आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

एक ख़त / सवाई जांगिड़

रिचा गुप्ता की कलाकृति

अपने बचपन में मेरी कोशिश आसपास के संसार को समझने की थी। मैंने अथक प्रयास किया। लेकिन यह हो न सका।

तब मैंने एक ख़त लिखा ... क्या है यह दुनिया? लेकिन मैं वह ख़त पूरा नहीं लिख पाया। जब मैं वह ख़त लिख ही रहा था , तभी आँधी चली। जोर की आँधी। मेरा ख़त आँधी के साथ ऊपर उड़ता चला गया। मैं उसे ऊपर उड़ते हुए देखता रहा । मानों वह ख़त मुझसे कुछ कह रहा हो- "यह जो अपना देश है न ! यही दुनिया है। जहां लोग प्रेम करना जानते हैं। एक दूसरे के साथ हँसी-ख़ुशी रहते हैं।" यह बात मेरे मन में जैसे घर कर गयी थी। मुझे अंदर तक कहीं छू गयी थी। मेरी समझ में यह बात आ रही थी कि- जब तक अपने आस पास लोग हैं, तभी तक दुनिया हैं। ये हँसते-मुसकुराते लोग जब चले जाएंगे। रेत और धूल के कणों में मिल जाएंगे। कुछ भी तो नहीं बचेगा।


फिर मुझे ख्याल आया कि ये लोग मिट्टी के कणों में कैसे मिल जाएंगे?
फिर मैंने एक ख़त लिखा। मैं ख़त लिख ही रहा था कि यकायक बरसात शुरू हो गयी। कागज-अक्षर सभी पानी में गल गए। ख़त घुलता हुआ मिट्टी में मिल गया।
तब मुझे यकीन हुआ कि लोग इसी तरह जाने के बाद मिट्टी बन जाते हैं... धूल कणों में मिल जाती हैं।


बस यही दुनिया है जो यहीं के लोगों से मिलकर बनती है। लोग जाकर भी कहीं नहीं जाते। इस मुल्क की मिट्टी बन जाते हैं।


सवाई जांगिड़
गाँव-लोड़ता

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.