दोहे रमेश के (ग्रीष्मकाल पर )

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कूलर रोया जल बिना, ए सी हुआ उदास !
इनको भी होने लगा,..गर्मी का अहसास !!

हुआ जरा सा क्या हमें, गर्मी का आभास! !
लगे बदलने शीघ्र हम,कूलर की खस घास !!

पूछो उस मजदूर से,...... जो भट्टी के पास !
ग्रीष्मकाल के किस तरह, कटते हैं दो मास.!!

पारा इतना चढ़ गया, झुलस गये हैं गाल !
गर्म हवा से हो गया,...जनजीवन बेहाल !!

पारा चढ़ने लग गया, गुजरा ज्यों ही फाग !
सूरज की किरणें स्वत:, लगी उगलने आग !!

लगी जहाँ क्या लू गरम, कानों में भरपूर !
घर में अंदर कर दिया,रहने को मजबूर !!

पानी ज्यादा पीजिए, हलका लें आहार !
अनायास होंगे नहीं, ...गर्मी से बीमार !!

लिक्विड ज्यादा लीजिए, खायें फ्रूट सलाद !
गर्मी में भगवान का ,..समझो इसे प्रसाद !!

हल्का फुल्का लीजिए, गर्मी में आहार !
जल्दी से होंगे नहीं, आप कभी बीमार !!

नीम्बू का सेवन करें, कैरी पिएं उबाल !
गर्मी में इस बात का, पूरा रखे ख़याल !!

पीजा बर्गर छोड़िए,..खायें नित्य सलाद !
पीते रहिये स्वच्छ जल, हर घंटे के बाद !!

गर्मी में इस बात का,… रहे हमेशा ख्याल !
निकलें जब भी धूप में, सिर पर रहे रुमाल !!

करें छाछ के साथ में,जीरा का उपयोग !
गर्मी के होंगे नहीं, उन्हें कदाचित रोग !!

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रमेश शर्मा ९८२०५२५९४०

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