बुधवार, 3 मई 2017

जीवन के अंतिम दिनों में गौतम बुद्ध / रमेशराज

सत्य और धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाने के लिये समाजिक अंधविश्वासों, मान्यताओं, रुढ़ियों, परम्पराओं का अनवरत विरोध करने वाले महात्मा बुद्ध अपने सुधारवादी, प्रगतिशील, कल्याणकारी दृष्टिकोण के कारण जितनी प्रसिद्ध और जन समर्थन प्राप्त करते गये, उनके शत्रुओं की संख्या भी निरंतर बढ़ती गयी। जिन लोगों की रोजी-रोटी या आर्थिक आय का स्त्रोत धर्म के नाम पर ठगी करना था, ऐसे वर्ग को गौतम बुद्ध की वे बातें रास ही कैसे आज सकती थीं, जिनके माध्यम से उनके धंधे पर सीधे प्रहार हो।

[ads-post]

बुद्ध जब ‘जैतवन’ नामक स्थान पर थे तो उनके कुछ शत्रुओं ने ‘सुन्दरी’ नामक बौद्ध भिक्षुणी को लालच में फंसाकर बुद्ध के खिलाफ एक षड्यंत्र रचा। बौद्ध भिक्षुणी से जगह-जगह प्रचार कराया गया कि उसके बुद्ध से अनैतक देह-सम्बन्ध हैं। जब यह समाचार बिम्बसार के महाराजा ने सुना तो उन्होंने अफवाह फैलाने वाले उन सभी को गिरतार कराया जो इस षड्यंत्र में शामिल थे। ये लोग चूंकि शराब के नशे में धुत्त थे, अतः थोड़ा-सा धमकाने पर ही अपने अपराध को कुबूल कर बैठे। अपनी इस करतूत पर उन्हें इतनी-आत्म ग्लानि हुई कि वे बुद्ध की शरण में गये और उनसे क्षमा मांगने लगे। निर्विकार चित्त और उदार प्रकृति के धनी महात्मा बुद्ध ने उन्हें क्षमा ही नहीं किया, संघ में शामिल होने की भी अनुमति दे दी।

लगभग एक हजार व्यक्तियों को क्रूर तरीके से मारकर उनकी अंगुलियां को काटकर गले में माला बनाकर पहनने वाले कुख्यात डाकू अंगुलिमाल जब बुद्ध को मारने के लिये उद्यत हुआ तो उन्होंने निर्भीक होकर उसे, उसके अपराध का एहसास कराया। अंगुलिमाल को अपने कुकृत्य पर पश्चाताप होने लगा। बुद्ध ने उसे सच्चे धर्म और कर्तव्य की शिक्षा दी और बुद्ध ने संघ में सम्मिलित कर लिया। आगे चलकर अंगुलिमाल बौद्ध धर्म का एक श्रेष्ठ प्रचारक बन गया।

वृद्ध-अशक्त गौतम बुद्ध जब मृत्यु-शैया पर थे तभी एक सुभद्र नाम का परिव्राजक अपनी धर्म संबंन्धी शंकाओं को लेकर उनके पास समाधान के लिये आया। अपनी अर्धचैतन्य अवस्था में ही गौतम बुद्ध ने उसकी शंकाओं का समाधान किया और उसे संघ में स्थान दिया। सुभद्र ही गौतम बुद्ध का अन्तिम शिष्य बना।

----------------------------------------------------------------

सम्पर्क-15/109, ईसानगर, अलीगढ़

मो-9634551630

1 blogger-facebook:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व हास्य दिवस - अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------