गुरुवार, 11 मई 2017

हाइकु रचनाएं / डा. सुरेन्द्र वर्मा

ताना मारते
खिलखिलाते फूल
बेशर्म गर्मी

पानी ग़ायब
ताल का, तालाब का
सूनी आँख का

तेज सूर्य का
सह न पाई धरा
दरारें पडीं

बंद कमरे
दोपहर खामोश
सर्वत्र मौन

अतृप्त मन
प्यासा ही लौट आया
गागर खाली


अंधेरी रात
ढूँढ़ती बिल्ली काली
जो है ही नहीं

भूखे को रोटी
नंगे तन कपड़ा
हरि श्रृंगार

रास्ते में खड़े
दरकिनार न हों
चाहते प्यार

आपकी बातें
थोड़ी सी हाँ, थोड़ा ना
भ्रमित मन


डा. सुरेन्द्र  वर्मा  / १०/१ सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१ (मो. ९६२१२२२७७८) 

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