रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

लघुकथा / हिम्मत / डॉ.प्रदीप उपाध्याय

हम सभी लोग बाहर के बरामदे में बैठकर शोक-संतप्त परिवार को ढ़ांढ़स बंधा रहे थे। घर के मुखिया के अनन्त यात्रा पर जाने से वैसे तो घर -परिवार के सभी लोग दुखी थे लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि परिजन उनकी बीमारी से त्रस्त थे,वर्षों से बिस्तर जो उन्होंने पकड़ रखा था।

[ads-post]

शोक बैठक के लिए मिलने-जुलने वालों का तांता लगा हुआ था। समाज में उनके परिजनों की अच्छी चल-हल थी। मिलनसारिता होने से आने वालों का सतत प्रवाह बना हुआ था। जैसी कि परम्परा है ,औपचारिकता बातचीत में दुख जताते हुए कई लोग कह रहे थे कि अच्छा ही हुआ जो उन्हें मुक्ति मिल गई,बहुत कष्ट भोग रहे थे। परिजनों ने अच्छी सेवा की किन्तु बहुत ही कष्टपूर्ण  एवं त्रासदायी स्थिति थी। ईश्वर ने आखिरकार मुक्ति प्रदान कर दी। परिजन भी समझ रहे थे कि उनके मन की बात कही जा रही है।

उधर महिलाओं में भी इसी तरह की बातचीत चल रही थी लेकिन दिवंगत व्यक्ति की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें कुछ बुजुर्ग महिलाऐं सांत्वना देते हुए कह रही थीं कि अब आपको ही हिम्मत रखना है। इतना सुनना था कि उनके सब्र का बांध टूट गया और वे बोल पड़ी-”अभी तक हिम्मत तो बहुत थी ,जब तक वे जीवित थे ,भले ही बिस्तर पर थे ,पूरी हिम्मत से सभी चीज का सामना किया लेकिन अब हिम्मत पूरी तरह से टूट गई है।

हम उपस्थित जनों को  उनकी बात सुनकर वास्तव में इस बात का अहसास हुआ कि पति-पत्नी के सम्बन्धों में एक दूसरे के अन्योन्याश्रित रहते हुए ही हिम्मत रहती है। किसी एक के बिछोह से हिम्मत जवाब दे जाती है।

-------

डॉ.प्रदीप उपाध्याय,

16,अम्बिका भवन, बाबुजी की कोठी, उपाध्याय नगर,

मेंढ़की रोड़,देवास,म.प्र.

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget