लिमेरिक बनाम “तुक्तक” डा.सुरेन्द्र वर्मा

(१)
सेल्फी खींचकर फेसबुक पर डालिए
बेकार न बैठिए वाट्सऐप निकालिए
आउटडोर – इनडोर
खेल करते सभी बोर
ज्ञान अज्ञान के लिए इंटरनेट खंगालिए
(२)
पत्र-पत्रिकाएँ भूल गईं, भूल गईं उपन्यास
इंटरनेट पर इनदिनों व्यस्त हैं मिस व्यास
जोड़ती घटाती हैं
हिसाब लगाती हैं
कितनों ने ‘लाइक’ भेजी कितनों ने प्यास
(३)
कसम खाई है ठलुआ नहीं रहूँगा मैं
खाम-खयाली में निरर्थक नहीं बहूँगा मैं
स्मार्ट मोबाइल पर
किसी एक साईट प
सुन्दर नायिका की सेल्फी पर मरूंगा मैं.
(४)
लेके स्मार्ट फोन आए थे बुजुर्गवार
कम से कम रहे होंगे वे अस्सी पार
बेटे ने भिजवाया है
सीख लो, कहलाया है
“अब खुद चलें या इसे चलाएं यार!”
(५)
हिन्दी है विकलांग, बेचारी अबला है
अंगरेजी की संगत को बस तबला है
रिझाए कैसे बेचारी
रंग भेद की मारी
हिन्दी काली मेम अगरेजी धवला है
(६)
किस को रोऊं और किसको याद करूं
दूर बैठे मित्रों से कैसे बात करूं
जब से मोबाइल मिला
दिल रहता खिला खिला
घर बैठे-बैठे, सबके हालात सुनूँ
(७ )
शराब, कोकीन, भांग और गांजा
इन सब का अब बज गया है बाजा
चलन में अब
नई है लत
वाट्स-ऐप. टूइट, फेसबुक पर आजा

-डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८);
१,सर्कुलर रोड / १०, एच आई जी
इलाहाबाद -२११००१

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