रविवार, 28 मई 2017

प्राची-अप्रैल 2017–हास्य-व्यंग्य विशेषांक : व्यंग्य / लौट आओ ‘टॉमी’ / सुनील सक्सेना

सुबह-सुबह जब आप किसी के घर के सामने बेतरतीब वाहनों की कतार देखते हैं. बगैर मुंह हाथ धोये, आंखों में नींद भरी, सूजी आंखोंवाले चेहरों को घर की चप्पलों में रात्रिकालीन गणवेश में मुंह लटकाये ग्रुप में खुसुर-पुसुर करते देखते हैं, तो मन में बस एक ही ख्याल आता है कि जरूर इस घर की कोई आत्मा रात में इस फानी संसार से कूच कर गई है.

मैं जब मार्निंग वॉक के लिए निकला तो भैयाजी के बंगले के सामने ठीक ऐसा ही नजारा था. भैयाजी की गिनती नगर में पार्टी के वरिष्ठतम लोगों में होती है. कनिष्ठ लोगों की तिकड़मबाजी से वरिष्ठ भैयाजी कभी मंत्री नहीं बन सके. पार्टी ने उन्हें मंत्री पद का दर्जा देकर एक आयोग का चेयरमैन बना दिया. अब भैयाजी के पास सरकारी बंगला है, दरबान है, गाड़ी है, एक ठो पीए है और एक अदद कुत्ता जिसका नाम ‘‘टॉमी’’ है. यूं तू टॉमी शांत प्रवृत्ति का है. लेकिन एहतियातन भैयाजी ने बंगले के मुख्य द्वार पर एक बड़ा बोर्ड लगा रखा है, जिस पर कुत्ते से सावधान लिखा है. गौरतलब है इस तख्ती का साइज भैयाजी की नेमप्लेट से बड़ा है.

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बंगले के सामने लाल-पीली बत्तियोंवाली गाड़ियों की लाइन और लोगों को आपस में बतियाते देख मेरे भी मन में बुरा ख्याल आया कि कहीं वयोवृद्ध भैयाजी भवसागर तो पार नहीं कर गये? मेरा दिल नहीं माना तो वहीं भीड़ में एक मुंह लटकाये खड़े सज्जन से मैंने पूछ लिया- ‘‘क्या बात है भाईसाब सब कुछ ठीक तो है?’’

वे बोले- ‘‘भैयाजी का टॉमी कल रात से लापता है. भैयाजी का नूरे नजर और दिल का टुकड़ा है टॉमी. अपनी औलाद की तरह पाला-पोसा है उन्होंने टॉमी को. सारा प्रशासन, मित्र मंडली, भैयाजी के शुभचिंतक गई रात से टॉमी को ढूंढ़ने में लगे हैं, लेकिन उसका कहीं कोई अता-पता नहीं मिल रहा है.’’

मैंने सुबह की ठंडी ताजा हवा में गहरी सांस ली. सोचा चलो भैयाजी की मृत्यु का ख्याल तो गलत निकला. वैसे लोग कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति के बारे में ऐसे बुरे विचार मन में आते हैं या उसकी मौत का सपना दिखता है तो उस आदमी की उमर बढ़ जाती है. मैं खुश हुआ. चलो भैयाजी दीर्घ आयु हो गये. राजनीति की दुनिया में एक ‘‘अपूरणीय क्षति’’ होने से बच गई. जो अला-बला थी कुत्ते पर आकर टल गई.

मैंने सांत्वना भरे अंदाज में उन सज्जन से कहा- ‘‘आप लोग खामोखां इत्ता परेशान हो रहे हैं. कुत्ता है यहीं कहीं भटक गया होगा. आ जायेगा.’’

मेरे ढांढस का उन सज्जन पर कोई असर नहीं हुआ. वे बोले- ‘‘नहीं सर, जिस तरह घटना का बैकग्राउंड भैयाजी ने बताया है उससे तो लगता है कि उनका टॉमी शहर नहीं देश ही छोड़कर चला गया है. दरअसल टॉमी पिछले कुछ दिनों से डिप्रेशन में था. जिस दिन से टॉमी ने सुना कि जापान में जनसंख्या नियंत्रण के लिए वहां के नवदंपत्तियों ने बच्चे पैदा न कर कुत्तों को गोद लेकर पालने का प्रण किया है, उसी दिन से टॉमी सुस्त रहने लगा था. न भैयाजी के सामने पूंछ हिलाता था न ही उनके तलवे चाटता था. उसे बार-बार ये लगने लगा था कि उसकी प्रतिभा का सही मूल्यांकन भैयाजी नहीं कर रहे हैं. भलाई इसी में है कि यहां से निकल लो.’’

मैंने कहा- ‘‘आपका अनुमान ठीक लगता है. आप सही कह रहे हैं. कुत्तों की प्रतिभा पर किसी को कभी कोई शक नहीं रहा है. जब-जब वफादारी की बात होती है कुत्तों की मिसालें ही अव्वल नंबर पर होती हैं. उनकी स्वामिभक्ति, मालिक के लिए उनकी कुर्बानियों के ढेरों किस्से इतिहास में दर्ज हैं. उनकी कर्तव्यनिष्ठा पर भला कौन संदेह कर सकता है? ऐसे कर्तव्यपरायण कुत्तों का पलायन निश्चित ही चिंता का विषय है. भैयाजी का चिंतित होना वाजिब है.’’

मैंने चिंतन को आगे बढ़ाते हुए कहा- ‘‘वैसे भी ‘ब्रेन ड्रेन’ की समस्या हमारे देश के लिए नई नहीं है. जिन डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिकों को हमारे विशेषज्ञ नाकारा घोषित कर देते हैं, वो देश छोड़कर चले जाते हैं. जब वे परदेस में अपनी हुनर का लोहा मनवाते हैं, तब हमें पता चलता है कि अरे! गुरु वो तो बड़ा होनहार था. हम ही निकम्मे थे जो उसके टैलेंट को पहचान न सके. तो ऐसे में बेचारा भागे नहीं तो क्या करे?’’ 

मेरे चिंतन से वे सज्जन सहमत लगे. कहने लगे ‘सर बात भगने-भगाने तक ही सीमित होती तो भी गनीमत थी.बेशर्मी की हद देखिए आप. अपने हुनर और परिश्रम से शोहरत की बुलंदियों को छूनेवाली ऐसी हस्तियों की कामयाबी का क्रेडिट लेने में हम तनिक भी संकोच नहीं करते हैं. फ्री फंड की हवा सीने में भरकर छाती चौड़ी कर लेते हैं. हमारा कलेजा तो इस बात से ही ठंडा हो जाता है कि बंदा रहता भले ही विलायत में हो पर है तो ‘भारतीय मूल’ का.

प्रेस विज्ञप्ति जारी हो गई. सरकार हरकत में आ गई.पड़ोसी देश की सीमाएं सील हो गईं. कुत्तों से ‘मानवीय व्यवहार’ करने के कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का फरमान भी जारी हो गया. श्वानों के नाम अपील भी जारी हुई. तुम्हें तुम्हारी वफादारी का वास्ता हमें छोड़कर यूं न जाना. टॉमी तुम जहां कहीं भी हो हमारी आवाज तुम तक पहुंच रही हो तो प्लीज लौट आओ. बंगले के सामने भीड़ छंटने लगी थी.

सम्पर्कः 301 सागर रेसीडेंस,

ई-6/9, अरेरा कॉलोनी

भोपाल-462016

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