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प्राची-अप्रैल 2017–हास्य-व्यंग्य विशेषांक : व्यंग्य / पुरस्कार पात्रता परीक्षा / शशिकांत सिंह ‘शशि’

राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य विकास परिषद ने साहित्य के व्यापक हित में ‘पुरस्कार पात्रता परीक्षा’ आयोजित करने का निर्णय लिया है. परिषद को ज्ञात हुआ है कि प्रत्येक वर्ष, प्रायः प्रत्येक कोटि के पुरस्कारों की घोषणा के उपरांत, राष्ट्रीय स्तर पर थुक्क्म-फजीहत का वातावरण निर्मित हो जाता है. सर फुटौव्वल की प्रवृत्ति उफान पर होती है. क्षेत्र, लिंग तथा आयु को भूलकर लोग परस्पर गाली-गलौज का दान-प्रतिदान करते हैं. पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति सजायाफ्ता मुजरिम की हालत में होता है. गौरतलब है- साहित्य की रक्षा केवल पुरस्कारों के आदान-प्रदान से ही संभव है. पुरस्कार तथा पुरस्कार प्राप्त प्रतिभागी निरापद रहें, इसी में साहित्य का कल्याण है. अतः परिषद ने पुरस्कार पात्रता परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है. परिषद से निर्गत प्रमाणपत्र प्राप्त व्यक्ति, सभी प्रकार के पुरस्कारों के सर्वथा योग्य होंगे. उसकी निंदा सर्वथा निंदनीय होगी.

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ज्ञातव्य है कि यह परीक्षा दो चरणों में होगी. प्रथम चरण में दो सौ अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रकार के सौ प्रश्न पूछे जायेंगे जिनका संबंध वर्तमान समय में चल रही साहित्य की राजनीति से होगा. अर्थात, गुटबाजियां, गलबहियां, सैर-सपाटे, मंच, प्रपंच, विमर्श और लेग पुलिंग से. दूसरे चरण में दो सौ अंकों के प्रश्न पूछे जायेंगे जिसका पाठ्यक्रम निम्न प्रकार होगा-

1. निंदापुराण का शास्त्रीय महत्त्व तथा उसका सामयिक परीक्षण...50

2. आत्मस्तुति की साहित्यिक और सामयिक समीक्षा....50

3. वर्तमान समय की गुटबाजियों का हिन्दी साहित्य में महत्त्व ....50

4. पुरस्कार प्राप्ति की शास्त्रीय विधियां...50

उक्त विषयों में पात्रता हेतु न्यूनतम साठ प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागी राष्ट्रीय पुरस्कारों हेतु योग्य होंगे तथा उन्हें किसी भी उम्र अथवा वर्ग के पुरस्कार जनहित में दिये जा सकेंगे. इस प्रकार के आयोजन के पीछे परिषद की मंशा यह भी है कि साहित्य का चतुर्दिक विकास हो सके. साहित्य में ऐसी प्रतिभाओं की कमी नहीं है जो लेखनेत्तर कार्यों में अपनी समस्त प्रतिभा उड़ेलते हैं. उन्हें अखाड़ेबाजी, कालिख पोतन, कचराकरण, एवं पूंछ प्रक्षालन की विधियां सीखनी होती हैं. इस कार्य हेतु उन्हें सर्वप्रथम एक योग्य गुरु की शरण में जाकर दीक्षित होना पड़ता है. गुरुदेव के चरणचंपन करने तथा उनके विरोधियों की मूंछ के बाल गिनने के उपरांत पुरस्कारों की पात्रता प्राप्त होती थी जिससे उदीयमान साहित्यकार अस्ताचलगामी हो जाया करता है. अतः पात्रता परीक्षा देकर ऐसी प्रतिभाएं अपनी संभावनाओं को जीवित रख सकती हैं.

परिषद ने निर्णय लिया है कि ऐसे प्रतिभागी जो 2005 की जून तक अपना पी एच डी, पुरस्कार, प्रपंच, चापलूसी, गुटबंदी, अथवा गिरोहीकरण में से किसी एक में प्राप्त कर चुके हों उन्हें उक्त परीक्षा से मुक्त रखा जायेगा. पी.एच.डी. के लिए किसी विश्वविद्यालय की आवश्यकता नहीं है. यदि गाइड ने अपनी कलम से प्रभावशाली प्रमाण-पत्र निर्गत किया तथा यह प्रमाणित किया कि- ‘‘बालक चापलूसी में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की पात्रता रखता है तथा गाइड के बच्चों की पोटी साफ करने से लेकर उनकी बीवी के लिए फैशन सामग्री मुहैया कराता रहा है. हिन्दी साहित्य की किसी भी पुस्तक से किसी भी प्रकार का रिश्ता नहीं रखता तथा भविष्य में इस प्रकार की कोई आशंका भी नहीं है. यह अपने तथा अपने गुरुदेव के अतिरिक्त भूतकाल से वर्तमान काल तक किसी अन्य को लेखक नहीं मानता तथा भविष्य में गुरुदेव के मस्तक पर भी नर्तन कर सकता है. प्रतिभागी ने आजतक एक भी कागज काला नहीं किया है, तथा फेसबुक, ट्विटर आदि को ही सद्ग्रंथ मानता रहा है, मैं इसके पुरस्कारमय भविष्य की कामना करता हूं.’’

यह प्रमाणपत्र यदि किसी प्रतिभागी को प्राप्त हो चुका है तो वह पेट की परीक्षा से मुक्त माना जायेगा. परिषद के विद्वानों ने यह तय किया है कि परीक्षा प्रत्येक वर्ष जून तथा दिसम्बर में आयोजित की जायेगी. परीक्षा के पूर्व परीक्षार्थियों को हताशा तथा नाना प्रकार की कुंठा से निवारण हेतु, परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करने की उत्तम और विश्वसनीय व्यवस्था की गई है; ताकि उद्भट प्रतिभाएं कुंठित न हों और लीकोत्तर प्रश्नपत्र का अध्ययन कर सकें. लीक प्रश्नों की प्राप्ति उचित धनराशि देकर परीक्षा के दो दिन पूर्व भी संभव है. यदि गांठ का पूरा परीक्षार्थी हो तो उसे परीक्षा के दस दिन पूर्व भी प्रश्न पत्र मुहैया कराये जा सकते हैं, ताकि अक्ल का अंधा होने की स्थिति में भी वह उत्तीर्णांक हासिल कर सके.

प्रश्नपत्रों की जांच हेतु एक उच्च पात्रता प्राप्त साहित्यकारों का गुट बनाया जायेगा तथा इसकी सूचना परिषद के वेबसाइट पर दे दी जायेगी; ताकि प्रतिभागी उक्त सदस्यों से पारिवारिक तथा सामाजिक रिश्ते निकालकर अपनी गोटी सेट कर सके. पुरस्कारों हेतु भी संबंध सेतु ही निर्मित करने पड़ते हैं, अतः प्रतिभागी की प्रतिभा का उन्नयन यहीं से ही ऊर्ध्वगामी होने लगेगा.

पुरस्कार पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण किये प्रतिभागी को पुरस्कारों हेतु केवल मौखिक परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा. मौखिक परीक्षा सौ अंकों की आयोजित की जायेगी जिसमें प्रतिभागी की उपलब्धियों पर चर्चा होगी. उसके द्वारा अभी तक प्राप्त पुरस्कारों की गुणवत्ता तथा उनका आर्थिक महत्त्व, पुरस्कार देने वाली संस्था का राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व आदि. यह भी संभव है कि साक्षात्कार लेने वाले सज्जन प्रतिभागी की रचनाओं पर चर्चा करें. यदि उसकी कोई किताब प्रकाशित हो चुकी है तो किताब का वजन, प्रकाशित करने वाली संस्था का राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व, किताब पर अंकित कीमत आदि पर चर्चा हो सकती है. प्रतिभागी की किताब पर यदि किसी महान लेखक की भूमिका है तो इसे अधिभार माना जायेगा तथा उक्त लेखक से स्थापित संबंधों के आधार पर ही प्रतिभागी की सफलता सुनिश्चित होगी. यह संभव है कि भूमिका-लेखक के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से रिपोर्ट मांगी जाये. भूमिका लेखक के राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व पर भी प्रकाश डलवाया जा सकता है. महिला प्रतिभागियों को लिखित परीक्षा तो उत्तीर्ण करनी ही होगी किन्तु मौखिकी में उनके साठ प्रतिशत अंक आरंभ से ही सुरक्षित होंगे. उनकी अवस्था, नैन-नक्श, चमड़े का रंग तथा अदाओं के अनुसार भी उनको अधिभार दिये जाने की व्यवस्था की गई है ताकि नारी लेखन का चरम विकास तीव्रतर संभव हो सके. महिला प्रतिभागी यदि बीस से तीस वर्ष की वय में हैं तो उनको बीस अंकों का अधिभार साक्षात्कार मंडल स्वतः दे देगा. यदि उनकी अवस्था तीस से चालीस के मध्य है तो उन्हें दस अंकों का अधिभार मिलने की संभावना होगी. चालीस से पचास तक की अवस्था की महिलाओं को पांच अंक प्रसाद-स्वरूप दिये जा सकते हैं. यह उनके नैन-नक्श तथा हाव-भाव पर निर्भर होगा. पचास के ऊपर की महिलाओं के लिए नकारात्मक अंकों की व्यवस्था की गई है. परिषद यह उम्मीद करता है कि पचास पार महिलाएं लेखन के धंधे से संन्यास ले लेंगी.

किसी भी प्रकार की शिकायत या सुझाव के लिए परिषद की वेबसाइट पर आये जो कहीं नहीं है.

सधन्यवाद.

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सम्पर्कः जवाहर नवोदय विद्यालय,

शंकरनगर, नांदेड़ मो. 7387311701

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