गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’ की कविताएँ

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सूखा

प्रकृति है क्रोधित हुई, ईश्वर है नाराज।
सी-सी जब करना हमें, हॉफ रहे है आज।।1।।

धान बिना पानी गया, शीत बिना गोधूम।
बादल हैं बिन वाष्प के, आसमान में धूम।।2।।

हिमनद गलकर टूटते, हिमवर हिम से हीन।
कृषक हुआ कृशकाय अब, हैं समस्त अब दीन।।3।।

पानी बादल से नहीं, गिरा रहे भगवान।
धरती तापित हो गयी, शापित है इन्सान।।4।।

पशु पक्षी भी ढूंढ़ते, दौड़ भागकर नीड़।
अब तो सूखन सब लगे, पर्वत के भी चीड़।।5।।

कुहरा बाधक काम का, पर किसान प्रसन्न।
अब ऐसा मौसम दिखा, सभी हो गए सन्न।।6।।

आम्र मंजरी आ गई, देख दिसम्बर माह।
माह जनवरी गर्म अति, सब करते हैं आह।।7।।

क्या जाड़े की सुखद ऋतु, हो जाएगी नष्ट?
क्या वर्षा अरु ग्रीष्म से, जनता रहेगी त्रस्त?।।8।।

फ्रीज, मोबाइल, फैक्ट्री, त्यागे रेज और गैस।
देख तलैया सूखती, है उदास अब भैंस।।9।।

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मोबाइल


धन्य मोबाइल आपकी, करता मैं जयकार।
जितना बीवी से नहीं, उतना करता प्यार।।1।।

जब कोई घर से चले, बीवी को घर छोड़।
पर तुमको प्यारी बना, लेता रिश्ता जोड़।।2।।

तुम भी जीवन संगिनी, सुन्दर वदन विचित्र।
बात कराती मधुर मधु, खींच भी लेती चित्र।।3।।

तेरे अन्दर है लगा, बस छोटा सा चीप।
तुम हो मोती से भरा, जैसे सुन्दर सीप।।4।।

तेरे प्रेमी हैं बने, बालक, वृद्ध, जवान।
नारी- नर के हृदय में, लेती हैं मुस्कान।।5।।

अगर कहीं तुम भूलवश, छोड़ी क्षण भर साथ।
लगता सब कुछ खो गया, मानव बना अनाथ।।6।।

तेरे भीतर है भरा, नवयुग का सब सार।
खोल के देखा जब तुझे, पाया सब संसार।।7।।

तुम हो जिसके पास में, उसकी बढ़ती शान।
तुमको रखकर साथ में, मानव बना महान।।8।।

तेरे अन्दर आ गए, भांति-भांति के रुप।
रोज-रोज घुसने लगे, तकनीकों के खेप।।9।।


गाँव
शहरों में अच्छा लगा, प्रियवर अपना गाँव।
जहाँ की शीतल वायु जल, औ अमरइया छॉव।। 1।।

बरगद, पीपल, बांस की, पत्ते गिरे अनंत।
दृश्य नयन अभिराम है, नहीं है सुख का अंत।। 2।।

जन-जन श्रम में ही दिखे, सभी कर्म अनुरक्त।
कूप-सरित-तरु-वृद्ध-गुरु, के सब होते भक्त।। 3।।

महुआ टप-टप टपक कर, मँहके बहुत बेजोड़।
गन्ना वह अच्छा लगे, जिसका लम्बा पोड़ ।।4।।

गाँव-गाँव हैं देवता, देवी हुई अनेक।
सबके मन में प्रेम बहु, काम करें सब नेक।। 5।।


              भिखमंगे

भिखमंगों के घर मिले, भरे नोट से बैग।
उनका आडिट है कठिन, परेशान है कैग।।1।।

घर घर जाकर कह रहे, जय लक्ष्मी भगवान।
चावल पैसा लाइए, या कोई सामान।।2।।

रंग बिरंगे वस्त्र में, सुबह शाम दिख जाय।
तब तक चिल्लाते सखा, जब तक ना कुछ पाय।।3।।

नहीं आयकर का पड़ा, छापा या कुछ दण्ड।
इसीलिए समृद्ध है, घूमें बने प्रचण्ड।।4।।

पत्नी मांगें और घर, पति मांगे घर और।
बिटिया गढ़े कहानियॉ, करिए थोड़ा गौर।।5।।

बच्चा भी स्कूल तज, जाता घर-घर द्वार।
खूब कमाई हो रही, है उनको धिक्कार।।6।।

देने वाले भीख दें, नीचा करते देश।
इसीलिए मंगते सदा, घर-घर किए प्रवेश।।7।।

मत मांगो तुम और से, मत फैलाओ हाथ।
कर्म करो मेहनत करो, फल आएगा साथ।।8।।

भीख मांगना देखिए, काम बड़ा है नीच।
मांगा तुमने भीख जो, समझो पड़ गया कीच।।9।।



धनवान-गरीब

जिनके घर भाँति-भाँति, रुपयन की पेड़-पाँति।
    इच्छानुसार सभी, दूध दही खात है।
सुन्दर सुकान्त गात, हर्षित है रात-प्रात।
    जिनके हैं कीर्ति अभी दूर तक सुनात है।।
जिनका विरोध नहि होता अवरोध कही,
    पूजित है पाद तभी, व्यक्ति जहाँ जात है।
दुनियाँ की श्रेष्ठ छवि, कहते है नन्द कवि,
    उसको धनवान सभी, जनहीं बतात है।।1।।
जिनके घर भात नहि, रोटी लखात नहि,
    दूध-दही-दाल-घृत सपनहिं देखात है।
टूटी चटइया पर टपके मड़इया नित,
    वर्षा बेदरदी से बालक उठि जात है।
गर्मी तो बीत गई, कपड़ा से हीन गति,
    जाड़ा के खातिर तो गुदरी सिलात है।
नयी सी बहुरिया भी दिखती पटहीन जहँ,
    तरसे बहुभाँति-भाँति निर्धन कहात है।।2।।


            चूना (व्यंग्य)

जिसको जैसे जब मिला, चूना दिया लगाय।
चूना दिव्य महान है  कालिख दिया हटाय।।1।।

पान नहीं लाली दिया, मिला नहीं जब चून।
कत्था के संग जब मिला, रंग होठों की दून।।2।।

चूना जब ज्यादे हुआ, तब देता है काट।
चतुर चितेरे चोर चित, करते बंदर बाट।।3।।

सरकारी धन के लिए, ढूंढ़े सबही लोग।
चूना कैसे कब लगे, कौन करे हम योग।।4।।

मंत्री जी का आगमन, चूना का उपयोग।
सड़क चुनिंदा चुन गयी, चूना का संयोग।।5।।

जिन्हें लगाना आ गया, चूना मेरे राम।
उन्हें नहीं कुछ चाहिए, और नौकरी काम।।6।।

ऊपर जब चूना लगे, आँख हो गयी बन्द।
नीचे जब चूना लगे, छटपटाय तब ‘नन्द‘।।7।।

चुने हुए जन का सदा, चूने पर अधिकार।
जिन्हें न अवसर है मिला, उन्हें देश पर प्यार।।8।।

चूना में सद्गुण बहुत, होता रंग सफेद।
जो चरित्र उज्ज्वल रखे, उनके नहि मन खेद।।9।।

 


  देश की गति

देश हमारा पूज्य है, हम इसके सन्तान।
सबमें प्रेम अनन्त है, सब प्यारे इन्सान।।1।।

हिन्दू-मुस्लिम में सदा, रहा सखा का भाव।
सिख-इसाई मिल यहाँ, खींच रहे है नाँव।।2।।

एक दूसरे के हृदय, में दूजे का मान।
जिसे सारे विश्व में, भारत का सम्मान।।3।।

सुख दुःख में सब साथ हैं, सबमें भारी प्रीति।
नजर लगाए शत्रु हैं, करते कुटिल अनीति।।4।।

राजनीति विष तुल्य हो, भर देता है भेद।
नाव परस्पर प्रेम की, डूबे होकर छेद।।5।।

धर्म जाति का फैलता, जब-जब है पाखण्ड।
देश सदा निर्बल हुआ, सपना बना अखण्ड।।6।।

फूट डालकर राज कर, थी अंग्रेजी चाल।
आज हमारे देश में, बना यही है हाल।।7।।

ठग खाते हैं चैन से, जनता हुयी बेहाल।
साधु-साधु भी ना रहे, ऐसी दुर्गति हाल।।8।।

संत असंतहि कर्मकर, पीर दिए हैं पीर।
धरती पर सूखा विशद, बाढ़ बना गम्भीर।।9।।


कौन गधा (व्यंग्य)

गधे जगत में है सुखी, हैं चिन्ता से दूर।
हैं प्रशान्त चिन्तन विमुख, खुशियों से भरपूर।।1।।

बोझ अधिक जो ढ़ो रहा, कहे गधा निज आप।
समझ न पाए जो कभी, वही गधों का बाप।।2।।

दुःख-सुख सर्दी-गर्म में, रहे सदा एक हाल।
ना विवेक जिनको जगे, वह है गधा भुआल।।3।।

मौसम हो वैशाख का, और पाए आनन्द।
बिन खाए तृण हरित वह, पावे परमानन्द।।4।।

जग में गर्दभराज की, स्वर भी बड़ी विचित्र।
सीधे सादे रुप में, है पुस्तक में चित्र।।5।।

मुंगरे खाकर भी हँसे, रखे सदा गति एक।
पग पति सम भी बँध गया, रहा जगत चुप देख।।6।।

सहनशक्ति का पुंज है, अपना गर्दभ वीर।
शान्त, सहिष्णु, सरस हिय, सब हैं बने प्रवीण।।9।।


    प्रातः काल

नील गगन पूरब दिशि, लाली का आभास।
खग कुल कलरव कर रहे, ज्यों ही दिखा उजास।।1।।

संत भजन कीर्तन किए, मस्जिद किए अजान।
ऊर्जा नव-तन-मन मिली, अरुणशिखा धुनि कान।।2।।

है प्राची में खिल रहा, जस गुलाब हो लाल।
हर्षित होकर बढ़ रहा, देखो सूरज बाल।।3।।

पूजन-कीर्तन-सबद सब, मन्दिर घण्टा नाद।
जन-जन श्रम अनुरक्त है, सबके मन आह्लाद।।4।।

निशा काल में जो प्रसृत, थी खेतों में ओस।
लुप्त हुआ बादल बना, हर्षित पास-पड़ोस।।5।।

धरती माँ की खिल गयी, रंग रंगीली गात।
रुप अधिक अधि आ गया, आतप पड़ा प्रभात।।6।।

विहँस प्रकृति दिख रही, कैसी परम अनूप।
शीत न्यून होने लगा, पाकर के शुभ धूप।।7।।

ऊषा सेज सजा गयी, स्वर्णित लेकर थाल।
प्रमुदित जन-जन हो गया, देख गगन रवि बाल।।8।।

सदा समय से आगमन, सदा समय प्रस्थान।
नित्य, सतत, निज कर्म कर, कहत सूर्य भगवान।।9।।

बेटी

लोग नहीं चाहे कभी, मम घर बिटिया होय।
जो बिटिया को पालते, सदा देव सम सोय।।1।।

जिस घर बिटिया है नहीं, वह घर है सुनसान।
बिटिया का जो जन्म दें, देवी देव समान।।2।।

भारत में भगिनी भई, दुर्लभ, संख्याहीन।
पुत्र अनेकों है भले, पर मानव है दीन।।3।।

जीवन सूना बहुत है, घर है नर्क समान।।
दान सभी बेकार हैं, किए न कन्यादान।।4।।

बेटी घर में तब मिले, जब अनुकम्पा होत।
एक नहीं दो घर बढ़े, बढ़े और भी गोत।।5।।

लड़का धन बल के लिए, घर में करे कलेश।
लड़की अब आगे बढ़ी, किया गर्व मम देश।।6।।

पढ़ना, लिखना, नौकरी, देती लेती ज्ञान।
धन्य देश की शुभ सुता, तुम हो दिव्य महान।।7।।

बेटी-बेटे में नहीं, दिखा है अब तो फर्क।
बेटी जब है रुठती, घर हो जाता नर्क।।8।।

बेटी-लक्ष्मी-सरस्वती, ममतामयी महान।
माँ-पत्नी, बहु रुप में, करे सदा कल्याण।।9।।
चाटुकार

चाटुकार जी, जी करे, जी-जी ही हर बात।
जी-जी ज्यादे जो करे, समझें है कुछ घात।।

करे बड़ाई जो सदा, बातें मधु-नवनीत।
पर सचेत हो राखिए, प्रियवर उनसे प्रीत।।

नहीं सखा हैं आपके, मतलब ही तक बात।
दुःख में भागेंगे प्रथम, चाहे दिन या रात।।

जब तक देंगे आप कुछ, तब तक उनकी प्रीत।
लेने तक वह साथ हैं, यह है जग की रीति।।

यशोगान निज शब्द से, करता हैं गुणगान।
मन में कुछ बाहर अलग, उसकी यह पहचान।।

मित्र

ले जाए सन्मार्ग पर, रखे हाथ में हाथ।
विपदा से भी ना डरे, देता हरदम साथ।।1।।

दुनिया देखो स्वारथी, अनुपम बहुत विचित्र।
पर ईश्वर की कृपा से, सच्चा मिलता मित्र।।2।।

अपनी सुख की लालसा, की न करता बात।
जीवन निर्मल जो करे, कभी न करता घात।।3।।

दीन सुदामा के लिए, दे दी सब सम्पत्ति।
मित्र दुःखी मम न रहे, छूटे सभी विपत्ति।।4।।

प्रभु राम के भी बने, रहे विभीषण मित्र।
लंकापति मारा गया, राज्य तित्र औ वित्र।।5।।

गलत राह जाने लगा, लिया किसी को और।
शत्रु वही है आपका, इस पर करिए गौर।।6।।

नहीं कपट मन में रखे, रखे सदाशय प्रीति।
साथी बनकर आपसे, करता नहीं अनीति।।7।।

मित्र बिना जीवन नरक, दुनिया है बेकार।
कहना मानो मित्र का, तब जीवन साकार।।8।।

रिश्तों में तो मित्र का, बहुत बड़ा है मान।
मित्रहीन जन दीन अति, खो जाता सम्मान।।9।।


गुरु

बिना गुरु के जिन्दगी, बिल्कुल है बेकार।
अपने गुरु को मानिए, ईश्वर का उपहार।।1।।

बिना गुरु के बन्द हैं, प्रियवर सबके भाग्य।
अगर गुरु है मिल गया, समझो तुम सौभाग्य।।2।।

अगर कृपा गुरु की हुई, मिट जाता अज्ञान।
मिल जाते सन्मार्ग है, गुरु की कृपा महान।।3।।

अर्जुन जेता बन गया, ले गुरूवर से ज्ञान।
और कर्ण जाना गया, अद्भुत दिव्य महान।।4।।

राम-कृष्ण भगवान हित, लिए गुरु से ज्ञान।
सेवा हित आतुर रहे, पाए जग सम्मान।।5।।

गंगा

गंगा पावन दिव्य है, जल अमृत सम जान।
तारणहारी ही सदा, अद्भुत दिव्य महान।।1।।

गंगा सबको कर रही, आदि काल से शुद्ध।
पर मानव ही कर रहा, उनको आज अशुद्ध।।2।।

गंगा बिन बेकार है, सबहीं पूजा पाठ।
प्रथमहिं आकर तार दी, थी सहस्त्र वह साठ।।3।।

गंगा की हर दम रही, है मानव पर प्यार।
कीट नहीं जल में पड़े, रखिए वर्ष हजार।।4।।

गंगा दारुण दुःख हरे, और हरें त्रयताप।
माँ से भी बढ़कर रही, सदा पूजिए आप।।5।।

गंगा जल स्नान से, मिटते सारे पाप।
दरशन परसन से सखा, सब हो जाता माफ।।6।।

झूठ
झूठ कभी बोलो नहीं, मन को लगता पाप।
झूठ बोलकर जिन्दगी, हो जाती अभिशाप।।1।।

अनृत वचन न कीजिए, हो लेंगे सब दूर।
मित्र सभी दुश्मन बने, खुशियाँ होंगी दूर।।2।।

सत्य बोलता जो सदा, पाता वह सम्मान।
पकड़ गया जब झूठ तो, मिलता है अपमान।।3।।

जग में जीना है सरल, जब हो सत्य विमर्श।
पग-पग पर इज्ज्त मिले, और चतुर्दिक हर्ष।।4।।

सत्य वचन शुभ मन्त्र है, मिलता बहु उपहार।
सत्य वचन वक्ता जनों, से देवों का प्यार।।5।।

ऐसी बसुधा आज बनाए

चलो दूर इस निरा जगत से, जहाँ न कोई छल प्रपंच हो।
एक दूसरे के हित कामी, जन-जन का जो शुभ्र मंच हो।
जहाँ न कोई जाति-पॉति का, ऊँच-नीच का भी लफड़ा हो।
जहाँ न कोई रुढि़ का बन्धन, धर्म को लेकर के झगड़ा हो।
नवयुग के निर्माण के खातिर, आओ तुम भी हाथ मिला लो।
गीत जहाँ पर संयोगी हो, ऐसा ही सब साज सजाएं।

ऐसी बसुधा आज बनाए ..................
स्वयं जीत की बात न होवे, औरों को हम जीत दिलाए।
दुःखी-आर्त-दलितों के मन को, निज कर्मां से जीत के लाएं।
जहाँ न कोई खून का प्यासा, गंगा की अविरल धारा हो।
नहीं क्षेत्र हो एक हमारा, धरती और गगन सारा हो।
मानव मन मालिन्य न कोई, नारी-नर सम्मान बने बहु
रामराज्य की पूर्ण कल्पना, से सज्जित यह राज बनाएं।
ऐसी बसुधा आज बनाए ..................

जीवन

अगर छाँव है जिन्दगी, जीवन भी है धूप।
और विरोधाभास है, कितने रुप-कुरुप।।1।।

जीवन सुख का सार है, दुःख भी इसका मूल।
त्याग, क्षमा, सम्मान को, मत जाना तुम भूल।।2।।

यहाँ कभी जो उन्नति, कभी अवनति होय।
परिवर्तन अनिवार्य है, यह जानत सब कोय।।3।।

जीवन गर संयोग है, तो वियोग भी मित्र।
हास, करुण, उत्साह के, दिखे अनेकों चित्र।।4।।

जीवन में कर्तव्य का, रखिए हरदम ध्यान।
स्वार्थ कभी मत पालिए, तब होगा सम्मान।।5।।

अपनों पर निज देखिए, करिए पूरा फर्ज।
अगर चूक कुछ भी हुई, रह जाएगा कर्ज।।6।।

रिश्ते नाते हैं बहुत, और अपना है देश।
कुटिल कर्म करना नहीं, नहीं तो लगता ठेस।।7।।

हँसकर मिलते लोग हैं, विछुरत दे संताप।
कहत-सुनत में भिन्नता, यह जग का परिमाप।।8।।

लाभ-हानि की बात को, करना है बेकार।
सबके संग समदर्शिता, यह जीवन का सार।।9।।

आज

कल को भूले आज हम, तब संवरेगा आज।
कल स्वर्णिम हो जाएगा, सब सुधरेगा साज।।
प्रतिपल हम करते रहें, निज मन से सत्कर्म।
आगामी पल भूलकर, करें सदा हम कर्म।
जिसने आज बना लिया, कल उसका बलवान।
सब सचेष्ट हो कर्मरत, बालक वृद्ध जवान।।
जिनका बिगड़ा आज है, बिगड़े उनके काज।
अन्त समय पछतात हैं, फिर आती है लाज।।

जीवन का यह सत्य है, करना होगा कर्म।
आशी बन मत बैठिए, नहीं निराशा धर्म।।
कल-कल कल क्यों कर रहें, कल रहता है दूर।
आज अभी तो साथ है, उठा लाभ ।।
जिसने आज गंवा दिया, पाता है संताप।
भाग्य बिगाड़ा खुद वहीं, यह जीवन का माप।।
भावी भूत भुलाइए, धरिए ध्यान अतीत।
समय जो बीता ना मिले, यह करिए परतीत।।
जो कल भूला, आज रत, किया समय का ध्यान।
सफल वही होता मनुज, होता है सम्मान।।

मत हारो

झेलता हूं जिन्दगी के सब झमेले,
बस अकेले, बस अकेले बस अकेले।
देखने को हैं बहुत से दोस्त लेकिन,
सोचते है वे कि मुझसे सुख न ले ले।
झेलता हूं जिन्दगी के सब झमेले।
बस अकेले, बस अकेले बस अकेले।।1।।
जिन्दगी जो सतत् चलती जा रही है,
दिख रहें है स्वार्थ के बहुभॉति मेले।
सिमटता संसार कैसा लग रहा है?
सोचता हूं आज ढाढ़स और दे ले।
झेलता हूं जिन्दगी के सब झमेले।
बस अकेले, बस अकेले बस अकेले।।2।।
साहसी लोगों का साहस कब मरा है,
हर जगह मिलते हैं उनके आज रेलें।
”नंद“ का जीवन नहीं है ठेलने के हित बना,
चाहे कोई जब कहीं पर आज ठेले।
झेलता हूं जिन्दगी के सब झमेले।
बस अकेले, बस अकेले बस अकेले।।3।।
व्यथा

कितनी व्यथायें भरी पडीं है, ईश्वर इस संसार में।
आशाओं की अक्षय कडि़यां, छोटी बड़ी आकार में।
कलियों का खिल सुमन का बनना, हो बसन्त के आने पर,
पर सर्वस्व लुटा जाता है, वह बसन्त के जाने पर,
खिलना, मिटना और सिमटना, है पतझड़ और बहार में।।
कितनी व्यथायें भरी पडीं है, ईश्वर इस संसार में।
आशाओं की अक्षय कडि़यां, छोटी बड़ी आकार में।।1।।

कहीं न सुख का सावन बीते, अन्तस्तल मुरझाने पाये,
कभी न दुःख की बदली छाये, पल-पल मुझे सताने पाये,
सुख का बेहद भाव बढ़ेगा, सुख दुःख के बाजार में।।
कितनी व्यथायें भरी पडीं है, ईश्वर इस संसार में।
आषाओं की अक्षय कडि़यां, छोटी बड़ी आकार में।।2।।

शिक्षा

शिक्षा की महिमा बड़ी, यह अनुपम उपहार।
जो जन शिक्षित है वहीं, करते ज्ञान प्रसार।।

शिक्षा व्यापक विशद हैं, नहीं है इसका अन्त।
क्षेत्र अनेकों हैं दिखें, दिखते रुप अनन्त।।

बिन शिक्षा के व्यक्ति का, नहीं है कोई मान।
अच्छी शिक्षा जब मिले, मिट जाता अभिमान।।

पशु कहलाता है वहीं, जो शिक्षा से दूर।
जो शिक्षा को पा गया, मिले खुशी भरपूर।।

बिन शिक्षा के व्यक्ति हैं, दुनिया से अनजान।
दुनिया की गति जानकर, शिक्षित हुआ सुजान।।


डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’
रा.उ.मा.वि. बिरिया मझोला
(खटीमा), ऊधम सिंह नगर, 262308
दूरभाष- 09410161626/7068188951
 

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जीवन परिचय

1. नाम:-        महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘‘नन्द’’
        (शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार-2013 प्राप्त
          माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, महानिदेशक तथा निदेशक
          के हाथों 5 सितम्बर 2015 को देहरादून में प्राप्त)
2. जन्म तिथि:-    05-मई-1965   
3. शिक्षा:-         एम0ए0 (हिन्दी), एम0एड0
4. लेखन की विधाएँ:- कविता, नाटक, कहानी, वार्ता, उपन्यास, समीक्षा
4. प्रकाशित कृतियों का विवरण तथा प्रकाशन वर्ष:-
    ‘‘अमृता’’ काव्य संग्रह प्रकाशन वर्ष 2007
विमोचन:- पद्मश्री डा0 श्याम सिंह ‘शशि’ (पूर्व निदेशक, प्रकाशन विभाग भारत सरकार), पद्म श्री ललित पाण्डेय (उत्तराखण्ड सेवानिधि), डा0 हरि सिंह पाल (आकाशवाणी दिल्ली), डा0 चक्रधर नलिन (रायबरेली), डा0 ऊषा यादव (आगरा), डा0 हीरालाल बाछोतिया ( दिल्ली), डा0 एन0एन0 खान (प्राचार्य के0 ई0 सी0 द्वाराहाट), क्षेत्रीय विधायक श्री पुष्पेश त्रिपाठी के कर कमलो द्वारा बाल प्रहरी साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह 2007 में।
    ‘‘बुड़मशाण चालीसा’’ प्रकाशन वर्ष 2007
  विमोचन:- प्रधानाचार्य रा0 इ0 का0 द्वाराहाट तथा मंदिर निर्माण समिति के पदाधिकारी गण 
          द्वाराहाट द्वारा रा0 इ0 का0 द्वाराहाट अल्मोड़ा में।
    बाल कविता संग्रह:- हाल सुहाने बचपन के, प्रकाशन वर्ष- 2013
    स्वाधीनता संग्राम में कुमायूँ मण्डल की नारियों का योगदान (काव्य में) (अप्रकाशित)
    पर्यावरण चालीसा:- इण्टरनेट पर
    एड्स चालीसा:- इण्टरनेट पर
    स्वतन्त्रता सेनानी प. राम सुमेर शुक्ल का काव्यबद्ध जीवन परिचय
विमोचन- राज्यसभा सांसद तरुण विजय, लोकसभा सांसद मनोज तिवारी एवं किच्छा (ऊधम सिंह नगर) विधायक राजेश शुक्ला द्वारा
    कहानी संग्रह (अनाम) 7 कहानियाँ आकाशवाणी गोरखपुर से प्रसारित
    उपन्यास:-    1. उपेक्षिता 2. अपहृता प्रणय (प्रकाशनाधीन)
    नाटक:-1. प्यार और फाँसी 2. दानवीर मयंक 3. एक टुकड़ी रोटी 4. माई के प्यार 
5. धर्म का पलड़ा (सभी मंचित)
    डाक्यूमेन्ट्री फिल्म का निर्माण:- ‘‘मौसम वेधशाला और द्वाराहाट का मौसम’’
1.    5 जून 2010 को गोविन्द बल्लभ पन्त पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के निदेशक डॉ एल. एम. एस. पालनी, डॉ. आर. एस. रावल वैज्ञानिक, मेजर बी. सी. सती और खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वाराहाट श्री एस. एल. आर्या के द्वारा।
2.    ‘‘कजरा’’ इण्टरनेशनल फिल्म्स समिति गोण्डा के प्रोड्यूसर श्री राजेश निगम और फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली के हाथों साहित्य एवं सांस्कृतिक अकादमी वहराइच में।
3.    यूट्यूबडॉट कॉम पर uprobedwt नाम से फिल्म उपलब्ध।

5. प्राप्त सम्मान/पुरस्कार आदि का विवरण:-
ऽ    मधुपर्क सम्मान पत्र 2003:- अखिल भारतीय समाचार पत्र लेखक परिषद् देवनगर कानपुर द्वारा वर्ष 2003 में श्री विजय प्रकाश त्रिपाठी (राष्ट्रीय अध्यक्ष) तथा डा0 सम्पूर्णानन्द पाण्डेय (महामन्त्री)।
ऽ    काव्य श्री 2007:- डा0 राजेन्द्र डोभाल (निदेशक विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी परिषद् देहरादून), डा0 बानो सरताज (महाराष्ट्र) तथा सम्पादक बालप्रहरी उदय किरौला।
ऽ    काव्य गौरव 2007:- डा0 फारूख कप्तानगंजवी प्रमुख निदेशक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मानोपाधि संस्थान, कप्तानगंज कुशीनगर (उ0 प्र0) द्वारा वर्ष 2007 में।
ऽ    युवा प्रतिभा सम्मान 2007:- 15वाँ अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य समारोह गाजियाबाद द्वारा वर्ष 2007 में श्री मुकेश्वर चुन्नी (भारत में माँरीशस के उच्चायुक्त), श्री त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी (पूर्व राज्यपाल केरल व कर्नाटक) तथा डा0 रत्नाकर पाण्डेय (राज्यसभा सांसद एवं मुख्य संरक्षक)।
ऽ    आदर्श शिक्षक सम्मान (मौसम) 2007:- पं0 गोविन्द वल्लभ पन्त पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल, अल्मोड़ा द्वारा आयोजित रा0 इ0 का0 हवालबाग, अल्मोड़ा में डॉ0 उपेन्द्र धर (निदेशक), श्री अम्बाराम आर्य (जिला शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा) तथा खण्ड शिक्षा अधिकारी हबालबाग, अल्मोड़ा के द्वारा (यू0 प्रोब) आदर्श शिक्षक सम्मान का प्रथम पुरस्कार वर्ष 2007।
ऽ    भारत भूषण सम्मान 2008:- समग्रता शिक्षा साहित्य एवं कला परिषद् सावरकर वार्ड शक्तिनगर कटनी (मध्य प्रदेश) के अध्यक्ष ओम रायजादा द्वारा श्री जैनेन्द्र कुमार की जयन्ती पर प्रदत्त।
ऽ    साहित्य श्री 2008:- पुष्पगंधा प्रकाशन कवर्धा छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2008 में श्री सन्तोष गुप्ता (अध्यक्ष नगर पालिका निगम कवर्धा), डा0 सुनील गुप्ता ‘तनहा’ (साहित्यकार/प्रकाशक राजमहल चैक कवर्धा), श्री सुहास गोविन्द पोल (हाईकोर्ट अधिवक्ता/साहित्यकार बेमेतरा, दुर्ग छत्तीसगढ़)।
ऽ    भारत गौरव 2008:- ऋचा प्रकाशन कटनी मध्य प्रदेश द्वारा वर्ष 2008 में श्री आशा रायजादा (अध्यक्ष) तथा श्री ओम रायजादा (निदेशक)।
ऽ    काव्य कल्पज्ञ 2008:- अखिल भारतीय साहित्य संगम आयड़ उदयपुर द्वारा वर्ष 2008 में श्री ओम पारदर्शी संस्थापक/संरक्षक।
ऽ    भाषाई समाचार पत्र सम्मान 2008:- श्री भगत सिंह कोश्यारी (पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराख्ण्ड), श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखण्ड) के मुख्य आतिथ्य में श्री प्रकाश पन्त (मंत्री उत्तराखण्ड), श्री ओंकार भावे (समारोह अध्यक्ष) तथा श्री राजेन्द्र तिवारी (संयोजक इनसाइट एक्सप्रेस) देहरादून एवं सुरभि लोक संस्था द्वारा।
ऽ    युवा प्रतिभा सम्मान 2008:- हम सब साथ साथ, दिल्ली द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बाल, युवा एवं प्रतिभा प्रदर्शन व सम्मान समारोह 2008 में मुख्य अतिथि डा0 श्याम सिंह ‘शशि’, डा0 सरोजनी प्रीतम (टी0वी0 सीरियल निर्मात्री), श्री उमाशंकर मिश्र (सम्पादक), श्री विनोद बब्बर (सम्पादक राष्ट्र किंकर), श्री प्रवीण आर्य (प्रोड्यूसर साधना टी0 वी0 चैनल), श्री किशोर श्रीवास्तव के हाथों प्राप्त।
ऽ    सृजन श्री 2008:- अनासक्ति आश्रम कौसानी, बागेश्वर उत्तराखण्ड में बाल प्रहरी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह 2008 में डा0 राष्ट्रबन्धु (संपादक, बाल साहित्य समीक्षा), डा0 लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ (निदेशक, महादेवी वर्मा सृजनपीठ, नैनीताल), डा0 कुवंर बेचैैन, डा0 प्रतीक मिश्र, श्री उदय किरौला (सम्पादक)।
ऽ    बालवाटिका अभिनन्दन पत्र 2008:- बालवाटिका द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बालसाहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह 2008 भीलवाड़ा राजस्थान में प्रो0 के एम0 नुवाल (मुख्य संरक्षक) तथा डा0 भैरूँलाल गर्ग (समारोह संयोजक तथा सम्पादक)।
ऽ    भारतीय गौरव रत्न 2008:- शबनम साहित्य परिषद सोजत सिटी राजस्थान के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डा0 अब्दुल समद राही द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2008 में प्रदत्त।
ऽ    महानुभाव ग्रंथोत्तेजक पुरस्कार 2008:-अमृता काव्य संग्रह पर महानुभाव विश्वभारती अमरावती महाराष्ट्र द्वारा।
ऽ    उत्तराखण्ड रत्न सम्मान 2008:- जैमिनी अकादमी पानीपत द्वारा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जन्म शताब्दी स्मृति अ0 भा0 सम्मान एवं विमोचन समारोह 2008 द्वारा।
ऽ    हास्य श्री सम्मान 2009:- राष्ट्र किंकर समाचार पत्र दिल्ली द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि प्रतियोगिता 2008 में पद्म विभूषण सोनल मान सिंह तथा संपादक श्री विनोद बब्बर द्वारा प्राप्त।
ऽ    विश्व साहित्यकार संदर्शिका नामांकन 2009:- डा0 ओम प्रकाश बरसैया (झांसी) द्वारा प्रकाशित हिन्दी साहित्य के जगमगाते रत्न के तृतीय खण्ड में नामांकन।
ऽ    बाल प्रहरी साहित्य सृजन सम्मान 2009:- पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल (उत्तराखण्ड) , डॉ0 विनोद चन्द्र पाण्डेय ‘विनोद’ (लखनऊ) डॉ0 राष्ट्रबन्धु (कानपुर), डॉ0 हरि सुमन बिष्ट (दिल्ली), बाल प्रहरी सम्पादक उदय किरौला के हाथों भीमताल (नैनीताल) में।
ऽ    हिन्दी साहित्य सम्मान 2009:- डॉ0 रवि कान्त खरे (बाबा जी), डॉ0 विनोद चन्द्र पाण्डेय ‘विनोद’ रामचन्द्र शुक्ल एवं डॉ चक्रधर नलिन के हाथों स्वामी रामतीर्थ प्रतिष्ठान अलीगंज लखनऊ में अखिल भारतीय वैचारिक क्रान्ति मंच निराला नगर लखनऊ द्वारा। 
ऽ    उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान (मौसम बेधशाला) 2009:- डॉ0 एल0 एम0 एस0 पालनी निदेशक, एवं यू0 प्रोब अन्वेषक डॉ. आर0 एस0 रावल (गोविन्द बल्लभ पन्त पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा) द्वारा आयोजित राजकीय इण्टर कॉलेज धौलछीना, अल्मोड़ा में।
ऽ    साहित्य वाचस्पति 2009:- साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगत अकादती परियावां प्रतापगढ़ उ0प्र0 के अध्यक्ष शिव नारायण मिश्र एवं सचिव वृन्दावन त्रिपाठी रत्नेश द्वारा पूर्व जज रामचन्द्र शुक्ल और सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव के हाथों प्राप्त।
ऽ    सुश्री सरस्वती सिंह स्मृति सम्मान 2009:- साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगत अकादमी परियावां प्रतापगढ़ उ0प्र0 के अध्यक्ष शिव नारायण मिश्र एवं सचिव वृन्दावन त्रिपाठी रत्नेश द्वारा पूर्व जज रामचन्द्र शुक्ल और सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव के हाथों प्राप्त।
ऽ    काव्य कलश सम्मान 2009:- हिन्दी भाषा सम्मेलन पटियाला (पंजाब) द्वारा हर्ष कुमार हर्ष, के हाथो भाषा भवन में 24 मई 2009 को प्राप्त।
ऽ    संस्कृत सम्मान 2009:- संस्कृत विद्यापीठ परिषर में गीता जंयति पर श्री श्री 108 रामगिरी जी महाराज एवं उपजिलाधिकारी रानीखेत, अल्मोड़ा द्वारा।
ऽ    कुमाऊॅनी लोक साहित्य सम्मान पत्र 2009:- पप्साग्राम्स संस्थापक विशनदत्त जोशी ‘‘शैलज’’ एवं श्री श्री 108 रामगिरी जी महाराज एवं उपजिलाधिकारी रानीखेत, अल्मोड़ा द्वारा।
ऽ    विद्यावाचस्पति 2009:- (पी. एच. डी. के समकक्ष) विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर (बिहार) के कुलाधिपति डॉ लारी आजाद कुलपति डॉ तेजनारायण कुशवाहा एवं कुलसचिव डॉ देवेन्द्र नाथ साह के द्वारा।
ऽ    साधना टी.वी. पर काव्य पाठ 2010:-दिल्ली में साधना टी. वी. चैनल पर सतमोला कवियों की चैपाल के लिए 9-01-2010 को काव्य पाठ।
ऽ    हिन्दी गरिमा सम्मान 2010:- हिन्दी भाषा सम्मेलन पटियाला (पंजाब) द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाबी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जसपाल सिंह, सचिव पंजाब सरकार श्रीमती ऊषा आर. शर्मा, कमिश्नर श्री गुरेन्दर सिंह गरेवाल तथा डा. राजा आनन्द सिंह सुमन के हाथो।
ऽ    पं0 बृज बहादुर पाण्डेय स्मृति सम्मान 2010:- शिक्षा साहित्य कला विकास समिति बहराइच (उ0प्र0) में फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली, आकाशवाणी लखनऊ के कार्यक्रम अधिकारी अनामिका सिंह, आर्युवेदिक चिकित्सा मंत्री उ0 प्र0 सरकार तथा प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अशोक पाण्डेय ‘गुलशन’ से प्रदत्त।
ऽ    राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान 2010:- पंचवटी लोक सेवा समिति, उत्तमनगर दिल्ली में डॉ. भगवती शरण मिश्र (आई. ए. एस.), अध्यक्ष भोजपुरी अकादमी डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव, समिति संरक्षक अम्बरीश कुमार तथा राष्ट्र किंकर समाचार पत्र सम्पादक विनोद बब्बर के हाथों से प्रदत्त।
ऽ    साहित्य सागर सम्मान 2010:- ऋचा रचनाकार परिषद् कटनी मध्य प्रदेश के अध्यक्ष आशा रायजादा के हाथों श्री धर्मवीर भारती के जयन्ती पर प्रदत्त।
ऽ    काव्य केसरी सम्मान 2010:- अखिल भारतीय साहित्य संगम आयड़ उदयपुर राजस्थान से प्राप्त।
ऽ    राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2010:- 18वॉ अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन, हिन्दी भवन गाजियाबाद में तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल भीष्मनारायण सिंह, जीवीजी कृष्णमूर्ति पूर्व चुनाव आयुक्त भारत सरकार एवं राज्यसभा सांसद रत्नाकर पाण्डेय तथा यू. एस. एम. पत्रिका सम्पादक उमाशंकर मिश्र के हाथों।
ऽ    डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान 2011:- पाँचवा विश्व भोजपुरी सम्मेलन 2011 द्वारिका सेक्टर 8 दिल्ली में पूर्वांचल एकता मंच दिल्ली के अध्यक्ष शिवजी सिंह द्वारा लोक सभा अध्यक्षा मीरा कुमार, फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, मनोज तिवारी की उपस्थिति में प्राप्त।
ऽ    विश्व भोजपुरी सम्मेलन प्रतिभाग 2011:- 10वॉ विश्व भोजपुरी सम्मेलन त्रिवेणी घाट ऋषिेकेश में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की उपस्थिति में काव्यपाठ एवं प्रतिभाग प्रशस्ति पत्र।
ऽ    साहित्य श्री सम्मान 2011:- पर्वतीय पर्यावरण साहित्य व ग्रामोत्थान समिति (पप्सा ग्राम) बजीना अल्मोड़ा उत्तराखण्ड के अध्यक्ष श्री विशन दत्त जोशी ‘शैलज‘ के कुमाऊनी काव्य को भोजपुरी में रुपांतरण का पद्म श्री यशोधर मठपाल तथा विधायक पुष्पेश त्रिपाठी द्वारा प्रदत्त।
ऽ    निजाम उस्ताद सम्मान 2011:- शबनम साहित्य परिषद् सोजत सिटी राजस्थान के प्रबन्ध निदेशक एवं अध्यक्ष अब्दुल समद राही के द्वारा संस्था का सर्वश्रेष्ठ सम्मान पत्र।
ऽ    बाल साहित्य सम्मान 2011:- राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह 2011 में डा0 राष्ट्रबंधु, कृष्ण देव त्रिपाठी के हाथों नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया उत्तर प्रदेश में आयोजित बाल मंच संस्था से प्राप्त।
ऽ    सोहन लाल द्विवेदी बाल साहित्य सम्मान 2012:- बालप्रहरी द्वारा रैमजे इण्टर कॉलेज अल्मोडा में आयोजित राष्ट्रस्तरीय बाल साहित्य सम्मान समारोह में डा0 राष्ट्रबंधु, डा0 रामनिवास मानव, उदय किरौला तथा देवपुत्र पत्रिका के निदेशक डा0 कृष्ण कुमार अस्ठाना के हाथों प्राप्त।
ऽ    विद्यासागर सम्मान 2012 (डी.लिट. के समकक्ष):- विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर, बिहार के कुलपति डॉ. तेज नारायण कुशवाहा और कुलसचिव डॉ. देवेन्द्र नाथ साह द्वारा प्राप्त।
ऽ    गीत भूषण सम्मान 2013:- राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास ,भारत के अघ्यक्ष उमाशंकर मिश्र संरक्षक डा रत्नाकर पाण्डेय, भारत सरकार के केन्द्रीय कोयला मेत्री श्री श्रीप्रकाश जायसवाल के हाथों 21 वाँ अखिल भारतीय सम्मान गाजियाबाद (उ0प्र0) में प्राप्त।
ऽ    आलराउण्ड पुष्प सम्मान 2013:- श्री अमित कुमार लाडी अध्यक्ष आलराउण्ड अकादमी फरीदकोट (पंजाब) से।
ऽ    साहित्य सिद्धहस्त सम्मान 2013:- शबनम साहित्य परिषद् सोजत सिटी (राजस्थान) के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक श्री अब्दुल समद राही द्वारा।
ऽ    संस्कार भारती काव्य श्री सम्मान 2014:- संस्कार भारती उत्तरांचल शाखा खटीमा (ऊधम सिंह नगर) द्वारा।
ऽ    हिन्दी रत्न 2014:- विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर (बिहार) के कुलाधिपति डॉ. सुमन भाई मानस भूषण, कुलपति डॉ. तेजनारायण कुशवाहा एवं कुलसचिव डॉ. देवेन्द्र नाथ साह के हाथो।
ऽ    प.राम सुमेर शुक्ल स्मृति सम्मान 2014:- तराई के संस्थापक पं. रामसुमेर शुक्ल की स्मृति में माननीय विधायक श्री राजेश शुक्ल एवं उत्तराखण्ड के माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह कुंजवाल के हाथों 4 दिसम्बर 2014 को रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) में।
ऽ    उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान:- 26 अगस्त 2015 को राजकीय शिक्षक संघ के जिला अधिवेशन (ऊधम सिंह नगर) में माननीय सांसद श्री भगत सिंह कोश्यारी, प्रान्तीय अध्यक्ष श्री करनैल सिंह तथा जिला अध्यक्ष श्री दीपक शर्मा के हाथों।
ऽ    शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार-2013:- माननीय मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत, शिक्षामंत्री श्री मंत्री प्रसाद नैथानी, महानिदेशक श्री डी0 सैंथिल पाण्डियन तथा निदेशक श्री आर0 के0 कुॅवर, श्रीमती सीमा जौनसारी, श्रीमती कुसुम पन्त के हाथों 5 सितम्बर 2015 को देहरादून में प्राप्त।
ऽ    संस्कार भारती विशिष्ट सम्मान 2015:- 14 सितम्बर 2015 को संस्कार भारती खटीमा द्वारा हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर थारु राजकीय इण्टर कॉलेज खटीमा (ऊधम सिंह नगर) में।
ऽ    भारत गौरव सम्मान 2016:- विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर, बिहार के कुलपति डॉ. तेज नारायण कुशवाहा और कुलसचिव डॉ. देवेन्द्र नाथ साह द्वारा प्राप्त।
ऽ    तुलसी सम्मान-2016:- मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल (मध्यप्रदेश) केे सचिव चन्द्रभान ‘राही’ एवं अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी ‘आनन्द’ द्वारा प्राप्त।
ऽ    पूर्वांचल साहित्य गौरव सम्मान-2016:- 27 मार्च 2016 को पूर्वांचल संस्कृति उत्थान मंच नानकमत्ता ऊधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड) द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए संस्थाध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी द्वारा।

 

 


6. दायित्व:-
    अध्यक्ष:- उत्तराखण्ड बाल कल्याण साहित्य संस्थान खटीमा (ऊधम सिंह नगर)
    जिला उपाध्यक्ष:- भारत ज्ञान विज्ञान समिति ऊधम सिंह नगर, उत्तराखण्ड
    महासचिव:- उत्तराखण्ड बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध संस्थान न्यास खटीमा, ऊधम सिंह नगर।
    महासचिव:- साहित्य शारदा मंच (रजि.) खटीमा, ऊधम सिंह नगर।
    उपाध्यक्ष:- संस्कार भारती उत्तरांचल शाखा- खटीमा (ऊधम सिंह नगर)
    उपाध्यक्ष:- गोकुल धाम संस्कृत सोसाइटी खटीमा (ऊधम सिंह नगर)।¬
    संपादन:- भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वाराहाट द्वारा हस्तलिखित पत्रिका ‘‘नयी उड़ान’’ का प्रधान सम्पादन।
विमोचन:- श्री काशी सिंह ऐरी विधायक कनालीछीना तथा द्वाराहाट विधायक के श्री पुष्पेश त्रिपाठी के हाथों।
    संरक्षक:- भारत ज्ञान विज्ञान समिति इकाई द्वाराहाट अल्मोड़ा वर्ष 2004-2008 तक।
    अध्यक्ष:- भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वाराहाट अल्मोड़ा इकाई का वर्ष 2008 से 2014 तक।
    ब्लाक समन्वयक:- राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस उत्तरांचल - वर्ष 2005 से 2008 तक।
    जिला संयुक्त सचिव:- राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस आयोजन समिति अल्मोड़ा वर्ष 2006-07।
    नोडल टीचर:- (एड्स) किशोरावस्था यौन शिक्षा कार्यक्रम 2008 रा0 इ0 का0 द्वाराहाट में नोडल टीचर।
    मौसम वेधशाला प्रभारी (यू0 प्रोब0):- रा0 इ0 का0 द्वाराहाट में विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा स्थापित। 15 नवम्बर 2009 से मई 2014 तक से ई.टी.वी. उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड पर मौसम तापमान की जानकारी।
    विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम:- राष्ट्रीय सेवा योजना, एन. सी. सी, पर्यावरण, स्काउट, कन्या भ्रूण हत्या निरोध, एड्स जागरूकता, रक्त दान आदि कार्यक्रमों में विशेष सहयोग।
    राज्य ब्यूरो (अवैतनिक):- दिल्ली से प्रकाशित संवाद दर्पण मासिक पत्रिका के जिला अल्मोड़ा के लिए साहित्यिक ब्यूरो।
    राज्य स्तरीय प्रतिभाग:- राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2013 में राज्य स्तरीय प्रतिभाग।
    अनुपूरक साहित्य/बाल साहित्य निर्माण:- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान अल्मोड़ा द्वारा।
    राष्ट्रीय प्राकृतिक शिविर:- गोविन्द बल्लभ पन्त हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल, अल्मोड़ा द्वारा।
    मीडिया प्रभारी एवं प्रचार मंत्री:- संस्कार भारती उत्तरांचल शाखा- खटीमा (ऊधम सिंह नगर, उत्तराखण्ड) वर्ष 2014-15


7. अन्य प्रस्तुति:-
ऽ    आकाशवाणी कार्यक्रम 1983 से लगातार गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) तथा रामपुर (उत्तर प्रदेश) से कविता/ कहानियों का प्रसारण।
ऽ    आकाशवाणी अल्मोड़ा से ‘‘राजभाषा हिन्दी हमारी स्वाभिमान की भाषा’’ विषय पर हिन्दी दिवस पर विशेष आलेख प्रस्तुति।
ऽ    जैन टी.वी. एवं साधना टी.वी. चैनल से काव्य पाठ
ऽ    राष्ट्रस्तरीय काव्य पाठ:- गान्धी शान्ति प्रतिष्ठान (दिल्ली) वर्ष 2008, हिन्दी भवन लोहियानगर गाजियाबाद (उ0 प्र0) वर्ष 2007, कुमायूँ इंजीनियरिंग कालेज द्वाराहाट अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) वर्ष 2007, अनासक्ति आश्रम कौसानी बागेश्वर (उत्तराखण्ड) वर्ष 2008, गजाधर मान सिंह धर्मशाला भीलवाड़ा (राजस्थान) वर्ष 2008 तथा आकाशवाणी अल्मोड़ा द्वारा आयोजित विशेष कवि सम्मेलन में मूर्धन्य एवं प्रतिष्ठित साहित्यकारों संग काव्य पाठ।
ऽ    संचालन:- प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रस्तरीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलनों का संचालन।
ऽ    आलेख प्रकाशन:- देव पुत्र, लोट-पोट, धोधर बाबा सरजू सागर मेल, साहित्यांचल, कंचनलता, बाल वाटिका, बाल प्रहरी, ज्ञान विज्ञान बुलैटिन, हम सब साथ साथ, यू0 एस0 एम0, शब्द सरोकार, प्रेरणा अंशु, पंखुड़ी, वात्सल्य जगत, हिन्दी ज्योति विम्ब, काव्याजलि, राष्ट्र किकंर, सच का साया, सरस्वती सुमन, साहित्य त्रिवेणी, इनसाइट एक्सप्रेस, जयतु हिन्दू विश्व, हिमा पर्यावरण, अभिव्यक्ति, यू0 प्रोब0 न्यूजलेटर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, उत्तर उजाला, दूर गगन तक, देवसुधा, काव्यांजलि, बुद्धिजीवी, एवं 150 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में अनेक आलेख एवं साहित्य प्रकाशित।

ऽ    इण्टरनेट (विश्व जाल) पर कवि नन्द:-
अपना हिन्दुस्तान डॉट कॉम, अपना हरियाना डॉट कॉम, समय दर्पण डाट कॉम, स्वर्गविभा डाट कॉम, अनूभूति डाट कॉम, भोजपुरिया डाट कॉम, अपनी माटी डाट कॉम, रचनाकार डॉट कॉम, लेखक मंच डाट कॉम, लेखनी डाट नेट, भोजपुरी एक्सप्रेस, पाण्डुलिपि डाट कॉम, कविताकोश डाट कॉम, विश्व गाथा डाट कॉम एवं 100 से अधिक वेबजाल पर रचना एवं साहित्य उपलब्ध। एनफ डॉट कॉम, यू0-ट्यूब डॉट कॉम पर कविनन्दद्वाराहाट, जीआईसीद्वाराहाट सर्च करने पर साहित्यिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक विभिन्न प्रकार के वीडियो उपलब्ध।

नोट:- पल्स पोलियो रैली, रमसा प्रशिक्षण, संस्कृत प्रतियोगिता, स्वतन्त्रता दिवस, रम्सा भ्रमण, विज्ञान संगोष्ठी, मौसम बेधशाला की बनाई हुयी डाक्यूमेन्ट्री फिल्म जैसे विभिन्न ब्लाक स्तरीय कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर में कराये गये कार्यक्रम एवं सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता हेतु youtube.com ij  kavi nand dwarahat, gicdwarahat, mahendra pratap pandey nand, rmsa dwarahat, mp_pandey123 को गूगल में सर्च कर आनन्द लिया जा सकता है।
8. सम्प्रति:- सहायक अध्यापक, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिरिया मझोला, ऊधम सिंह नगर उत्तराखण्ड
9. सम्पर्क:- सहायक अध्यापक राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिरिया मझोला, ऊधम सिंह नगर उत्तराखण्ड         पिन-262308 फोन नम्बर .. 05943.251243 ध् 09410161626 ध् 07068188951
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3 blogger-facebook:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (16-04-2017) को
    "खोखली जड़ों के पेड़ जिंदा नहीं रहते" (चर्चा अंक-2619)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. सुन्दर रचनाएँ

    उत्तर देंहटाएं

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