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रोमियो : धर्मराज के दरबार में / डॉ.प्रदीप उपाध्याय

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दृश्य-एक

“चित्रगुप्त, अभी हमारे नर्क के बन्दीगृह से कितने लोग रिहा होने वाले हैं। ”धर्मराज ने अपने सिंहासन पर विराजित होते हुए पूछा।

“भगवन, अभी रिहा होने वाले छः लोग हैं। धरती लोक पर इनकी बहुत ही ख्याति रही लेकिन इन्होंने बहुत से लोगों का दिल दुखाया और समाज के कायदे-कानून को नहीं माना। इसलिए इन्हें नर्क लोक में भेजा गया। ये छः लोग हैं-रांझा, महिवाल, कैस उर्फ मजनूं, फरहाद, मिर्जा और रोमियो। इनमें समस्या यह भी है कि मजनूं और रोमियो नाम के कई लोग हैं और वे भी रिहा होने वाले हैं, ”चित्रगुप्त के चेहरे पर चिन्ता की लकीरें साफ पढ़ी जा सकती थीं।

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“तब इसमें चिन्ता की क्या बात है और समस्या क्या है!” धर्मराज ने प्रतिप्रश्न किया।

“रोमियो और मजनू नाम से तो अलग-अलग समय पर लोग आते रहते हैं और समझ में नहीं आता कि इतने पैदा कैसे हो रहे हैं। समस्या यह भी है कि ये अकेले ही आ रहे हैं और इनकी जोड़ीदार भी नहीं मिल रही है। संभवतया ये पचास प्रतिशत इश्क वाले प्रेमी हैं! खैर, इन सभी की यातना शिविरों में सजा पूरी हो चुकी है और फिर अब नर्क लोक में जगह भी कम पड़ने लगी है। इनकी सजा पूरी हो चुकी है और कुछ के तो अच्छे चाल चलन के आधार पर समय पूर्व ही नया जीवन देकर मृत्यु लोक भेजना जरूरी हो गया है। ”चित्रगुप्त ने कहा।

“जिन लोगों की सजा पूर्ण हो चुकी है, उन्हें मेरे समक्ष पेश किया जाए। ”धर्मराज ने आदेश दिया।

चित्रगुप्त ने कहा-”भगवन, ये अलग-अलग धर्मों के लोग हैं। आदेश जारी कर अलग-अलग डिवीजन से उन्हें कॉल कर बुलवाना होगा। इसमें कुछ समय लग सकता है। ”

“ठीक है उन्हें अगले पन्द्रह दिवस में पेश किया जाए। ”धर्मराज ने निर्देश दिये।

दृश्य-दो

धर्मराज अपने सिंहासन पर विराजे हैं। चित्रगुप्त अपनी फाइलों को निकालकर धर्मराज से कहते हैं-”देव, आज सभी आपके निर्देशानुसार पेश हैं। आपके सामने रांझा, महिवाल, फरहाद, मिर्जा, कैफ उर्फ मजनूं और रोमियो खड़े हैं। इनके अलावा मजनूं और रोमियो नामधारी पन्द्रह -बीस ये दूसरे लोग भी हैं जिनकी सजा पूरी हो चुकी है। ”

धर्मराज ने सभी की ओर निहारते हुए कहा-”देखो वत्स, अब तुम सभी को तुम्हारे कर्मों की सजा मिल चुकी है। रांझा और महिवाल नर्क से, फरहाद, मिर्जा और कैस उर्फ मजनूं जहन्नुम से तथा रोमियो हैल से तुम्हारी मुक्ति हो गई है और अब तुम लोगों को वापस मृत्यु लोक जाकर अपना नया जीवन प्रारम्भ करना है। तुम लोग कुछ कहना चाहते हो तो कहो। ”

सभी समवेत स्वर में बोल उठे-”हुजूर, हमें तो कसूरवार ठहराकर नर्क के यातनागृह में भेज दिया गया और जिनके प्रेम में अंधे होकर हमने अपनी जिन्दगी खराब कर दी, वे तो सब स्वर्गलोक में आनन्द से रह रही हैं। क्या उन्हें भी वापस मृत्युलोक भेजेंगे!”

“नहीं वत्स, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो चुकी है तथा परमात्मा ने उनके लिए स्वर्ग के द्वार खोल दिए हैं। उन्हें कभी मृत्युलोक का मुख नहीं देखना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने निःस्वार्थ प्रेम किया है , उनका त्याग और बलिदान

अनुकरणीय है। अतः उन्हें अब फिर से जन्म लेकर धरतीलोक पर नहीं जाना होगा। ”धर्मराज ने कहा।

“लेकिन जनाब, हम सभी ने भी कुर्बानियाँ दी हैं किन्तु हमें ही कुसूरवार ठहराकर जहन्नुम में पटक दिया गया। यह कहाँ का इंसाफ है। ”मजनूं ने अपना आक्रोश व्यक्त किया।

रोमियो ने भी अपनी व्यथा बयान की-”ठीक है मी लार्ड, मैं तो शेक्सपियर के नाटक का एक पात्र ही था लेकिन एक काल्पनिक पात्र को नर्क के द्वार पर भेज देना कहाँ का इंसाफ है। ”

धर्मराज ने चित्रगुप्त की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा।

चित्रगुप्त कुछ सकपकाते हुए तत्काल ही बोल उठे-”भगवन, रोमियो का कथन गलत नहीं है लेकिन यह भी सही है कि शेक्सपीयर के नाटक से अभिप्रेरित होकर कई रोमियो पैदा हो गए और उन्होंने कमसिन बालाओं को जूलियट समझकर परेशान करना शुरू कर दिया, ये रास्ते चलते फिकरेबाजी करते हैं, सीटी बजाते हैं, छेड़खानी करते हैं। लड़कियाँ इन लोगों से त्रस्त हो जाती हैं। यह रोमियो भी उन्हीं में से एक है। अतः ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जा सकता। ”

दृश्य-तीन

धर्मराज ने आग्नेय नेत्रों से तथाकथित रोमियो की ओर देखा। रोमियो ने कांपते हुए कहा-”माय-बाप, हमें हमारे किये की सजा तो मिल ही चुकी है। हो सकता है कि जमाने की निगाह में प्रेम करना गुनाह हो लेकिन हमने निश्छल प्रेम किया था और हम बेगुनाह थे। जो सजा दी गई, अब उससे ज्यादा सजा भुगतना हमारे वश में नहीं है और हम मृत्युलोक भी वापस नहीं जाना चाहते। हमें तो यहीं किसी कोने में पड़ा रहने दो। आपके दरबार में ही किसी दरबारी या कारकून की जिम्मेदारी सौंप दें या फिर यमदूत की नौकरी पर ही रख लें किन्तु धरती लोक पर वापस ना भेजें। आप तो फिर भी दयालु हैं, न्यायप्रिय हैं। धरतीलोक पर कोई योगी हैं जिन्होंने अभी अभी सत्ता संभाली है। वे रोमियो के पीछे ही पड़ गए हैं। उन्हें हर कोई रोमियो ही दिखाई देता है और वे उसकी खाल उधेड़वाने पर तुले हुए हैं। उनकी पुलिस भी हर किसी को रोमियो घोषित करने में पीछे नहीं है। उनके रोमियो स्क्वाड से तो आप ही हमें बचा सकते हैं। हम पर दया करें। हम अब भूलकर भी मृत्युलोक यानि धरतीलोक पर जाना नहीं चाहते। योगी की देखादेखी अन्य भोगी भी योगी के पदचिन्हों पर चलते दिखाई दे रहे हैं। ”

रोमियो की बात का सभी ने मिलकर समर्थन किया और रहम-रहम बोलकर अनुनय-विनय करने लगे।

दृश्य-चार

धर्मराज सभी की बात सुनकर सोच में पड़ गए और चित्रगुप्त की ओर देखने लगे। चित्रगुप्त ने निहितार्थ समझा और बोले-"भगवन, घबराने की कोई बात नहीं है। धरती लोक पर ऐसी सैकड़ों मुहिम चलती रहती है और लोग भूल जाते हैं। ये मुहिम भी चलेगी और इसका हश्र भी वैसा ही होगा जैसा अन्य का होता आया है। आप तो इनकी रवानगी के आदेश प्रसारित कर दीजिये।

धर्मराज की चिन्ता दूर हो गयी थी और उन्होंने रोमियो और अन्य को धरती लोक पर भेजने की तैयारियों का जायजा लेना शुरू कर दिया था।

 

डॉ.प्रदीप उपाध्याय,

16, अम्बिका भवन, बाबुजी की कोठी, उपाध्याय नगर,

मेंढ़की रोड़,

देवास, म.प्र.

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