सोमवार, 17 अप्रैल 2017

व्यंग्य / यशवंत कोठारी / बधाई से आर आई पी तक / यशवंत कोठारी

 

इन दिनों सोशल मीडिया पर जिन शब्दों का सब से ज्यादा मिस यूज हो रहा है उन में इन शब्दों का रोल सबसे ज्यादा है. सुबह उठते ही फेसबुक , वाट्सएप या कोई अन्य साईट खोलो इन शब्दों की झंकार कानों में बिना पड़े नहीं रहती . हालात ऐसे हैं पाठकों, कि कहीं भी किसी का भी निधन हो जाये बस आर आई पी को चिपकाइए और आगे चल दीजिये. इस बात का कोई मतलब नहीं कि मरने वाला कौन था, दाग कब है, उसकी मौत केसे व् कब हुई , उसके घर परिवार की क्या स्थिति है , क्या उसे किसी मदद की जरूरत है? ये सब बाते गौण हैं. रिश्तेदार भी नमन शब्द से काम चला लेते हैं. बहुत हुआ तो जरूर आता मगर बाहर हूँ. बस आर आई पी...आर आई पी. कुछ मामले तो मैंने ऐसे भी देखे कि एक ने गलती से किसी अन्य पोस्ट पर आर आई पी लिख दिया, बाद वालों ने बिना समय गवाएं इस शब्द को फोलो कर दिया. मन में कुछ भी हो विश तुरंत कर दो, यानी विष वमन में देर न करो.

ऐसा ही एक और शब्द है बधाई.

[ads-post]

कोई मामला हो तुरंत बधाई हाज़िर, हर मौके की बधाई फेसबुक पर उपलब्ध है. जन्म दिन की बधाइयों का तो ये हाल है कि मेल बॉक्स भर जाता है, किसी को नहीं पता जिसे वे बधाई दे रहे हैं वो कौन है, क्या करता है, बस बधाई का बटन दबाओ काम खत्म .

फिर शादी की साल गिरह की बधाई, धर्म पत्नी व् गर्ल फ्रेंड बॉय फ्रेंड के जन्म दिन की बधाई . बधाई है कि खत्म ही नहीं होती .

कभी किसी खास अवसर पर बधाई ली और दी जाती थी उसका महत्व भी था, मगर अब मान न मान मैं तो बधाई दूंगा. ले बधाई और दे बधाई. और पाठकों, आगे हालत ये कि इस शब्द को ही लाईक करने वालों की लम्बी लाईन, यह लाईन इस उम्मीद से कि आप हमें भी जल्दी से जल्दी हमारी बधाई व् लाईक का चुकारा करेंगे. सोशल साइट्स पर ये उधारी ज्यादा दिन नहीं चलती, आप चूके तो आपको अनफ्रेंड किया जा सकता है, अत:जल्दी से जल्दी इस का चुकारा करते जायें. यदि ज्यादा समय निकल जाये और कोई आपको उधार के कर्जे नहीं चुकाए तो समझ जाइये, मामला गड़बड़ है. और यदि सामने वाला जी ऍफ़ बी ऍफ़ है तो तुरंत संभल जाइये.

शोक व्यक्त करना एक स्वस्थ भारतीय परम्परा है और बधाई देना भी जन्म सिद्ध अधिकार की तरह है . लेकिन अति सर्वत्र वर्जयेत .

इन साइटों पर फर्जी अफवाहें भी खूब चलती हैं. आपने किसी की पोस्ट पर नमन या आर आई पी लिख दिया और वो जिन्दा निकलता है तो बड़ी तकलीफ होती है , इसी प्रकार आप बधाई दे देते हैं कि आपको पुरस्कार मिला या सम्मान मिला ,मगर बाद में पूरा मामला अफवाह सिद्ध होता है तो बड़ी दुखद स्थिति का सामना करना पड़ता है .

मेरे साथ ऐसे हादसे हो चुके हैं. एक सज्जन को बधाई दी कि आप मंत्री बन रहे हैं, उन्होंने बंद गले का कोट बनवा लिया , मगर अंत समय में उनका नाम कट गया वे मुझ्से आज तक नाराज हैं. एक गंभीर बीमार को मैंने आर आई पी लिख दिया उनका परिवार आज तक मेरे से नाराज है वैसे वे कुछ समय और जी भी लिए तो क्या नौ के तेरह कर लिए ? लेकिन हमारी परम्परा ऐसी नहीं है .

दोस्तों बधाई में तो कंजूसी न करें, मगर आर आई पी का जरूर ध्यान रखें. पूरा लेख पढ़ने के बाद आप की इच्छा मुझे आर आई पी कहने की हो रही होगी , मगर मेरी ओर से लेख पढ़ने की बधाई .

०००००००००००००००००००००००

यशवंत कोठारी

८६,लक्ष्मी नगर ,ब्रह्मपुरी जयपुर-३०२००२

मो-९४१४४६१२०७

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------