...यदि वो भी ऐसा करती तो...क्या इज्जत रह जाती उनकी समाज में, जाति में...खानदान में...आज यही सब मैं कर रहा हूं तो बेचारी रूपा, बच्चों पर क्या...गुजर रही होगी.

तो क्या मौली की मासूमियत...नादानी...का फायदा उठा रहा हूं मैं. मौली, अभी उसकी उम्र ही क्या है? वो नासमझ है मैं तो नहीं. नहीं, मैं नहीं जी सकता उसके बगैर. भाड़ में जायें सब. दो घड़ी का सुकून भी लोगों से बर्दाश्त नहीं होता. जलते हैं सब मुझसे. मौली, क्या किसी पूर्व अनुभव से बनी धारणा तो नहीं है उसकी. मां ने जो किया...वो क्या कर रही है. किसी का घर तोड़ रही है. क्या मान-मर्यादा केवल शिक्षक का कार्य है? शिष्य का कोई दायित्व नहीं.

एकलव्य जैसे शिष्य भी तो हुए हैं. गुरू के कहने पर जिसने अपना अंगूठा दे दिया. और वो तो अपने गुरू का नाम, काम, परिवार सब बर्बाद कर रही है. क्या उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं. पिताजी क्या सोच रहे होंगे. जैसी मां वैसी बेटी...कितने विश्वास से उन्होंने पढ़ने भेजा था. कैसे फिर कोई पिता अपनी पुत्री पर विश्वास करके उसे पढ़ने भेजेगा?

क्या समूची नारी जाति की शत्रु नहीं है वो? क्या धर्म, संस्कार, विवाह के कोई माने नहीं. बुद्धि की लगाम से कस तो रहे हैं. दोनों मन को...पर मन बड़ा मायावी है. बहुत कसने की जरूरत पड़ेगी मन को. सोच तो यही रहे हैं दोनों. मौली पढ़ाई छोड़कर घर जाने की. कभी कुछ-कभी कुछ. फिर भागना नहीं है, सामना करना है. विद्यार्थी जीवन सन्यास की भांति है. तपस्वी के तप की तरह ही मन पर बुद्धि की लगाम कसनी होगी.

बुजुर्गों का जीवन आदर्श है. अनुभव की खान है. लोग जाने-अनजाने उनसे प्रेरणा लेते हैं, सीखते हैं. स्थान नहीं बदलना है. मन बदलना है. सोच बदलना है. ये कहां की समझदारी है कि एक व्यक्ति के लिए सारे रिश्ते तोड़ दिये जायें. घर-परिवार समाज धर्म, जाति, भाषा संस्कार...हृदय में कहां समझ होती है? हृदय तो होता है मूर्ख...उनका मन...भटकता मन...छांव की तलाश में धूप से चोटिल होता उनका मन...

सम्पर्कः भरत नगर, चंदन गांव, छिन्दवाड़ा-480001 (म.प्र.)

COMMENTS

BLOGGER

विज्ञापन

----
-- विज्ञापन -- ---

|रचनाकार में खोजें_

रचनाकार.ऑर्ग के लाखों पन्नों में सैकड़ों साहित्यकारों की हजारों रचनाओं में से अपनी मनपसंद विधा की रचनाएं ढूंढकर पढ़ें. इसके लिए नीचे दिए गए सर्च बक्से में खोज शब्द भर कर सर्च बटन पर क्लिक करें:
मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$src=random-posts$s=200

-- विज्ञापन --

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लोककथाएँ_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|लघुकथाएँ_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|आलेख_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|काव्य जगत_$type=complex$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|संस्मरण_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=blogging$au=0$label=1$count=10$va=1$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3752,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,325,ईबुक,181,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,234,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2731,कहानी,2040,कहानी संग्रह,224,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,482,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,82,नामवर सिंह,1,निबंध,3,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,325,बाल कलम,22,बाल दिवस,3,बालकथा,47,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,211,लघुकथा,791,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,16,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,302,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1864,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,616,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,668,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,49,साहित्यिक गतिविधियाँ,179,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,51,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्राची - फरवरी 2017 / कहानी / उनका मन / देवेन्द्र कुमार मिश्रा
प्राची - फरवरी 2017 / कहानी / उनका मन / देवेन्द्र कुमार मिश्रा
https://lh3.googleusercontent.com/-wI5TvOLbPCA/WORoPYHkDqI/AAAAAAAA32E/JZ0ea66tPMg/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-wI5TvOLbPCA/WORoPYHkDqI/AAAAAAAA32E/JZ0ea66tPMg/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2017/04/2017_36.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/04/2017_36.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ