सोमवार, 24 अप्रैल 2017

शब्द संधान / अड्डा -- तेरे रूप अनेक / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

        

   अड्डा शब्द कहते ही हमारे मन में सबसे पहले हवाई-अड्डे की तस्वीर उभरती है | हवाई-अड्डे हवाई जहाज़ों के ठहरने के वे स्थान हैं जहां कई जहाज़ इकट्ठे खड़े हो सकते हैं | कुछ हवाई-अड्डे राष्ट्रीय हैं तो कुछ अंतर्राष्ट्रीय भी होते हैं | अंतर्राष्ट्रीय हवाई-अड्डों पर अनेक देशों के जहाज़ों के ठहराने की सुविधा होती है | हवाई-अड्डे तो बेशक होते हैं पर अड्डे ‘हवाई’ नहीं होते | लेकिन मुझे ‘हवाई-अड्डा’ शब्द बड़ा मजेदार लगता है | ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह ज़मीन पर स्थित कोई केंद्र न होकर हवा में तैर रहा कोई स्थान हो | वैसे हम भारतवासी हवाई-किले बनाने के बड़े शौकीन हैं और ज़ाहिर है ये हवाई-किले ज़मीनी हकीकत नहीं होते | ये हमारे मन में बसते हैं और इन्हें हम स्वतन्त्र विचरण के लिए हवा में छोड़ देते हैं | एक व्यक्ति के मन में हवाई किला बनाते बनाते यह विचार आया कि क्यों न अपने शहर को स्मार्ट बनाने के लिए किसी पुराने हवाई जहाज़ को लुधियाना लाकर उसमें एक रेस्टोरेंट खोल दिया जाए जिसमें बैठ कर लोग खाना खाएं तो उन्हें ऐसा लगे की वे किसी हवाई जहाज़ में बैठ कर खाना खा रहे हैं | बड़ी बात यह थी, कि उसने अपने इस हवाई-किले को ज़मीन पर उतार दिया | यह हवाई किला ‘हवाई-अड्डा रेस्टोरेंट’ के नाम से आज कायम है |

    हवाई-अड्डे हैं, तो इक्के और तांगों के अड्डे भी क्यों न हों ? असल में पहले इक्के और तांगों के ही अड्डे होते थे | टैक्सी और हवाई जहाज़ों के अड्डे तो बहुत बाद में आए | छोटे कस्बों में आपको कोई सवारी लेने के लिए इक्के/तांगों के अड्डे पर ही जाना पड़ता है | वृहद् हिन्दी कोष में अड्डे का अर्थ “मिलने या इकट्ठा होने की जगह” बताया गया है | अड्डे के लिए जगह और जमघट –ये दो चीजें ज़रूरी हैं | अड्डे के अनेक उदाहरण दिए गए हैं | लेकिन अड्डे की बदकिस्मती देखिए कि यह अधिकतर बदनाम लोगों के जमघट का ही केंद्र माना गया है | चोरों, डकैतों, जुआरियों, आदि, के मिलने की जगह, रंडियों और कुटनियों के डेरे, इत्यादि | आधुनिक समाज में ऐयाशियों के भी अड्डे बन गए हैं | आतंकवादियों के अड्डे हैं; और तो और, पुलिस चौकी को भी आम जनता अड्डा ही कहती है | कोई शरीफ आदमी वहां नहीं जाना चाहता |

    लेकिन जनाब, शरीफों के भी अड्डे होते हैं | उनकी पहचान आप अड्डों की तरह न करें, यह बात दूसरी है | पहले ये केंद्र कहलाते थे | बुद्धि-जीवियों के केंद्र, विचारकों के केंद्र, साहित्यकारों के केंद्र, इत्यादि | अब ये अधिकतर अड्डे हो गए हैं | कभी काफी-हाउज़ साहित्यकारों का मिलन केंद्र हुआ करता था | पर अब ऐसे मिलन केंद्र तो लगभग समाप्त होते जा रहे हैं, इनकी जगह अड्डे बन गए हैं जहां साहित्यकार अपने गुट और गिरोह की बात ज्यादह और साहित्य-चर्चा न के बराबर करते हैं | कई शहरों में ‘इंडियन काफी हाउस’ साहित्यकारों और लेखकों का आज भी अड्डा बना हुआ है, और उसे ‘केंद्र’ न कहकर, ‘अड्डा’ कहने में ही गर्व महसूस किया जा रहा है | यहाँ लेखक आदि यारबाशी के लिए जमा होते हैं, मौज-मस्ती के लिए बातचीत करते हैं | गंभीर विषयों पर चर्चा के लिए भी कोई प्रतिबन्ध नहीं होता | बुद्धिजीवियों, लेखकों, साहित्यकारों, और पत्रकारों के ऐसे अड्डे आपको हर कस्बे, हर शहर, और गाँवों तक में मिल जावेंगे और ज़रूरी नहीं कि उनकी बैठकें किसी संभ्रांत काफी हाउज़ में ही हों; वे किसी भी बाग़-बागीचे, चाय की गुमटी, खान-पान की छोटी दूकान आदि में भी संपन्न हो सकती हैं | बस अड्डेबाजी के लिए नियमित रूप से, जैसे हर रविवार को, सदस्यों में से कुछ का वहां पहुँच जाना ज़रूरी होता है | अगर आप इतिहास देखें तो वैचारिक अड्डेबाजी का सबसे बढ़िया और ज्वलंत उदाहरण आप यूनानी दार्शनिक सुकरात की बैठकों में देख सकते हैं | सुकरात अपनी बैठक किसी भी कोने में जमा लेते थे और लोगों से संवाद शुरू कर देते थे | देखते देखते इस अड्डेबाज़ी से सुकरात का पूरा एक दर्शन तैयार हो गया जिसका एक प्रमाणित दस्तावेज़ हमें प्लेटो के “डायलोग्ज़” में मिलता है |       

    अड्डे बनाने के लिए जैसे ठोस धरती ही काफी नहीं थी कि अड्डों की वेब-साइट्स भी खुल गईं हैं, जहां अड्डेबाजी की वर्चुअल-दुनिया फल-फूल रही है | मौसम की जानकारी के लिए, मौसम-अड्डा; लोगों को अपनी बात रखने के लिए, लोक-अड्डा; चर्चित खबरों के लिए, रिपोर्ट अड्डा; जवानों के लिए, यूथ-अड्डा; स्त्री-विमर्श के लिए वीमन-लिबरेशन अड्डा_ _ कोई भी, किसी भी मुद्दे को लेकर अपना अड्डा इस आभासी-दुनिया में बना डालता है | ई-अड्डों की तो भरमार होती जा रही है |  अड्डा तेरे रूप अनेक |

                                                                                                              -डॉ. सुरेन्द्र वर्मा (९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१

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