गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

सीमा असीम सक्सेना, बरेली की 4 कवितायें

seema

1) बहुत ज्यादा

मैं बहुत ज्यादा खुश होना चाहती हूँ

इतना ज्यादा कि भूल सकूँ

विरह की स्याह सख्त पीड़ाएं

जी जाऊं प्रेम के दर्द को

चेहरे पर मुस्कान रखते हुए

ताकि बीत जाये ये वक्त और

ले आये खुशगवार मिलन का नवीन वक्त !!

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2) बहुत ज्यादा

मैं बहुत ज्यादा पाना चाहती हूँ

अपनी जिंदगी से

इतना ज्यादा कि

हर बार पाने के बाद

कुछ कमी रह जाये !!!

 

3 ) बहुत ज्यादा

मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता है

हर पल तुम्हें याद करना

खुद को भूल जाते हुए

अश्कों को भीतर ही भीतर पी जाना

मुस्कुराते हुए

बेपरवाह होकर जी जाना

तुम्हारी परवाह करते हुए !!!

 

4 ) बहुत ज्यादा

मैं बहुत ज्यादा रोना चाहती हूँ

फूट फूट कर रोना चाहती हूँ

चीख चीख कर, बुक्का फाड् फाड़ कर भी

ताकि बह जाये सारा दर्द

पिघल पिघल कर

क्यों रोना चाहती हूँ

पता है क्यों

क्यूंकि नहीं पसंद है मुझे

तुम्हारा दूसरी औरतों से

मुस्कुरा कर बात करना

उनसे हाथ मिलाना

या गले से लगाना !!!

 

सीमा असीम सक्सेना, बरेली

०९४५८६०६४६०

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