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प्राची-अप्रैल 2017–हास्य-व्यंग्य विशेषांक : व्यंग्य / आयोग दवा भी और मर्ज भी! / अनूप मणि त्रिपाठी

मारा देश कई प्रधान देश है. कृषि प्रधान तो था ही. क्रिकेट प्रधान तो है ही. होते-होते देश अब आयोग प्रधान भी हो गया है. देश की आने और जाने वाली सरकारें करें भी तो क्या करें. वो सरकार ही क्या, जो अपने कार्यकाल में आयोग का योगासन न करे. बिना आयोग के सरकारें नहीं चला करतीं क्योंकि-

आयोग बेरोजगारी दूर करने का साधनः देश को आयोग की बहुत आवश्यकता है. जहाँ बेरोजगारी इतनी भयावह हो, सरकार आयोग का गठन कर एक तरह से बेरोजगारी कम करती है. आयोग रिटायर व्यक्ति को काम देता है.

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आयोग एक चलचित्रः जिसमें सरकार रूपी डायरेक्टर के इशारे पर अध्यक्ष नाम का अभिनेता ‘सच्चाई सबके सामने लायी जाएगी!’ का डॉयलाग मारता है और विपक्ष नाम का विरोधी डॉयलाग सुन अट्टहास करता है. जनता किसी सुखद अंत की मीठी उम्मीद लिए, जिसे अंत तक देखा
करती है.

आयोग अवकाश पुनःप्राप्ति का एक फरमानः उनके लिए जो पुराने-घुटे-उच्च, अवकाश प्राप्त अधिकारी हैं, जिन्हें अनुभवी और दक्ष भी कहा जा सकता है, जो अपने घरों में बैठे-बैठे बोर हो रहे हैं, उनसे सरकार कहती है- आओ! जब बैठना ही है, तो हमारे आयोग में आकर बैठो न भाई.

आयोग एक च्यवनप्राशः आयोग बैठने के नाम से, कितने कब्र में पाँव लटकाए अधिकारी उठ कर बैठ जाते हैं. जो बैठे रहते हैं, वे चलने लगते हैं. जो चलते हैं, वे दौड़ने लगते हैं. एक बार आयोग में घुसने पर उनकी बढ़ती उम्र मानो थम-सी जाती है.

आयोग एक रामबाणः प्रजातंत्र की व्याधि को भेदने, ज्वलंत मुद्दे की हवा निकालने, अप्रिय स्थिति को टालने, वर्तमान में सच्चाई से फिलहाल बचने, विपक्ष का मुँह बंद करने के लिए, बैठा दो आयोग. सब का उपचार हो जाएगा.

आयोग एक कछुआः कई आयोग देश में बैठे तो बैठे रह गए. कुछ हिम्मत करके चले, भले ही मंथर गति से, तो मंजिल तक नहीं पहुँचे. कुछ जैसे-तैसे पहुँचे, तो उनकी रपट को सरकार ने पढ़ा ही नहीं. कुछ रपटों को जैसे-तैसे सरकार ने पढ़ा, तो उन पर अमल किया नहीं. कुछ रपटों पर अमल करना चाहा, मगर रपट कुछ जमी नहीं. कुल मिलाकर अपनी मंथर गति से प्रजातंत्र को परिपक्व कर रहा है आयोग.

आयोग एक नावः जब-जब सरकार भँवर में होती है, तो वो आयोग नाम की नाव चलाती है. वो नाव अपनी रपट की पतवार से सरकार को सुविधाजनक स्थिति में खे कर ले आता है. क्योंकि जो रपट सरकार का बेड़ा पार लगाती है, उस रपट को मानने या न मानने की सुविधा सरकार के पास होती है.

आयोग एक चिमटाः सरकार जिससे पकड़कर सच को झाड़ कर उठाती है. नंगे हाथों से पकड़ेगी, तो उसके हाथ जलने का खतरा बना रहता है. कमबख्त, सच है ही ऐसी चीज! वो इस चिमटे से अपने चूल्हे की आग को दूसरे के चूल्हे में डाल सकती है. दूसरे चूल्हे की आग सेे अपना चूल्हा भी जला सकती है.

आयोग एक खेलः गंभीर मुद्दों पर खेला जाने वाला एक खुल्लम-खुल्ला खेल...जिसे सरकार और विपक्ष एक-दूसरे के साथ खेलते हैं. सत्तारूढ़ दल जब कोई आयोग गठित करता है, तो विपक्ष उस पर और उसकी रपट पर सवाल खड़े करता है. और वहीं विपक्ष जब सरकार में आती है, किसी आयोग का गठन करती है, तो विपक्ष जो कभी सरकार थी, वो आयोग और उसकी रपट पर सवाल उठाता है. आयोग-आयोग का खेल सरकार पक्ष-विपक्षी दल खेल-खेल में खेलते रहते हैं! मगर हाँ, संजीदा हो कर.

आयोग एक फुँकनी- सरकार जिससे जनता के करोड़ों रुपये, उस सच को जानने में फूँकती है, जिसे जनता पहले से एक दमड़ी खर्च किए बिना ही जानती और समझती है.

आयोग एक ड्रॉ टेस्ट मैचः जनता प्रतीक्षारत...देखें क्या परिणाम आता है! परिणाम आने पर ही तो पता चलेगा, कौन सही कौन गलत! अव्वल रिजल्ट आता नहीं. रिजल्ट आता भी है, तो पता चलता है कि सरकार ने उसे सार्वजनिक नहीं किया. अकसर परिणाम की ड्रॉ वाली नियति होती है.

आयोग एक अजीब-सी कशमकशः गठित करो तो मुसीबत, न करो तो मुसीबत. रपट आए तो भूचाल, न आए तो बवंडर. कार्यकाल बढ़ाओ, तो सवाल. समय से पहले भंग करो, तो बवाल. इनको अध्यक्ष बनाया, तो उधर स्यापा. उनको सदस्य बनाया, तो इधर शोर-शराबा. कुल मिलाकर आयोग सबको खुश न करने वाला, सबको कुछ न कुछ देने वाला कोई अजब-सा सरकारी शै है.

आयोग एक ठण्डा बस्ताः जिसमें तत्कालीन आक्रोश जो उबाल मारता है, को डाला जाता है. जब तक इसमें से कुछ निकलता है, तब तक सब कुछ जानने का जोश ठण्डा पड़ जाता है. क्या हुआ था! क्यों हुआ था! किसने किया था! कैसे किया था! जैसे सवाल ‘जो होना था, सो हो गया’ में बदल जाता है.

आयोग एक कब्जियतः जिसमें से बहुत कुछ नहीं, बहुत जोर लगाने पर कुछ निकलता है. मगर वह कुछ किसी को संतुष्टि नहीं देता.

आयोग एक क्रबिस्तानः जिसमें तात्कालिक मुद्दों को गाड़ा जाता है, ताकि समय आने पर उन गड़े मुर्दों का उखाड़ा जा सके.

आयोग एक पहलः जो शुरू तो होता है एक पहल के रूप में, मगर खत्म होता है एक पहेली बन.

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सम्पर्कः ई-5003, सेक्टर-12

राजाजीपुरम, लखनऊ, 226017

मोः 09956789394

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