रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

मातृ दिवस विशेष / मां तुझसे ही मेरा वजूद है / रवि श्रीवास्तव

 

अर्पणा बनर्जी की कलाकृति

मां एक शब्द ही नहीं है, इस शब्द में पूरा संसार समा सकता है. दुनिया में आने से पहले ही मां का प्यार मिलना शुरू हो जाता है. जब हम इस धरती पर अपना पहला कदम रखते हैं तब से मां हमें अपने सीने से लगाकर रखती हैं।

कुछ बड़े होने पर उंगली पकड़ कर चलाना सिखाती हैं. जब भी हम रोते हैं मां का आंचल हमेशा हमारे सिर पर होता है. मां ही हमारी पहली गुरू होती हैं. मां के बलिदान और त्याग की बात की जाए तो शब्दों में इसे बयां नहीं किया जा सकता.

अपने बेटे के लिए सारी खुशियों का त्याग कर एक मां ही होती हैं जो दु:ख झेलती रहती हैं. बचपन में ग़लतियों को लेकर जब पिता जी से डांट पड़ती तो मां ही अपने पीछे छिपाती. प्यार, दुलार करके समझाती . बेटा ये ग़लत कार्य है इसे मत किया करो

फिर अपने आंचल का सहारा देकर हमें कोई गीत या प्रेरणा दायक कहानी सुनाती हैं. जब भी हमें कोई ठोकर लगती है तो सबसे पहले मां शब्द ही निकलता है. माँ जिसको सिर्फ़ बोलने से ही हृदय में प्यार और ख़ुशी की लहर आ जाती है.  माँ क्या लिखूं तेरे बारे में तुझी से ही तो मेरा वजूद है. जन्म देने के बाद से बड़े प्यार से पाल पोश कर बड़ा करने वाली मां के क़र्ज को हम अपनी जिंदगी में नहीं उतार सकते हैं. मातृ दिवस को लेकर सोशल मीडिया में लोग शुभकामनाएं दे रहे हैं.

माता के लिए चंद शब्दों की लाइनें लिखते हैं. लेकिन क्या सिर्फ चंद लाइनों में मां का प्यार सिमट जाता है. आज हम मातृ दिवस पर शुभकामनाएं दे रहें हैं कल इस बात को भूल क्यों जाते हैं. जन्म देने वाली मां हमेशा हमारे लिए सहारा बनी रहती हैं तो हम उसके बुढ़ापे का सहारा बनने में आखिर क्यों कतराते हैं.

ऐसी बहुत सारी मां को देखा है जो अपने बेटों को देखने के लिए तड़पती बिलखती नज़र आती है, दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज रहती हैं लेकिन फिर भी अपने बच्चों की सलामती की दुआएं करती रहती हैं.मां तो मां ही होती हैं, चाहे अपनी हो या किसी और की.

आज कल के युवाओं में एक और बात देखी जाती है. अगर हम कहीं सफर कर रहें होते हैं तो देखते हैं सीट पर बैठने के लिए जगह नहीं होती और कोई महिला खड़ी होती है तो हम अपनी सीट भी उसे नहीं देते. आखिर क्यों क्या हमें सिर्फ अपनी मां का सम्मान करना चाहिए ? अगर ऐसा है तो फिर किस बात का के मातृ दिवस मनाते हैं हम. बस में या ट्रेन में खड़ी वो महिला भी किसी की मां होगी. हम ऐसा क्यों नहीं सोचते हैं? बेशर्मों की तरह सीट पर बैठे देखते रहते हैं.

अगर वह महिला आप की मां हो आप उसको स्थान दिलाने की भी कोशिश करते हैं. अगर आप का रिश्ता उनसे नहीं है तो खड़े रहो  मुझे क्या मतलब हैं. तो मातृ दिवस पर दिखावा क्यों ? चाहे किसी की मां हो अगर आप उसका सहारा बनते हो तो उसकी दुआएं आप को मिल ही जाती हैं. वह दुआ देते समय  फर्क नहीं करती कि ये मेरा बेटा नहीं है इसको कुछ और दुआ दो. भगवान ने भी मां शब्द को एक ही बनाया है. उसने ये नहीं कहा कि ये फलाने की मां ये ढ़माके की मां. उनसे मां को प्यार , त्याग , जैसे अटूट बंधनों से जोड़ा हैं. जिसका कोई मोल नहीं हैं.  न ही कभी हो सकता है.

रवि श्रीवास्तव

ravi21dec1987@gmail.com

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget