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प्राची - फरवरी 2017 / लघुकथाएँ

राजेश महेश्वरी

विनम्रता

एक बार समुद्र ने गंगा से पूछा- हर साल जब तुम अपने पूरे वेग के साथ आती हो तो तुम्हारे प्रवाह में बड़े-बड़े बरगद और पीपल के वृक्ष तक बहकर चले आते हैं, किंतु कभी बांस या सरकंडे तुम्हारे प्रवाह में बहकर नहीं आते?

गंगा ने कहा- जब मेरा वेग बढ़ता है तो बांस और सरकंडे झुकते चले जाते हैं, इसलिए मैं उन्हें नहीं उखाड़ पाती; किंतु पीपल और बरगद जैसे बड़े वृक्ष तनकर खड़े रहते हैं इसलिए मेरा वेग उन्हें उखाड़ देता है. जो अड़ियल होते हैं और झुकना नहीं जानते, वे विपरीत परिस्थितियों में उखड़कर नष्ट हो जाते हैं. किंतु जिनमें विनम्रता होती है और जो झुकना जानते हैं वे विपरीत पस्थितियों में भी सुक्षित रहते हैं.

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संघर्ष

एक मुर्गी के अंडों से चूजे बाहर आने के लिये संघर्ष कर रहे थे. उनके संघर्ष के कारण उनमें से हल्की सी आवाज आ रही थी. मुर्गी और अंडों के मालिक का बेटा उनकी तरफ देख रहा था और सोच रहा था- यदि मैं इन अंडों को तोड़ दूं तो चूजों के बाहर आने का रास्ता सुलभ हो जाएगा. उसने ऐसा ही किया, परन्तु वह यह देखकर अचंभित हो गया कि पहले अंडों से बाहर आकर चूजे फुदकने लगते थे किंतु फोड़कर निकाले गये चूजे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे.

उस दस वर्षीय बालक ने यह बात जाकर अपने दादाजी को बतलायी. दादाजी ने उसे समझाया- चूजे जब अंडे के अंदर रहते हैं और संघर्ष करके अंडे के खोल को तोड़कर बाहर आते हैं तो उनको अपने पैरों से काफी परिश्रम करना पड़ता है. इससे वे स्वयं ही मजबूत हो जाते हैं. तुमने यह सोचकर कि चूजे आसानी से बाहर आ जाएं, अंडों को तोड़ दिया; लेकिन इससे उनके पैर कमजोर रह गए. जीवन एक संघर्ष है और यही विकास की आधारशिला है. कोई भी सफलता बिना संघर्ष के प्राप्त नहीं होती.

सम्पर्कः 106, नयागांव, हाउसिंग सोसाइटी

रामपुर, जबलपुर-482008

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सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

बाजार

हरिनिवास पंडित शहर के मध्य में जूते-चप्पलों का एक शोरूम चला रहे हैं. सामने ही इसमाइल मियां पूजन सामग्री की दुकान खोले बैठे हैं.

ठाकुर बलदेव सिंह की किराना दुकान पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं. सम्पतराय महाजन ने फल-फूल तथा सब्जियों की भारी दुकान सजा रखी है.

इधर दलित दयाराम की सोने-चांदी की दुकान अलग ही चमचमा रही है. राम कृष्ण सर्राफ बिस्किट, बेकरी आयटम व चिप्स-कुरकुरे थोक में बेच रहे हैं. हरिप्रसाद हरिजन के होटल व भोजनालय में खाने वालों की भीड़ दिन भर लगी रहती हैं.

इस बार निगम के चुनाव में भारी बहुमत से विजयी हुई रामकली बाई नगर के महापौर पद को सुशोभित कर रही हैं. तो सरदार प्रीतमसिंह शहर की कृषि मंडी के मुख्य आढतिया हैं.

उधर गांव के अधिकांश खेतों को शहरी लोग संभालने लग गये हैं. ग्रामीण युवक शहरों में दुकानों पर काम कर रहे हैं. स्थिति यह है कि शहर गांव की तरफ और गांव शहर की तरफ दौड़ लगा रहे हैं.

बाजार के ये सारे सुखद दृश्य देख कर रामदीन को लगता है कि हमारा देश सामाजिक समरसता की ओर तेजी से बढ़ रहा है. किंतु समाज के मौजूदा हालात देखकर रामदीन को यह भी लगता है कि इस नव विकसित बाजारू परिदृश्य के बावजूद जातीय, सामाजिक एवं सांप्रदायिक सद्भाव कहीं पीछे छूटता जा रहा है. बदलते परिवेश में एक ओर रामदीन प्रसन्न हैं तो दूसरी ओर खिन्न भी.

सम्पर्कः 226, मां नर्मदे नगर, बिलहरी

जबलपुर- 482020 (म.प्र.)

मोः 09893266014

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