आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

मराठी नाट्य-संगीत और दीनानाथ मंगेशकर --संजीव ठाकुर

image

सिने –जगत से पहले महाराष्ट्र में नाटकों की कई कंपनियाँ अस्तित्व में थीं जो जगह –जगह जाकर दर्शकों को नाटक दिखलाया करती थीं। इन नाटकों का एक प्रमुख आकर्षण संगीत हुआ करता था। सच कहें तो संगीत नाटकों में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका में होता था कि दर्शक उसी वजह से नाटकों की ओर खिंचे चले आते थे। जितने अच्छे गायक होते थे , दर्शक उतने ही आकर्षित होते थे। एक समय था जब केशवराम भोसले , बाल गंधर्व और मास्टर दीनानाथ जैसे लोग अपनी श्रेष्ठ गायकी के बल पर दर्शकों के दिलों पर राज किया करते थे। ये श्रेष्ठ गायक अभिनय भी किया करते थे। अपने गायन के बल पर अपने अभिनय को भी अविस्मरणीय बना देते थे। मराठी नाट्य –संगीत की सबसे बड़ी खासियत यह होती थी कि वह शास्त्रीय संगीत पर आधारित होता था , मंच पर गए जाने वाले सभी गीत किसी –न –किसी राग पर आधारित होते थे।

[ads-post]

यही वजह थी कि मंच पर गाने और अभिनय करने वाले कलाकार शास्त्रीय संगीत की पृष्ठभूमि वाले ही होते थे। मास्टर दीनानाथ यानी दीनानाथ मंगेशकर भी ऐसे ही गायक –अभिनेता थे। आज भले ही दीनानाथ मंगेशकर को लोग लता, आशा और हृदयनाथ मंगेशकर जैसे गायकों – संगीतकारों के पिता के रूप में जानते हों लेकिन एक समय था जब लोग उन्हें उनकी गायकी की वजह से जानते थे। बहुत कम उम्र से गायन शुरू कर देने वाले इस दिग्गज गायक को कुदरत ने करीब चालीस वर्ष का जीवन ही दिया था लेकिन इतने अल्प जीवन में भी उन्होंने कालजयी कार्य कर डाले थे। पहले किर्लोस्कर कम्पनी में गायक – अभिनेता के रूप में कार्य करने वाले दीनानाथ ने बाद में ‘बलवंत संगीत – मंडली’ बना ली थी और आगे ‘बलवंत पिक्चर्स’ के बैनर तले फिल्मी दुनिया में भी किस्मत की आजमाइश की थी। हालाँकि फिल्मी –दुनिया में उन्हें सफलता नहीं मिली थी लेकिन अपने नाट्य – संगीत की वजह से उन्होंने संगीत की दुनिया में अपना अमर स्थान तो बना ही लिया था।

समीक्ष्य पुस्तक दीनानाथ मंगेशकर के जीवन और कार्य को विस्तार से बताने का काम करती है। हालांकि इस किताब की लेखिका के रंगमंच के संदर्भ में दीनानाथ मंगेशकर के योगदान को रेखांकित करने वाले शोध –प्रबंध की ज्यादा सामग्री का उपयोग करने के कारण यह किताब दीनानाथ मंगेशकर की सहज जीवनी नहीं बन पाई है लेकिन दीनानाथ मंगेशकर के कार्य का विस्तृत लेखा –जोखा जरूर दे पाई है। पुस्तक के अंत में लता मंगेशकर , हृदयनाथ मंगेशकर और डॉ॰ प्रभाकर जठार के संस्मरणात्मक आलेख लेखिका की इस कमी को दूर कर देते हैं और दीनानाथ मंगेशकर के जीवन की बारीक बातों को बतला देते हैं।

इस किताब को पढ़कर यह जाना जा सकता है कि दीनानाथ मंगेशकर ने न केवल परंपरागत नाट्य-संगीत को अपनाया था ,बल्कि अपनी बहुमुखी प्रतिभा के बल पर नाट्य –संगीत में प्रयोग भी किए थे। मराठी –नाट्य संगीत में ग़ज़ल और कव्वाली शैली का गायन प्रस्तुत करने वाले वे पहले कलाकार थे तो रंगमंच पर कथक का प्रयोग करने के साथ –साथ पंजाबी ढंग के गाने गाने की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी। गायन पर उनका ऐसा असाधारण अधिकार था कि वे कहा करते थे –“फिलहाल रंगमंच पर जो आप सुन रहे हैं वह मेरा असली गाना नहीं है। मेरा असली गाना बिलकुल ही अलग ढंग का है। वह मैं आपको अवश्य सुनाऊँगा। आप मुझे सिर्फ तारीख बताइए। मैं पहुँच जाऊंगा अपने साज़िंदों के साथ। लेना –देना कुछ नहीं ,सिर्फ दाल-चावल का इंतजाम कीजिए, बस।‘’(पृ॰ 120)

इस किताब की लेखिका डॉ॰ वंदना रवीन्द्र घांगुर्डे ने दीनानाथ मंगेशकर के बहाने मराठी रंगमंच से भी पाठकों का परिचय करने का काम कर दिया है। किर्लोस्कर और बलवंत जैसी कंपनियों की पूरी गतिविधियों के साथ –साथ मराठी रंगमंच की काफी बातों की जानकारी इस किताब से पाई जा सकती है। दीनानाथ मंगेशकर द्वारा अभिनीत भूमिकाओं और उनके गायन के बारे में संपूर्ण जानकारी तो इससे पाई ही जा सकती है, उनके जीवन के कुछ ऐसे प्रसंग भी जगह –जगह पढ़ने को मिल जाते हैं जिनसे दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व और स्वभाव का पता चल जाए।

----

स्वर सम्राट दीनानाथ मंगेशकर

डॉ॰ वंदना घांगुर्डे

प्रभात प्रकाशन ,नई दिल्ली

400 रुपए

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.