सोमवार, 24 अप्रैल 2017

भूल की सजा / सार्थक देवांगन

सार्थक देवांगन

भूल की सजा

एक बार की बात है । एक गांव में एक बहुत भुलक्कड़ आदमी रहता था । उसका नाम अइयर था । वह मूलतः चेन्नई का रहने वाला था । वह गांव के डाकघर में पोस्टमास्टर का काम करता था । उसके परिवार वाले चेन्नई में रहते थे । उसका जन्म भी चेन्नई में हुआ था । एक बार की बात है , एक दिन डाकघर में उसने डाकिया को बहुत डांट दिया । डाकिया ने उसे जवाब देते हुए कहा कि – आप एक दिन मेरी जगह काम करके देखिए तब आपको पता चलेगा कि डाकिया का काम कितना मुश्किल है । इतनी धूप में घर घर जाना पड़ता है , और वैसे भी आप भुलक्कड़ आदमी हो , हर चीज भूल जाते हो । अइयर किसी की चुनौती को अनदेखा नहीं करता था । वह आसानी से तैयार हो गया । दूसरे दिन उसने डाकिया की छुट्टी कर दी और उसकी जगह पत्र बांटने निकल पड़ा । गरमी के दिन थे । धूप बड़ी तेज थी । सूरज आग उगल रहा था । थोड़ी दूर चलने पर वह थक सा गया । पेड़ की घनी छाया देखकर थोड़ा आराम करने की सोचने लगा । एक पेड़ के नीचे सो गया । वह भूल गया कि किस काम के लिए निकला है । जब दोपहर ढली तब , रटपटा कर उठा और घर चले गया । शाम को डाकिये के घर के नजदीक गुजरने पर उसे याद आया कि , उसे तो डाक बांटना था । दौड़ते दौड़ते बगीचे में गया और जहां वह सोया था उसके अगल बगल टटोलने लगा । डाक वाली बैग गायब थी । इधर उधर खूब तलाश की , परंतु कोई फायदा नहीं । मुंह लटकाकर वापस हो गया । रात भर इस चिंता में नहीं सोया कि अगले दिन वह डाकिये को क्या मुंह दिखाएगा , फिर क्या पता किस आदमी के लिए क्या जरूरी खबर उस डाक बैग में आयी रही होगी जो उसकी लापरवाही और भूल जाने की बीमारी की वजह से नहीं वितरित हो सकी ।

अगले दिन डाकिये से वह सामना नहीं कर पा रहा था । परंतु जब डाकिये ने बताया कि कल की पूरी चिट्ठियां वितरित हो चुकी है , उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा । अपनी गलती के लिये उसने डाकिये से माफी मांगी और चुनौती पूरा नहीं कर पाने की लज्जा में वह छुट्टी लेकर चेन्नई चला गया । अपने परिवार से , बहुत दिनों के बाद मिला था । उसने अपने परिवार के कुछ लोगों को नहीं पहचाना । तभी उसे सभी लोगों ने कहा कि अभी भी बहुत भुलक्कड़ है आप । वापस जाने के दिन करीब आने लगे , तभी उसकी अम्मा ने उसकी शादी के लिए कुछ मेहमान आने की जानकारी दी । उनके चाय काफी के इंतजाम के लिए , अम्मा ने उसे दूध लाने के लिये भेजा । अइयर अपने पुराने स्कूटर से निकल गया । रास्ते में उसके कुछ दोस्त मिल गये । वहीं रूककर चाय पीने लग गया । और उसी चक्कर में वह भूल गया कि किस काम से निकला है ।

शाम को वह घर पहुंचा तब पता चला कि मेहमान आकर निकल गये । लड़के को नहीं देख पाने की वजह से रिश्ता नहीं हो पाया । उसकी अम्मा ने गुस्से में पूछा कि तुम दूध ले आये ? उसने कहा – नहीं । अम्मा मैं तो दूध नहीं लाया । मैं भूल गया । मेरे दोस्त मिल गये थे इसलिए .............। अम्मा ने उसकी लापरवाही के लिए खूब डांटा । पापा ने अम्मा को समझाया कि लड़का कल जाने वाला है इस तरह मत फटकारो । पापा ने बड़े प्यार से समझाया । सुबह वापस जाने के लिए अइयर तैयार हो गया । स्टेशन तक छोड़ने के लिए स्कूटर निकालने के लिए स्कूटर को तलाशने लगे । स्कूटर गायब थी । पापा का गुस्सा सातवें आसमान पर था पर कुछ कह नहीं सके । स्कूटर को , अइयर पता नहीं , कहां भूल आया था । उसकी ट्रेन छूट गयी । बाद में स्कूटर तो उसके एक दोस्त के घर से मिल गया । परंतु वह अपनी ड्यूटी में दो दिन देर से पहुंचा । अपने सीनियर पोस्ट मास्टर से अपनी भूल और लापरवाही की वजह से खूब डांट पड़ी ।

भूल और लापरवाही ने अइयर को ऐसी सजा दी कि उसकी शादी इस साल भी नहीं हो सकी , और तो और विभाग में होने वाले प्रमोशन की सूची से भी उसका नाम कट गया ।

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सार्थक देवांगन

छठवीं , केंद्रीय विद्यालय रायपुर

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