बुधवार, 12 अप्रैल 2017

हे हनुमान बाबा! - राजीव कटारा

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आज चैत्र पूर्णिमा है और हनुमान जयंती भी। आज तो खैर मंगलवार है। लेकिन जब भी उनकी जयंती किसी और दिन पड़ती है, तो एक सूनेपन का एहसास होता है। कुछ साल पहले हनुमान बाबा की जयंती सोमवार को थी। दिल्ली के यमुना बाजार से निकला था। मंदिर कुछ ज्यादा ही सजा हुआ था। लेकिन भीड़भाड़ नहीं थी। अगले दिन मंगलवार को फिर मुझे अच्छे खासे लोग नजर आए थे। दो दिन लगातार हनुमानजी के थे। लेकिन कितना फर्क था!

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शायद वह अकेले देवता हैं, जिनकी जयंती से ज्यादा उनके मंगलवार को मनाया जाता है। शिव के भक्त सोमवार को जरूर मंदिरों में दिखलाई पड़ते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि जैसा आयोजन या भीड़ आम सोमवार को नजर नहीं आती। हनुमानजी की बात ही अलग है। उनकी जयंती किसी भी दिन मनाई जाए लेकिन भक्त मंगलवार को नहीं भूलते। फिर मंगलवार ही कोई अकेला दिन नहीं हनुमानजी का। शनिवार को ही देखें। शनि डराने वाले देवता हैं। उस दिन भी लोग हनुमानजी की पूजा करते हैं। हनुमानजी ‘अतुलित बलधामं’ हैं। लेकिन डराते जरा भी नहीं। वह तो भरोसा जताते हैं। इस देश में हनुमानजी से ज्यादा भरोसा किसी देवता में लोगों का नहीं है। उनके देव राम से भी ज्यादा भरोसा! राम ते अधिक, राम के दासा। यह संयोग नहीं है कि रामचरित मानस में सबसे ज्यादा सुंदरकांड पढ़ा जाता है। वह कांड जो हनुमानजी को समर्पित है।

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दरअसल, हनुमानजी को अपने बहुत नजदीक पाता है भक्त। एक बात तो यही है कि हनुमान खुद अपने राम के भक्त हैं। उस भक्त के भक्त होने में ज्यादा अपनापन महसूस होता है। फिर हनुमान यह भरोसा दिलाते हैं कि वह कुछ भी कर सकते हैं। हर भक्त को अपनी जिंदगी के तमाम मोड़ों पर संजीवनी की तलाश रहती है। और संजीवनी का भरोसा हनुमान से ज्यादा कौन दिला सकता है? इसी वजह से तो वह संकटमोचक हैं। अपने ठेठ शाश्वत रक्षामंत्री हैं।

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मानस में सागर तट पर जामवंत खोए-खोए से हनुमान को याद दिलाते हैं कि वह कुछ भी कर सकते हैं। यह मुझे सिर्फ इसलिए अद्भुत नहीं लगता कि हनुमानजी क्या कुछ कर सकते हैं? उससे यह महसूस होता कि हर शख्स में कितनी संभावनाएं छिपी होती हैं। बस उन्हें जगाना या पहचानना होता है।
मुझे तो हनुमान अजब विरोधाभासी लगते हैं। वह कप्तान भी हैं और खिलाड़ी भी। लीडर हैं और लीडर की सेना भी। उनमें अतुलित बल है, लेकिन गजब के अनुशासित हैं। कमाल का ज्ञान है, लेकिन गजब के विनम्र हैं। कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन वैरागी हैं। प्रभु हैं, लेकिन भक्त भाव में जीते हैं। सबके प्रिय, सबके हितकारी। इसीलिए तो हनुमान हनुमान हैं। हे हनुमान बाबा! हमें बल दो, बुद्धि दो, भक्ति दो और अपने जैसी विनम्रता दो।

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