मंगलवार, 27 जून 2017

विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 - संपादकीय

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म्पादकी

दीर्घ कलेवर की विज्ञान कथाएँ

फ्रेंच और अंग्रेजी भाषाओं में दीर्घ-वृत्त विज्ञान कथाएँ लिखी गईं हैं। हिन्‍दी में पं. अम्‍बिका दत्त व्‍यास की कथा ‘‘आश्‍चर्य वृत्तान्‍त’ जो हिन्‍दी की प्रथम विज्ञान कथा है, इसी श्रेणी में आती है। वैसे रूसी विज्ञान कथाकारों की लेखनी इस दिशा में चली है-पर हिन्‍दी में कुछ ही विज्ञान कथाएँ, विज्ञान फन्‍तासियाँ ही उपलब्‍ध हैं। इस अंक में संग्रहित ‘मदाम-आमू’’ इसी वर्ग की एक लम्‍बी कथा है, जिसके माध्‍यम से, इस रचना की पृष्‍ठभूमि की चर्चा

रोचक होगी, इस कारण यह तथ्‍य इस सम्‍पादकीय का अंश है। अपने हाइडिल वर्ग-जरमनी प्रवास काल में परिचय एक रोमानियन दम्‍पत्ति से हुआ था। इस कथा की नायिका की मूर्त प्रतिरूप से जो सहज प्रश्‍न, इन पंक्‍तियों के लेखक ने सामान्‍य औत्‍सुक्‍य वश पूछा था, उसकी धूमिल स्‍मृति आज भी मानस पटल पर अंकित है। उस दम्‍पत्ति को अंग्रेजी पर पूर्ण रूपेण अधिकार न होने के कारण मैंने जरमन भाषा में प्रथम बार पूछा था ‘‘जिन्‍दगी ज्‍वायगरिन?’’ ‘‘क्‍या आप जिप्‍सी हैं?’’ आश्‍चर्य मिश्रित भाव से उनकी पत्‍नी का त्‍वरित उत्तर था ‘‘नाइन! विर जिन्‍द रोमानियन’’

‘‘नहीं! हम रोमानियन हैं।’’ रोमा अथवा जिप्‍सी भारतीय मूल के वे जन हैं, जिनका इस देश से विसंक्रमण सिकन्‍दर के आक्रमण काल से प्रारम्‍भ हुआ था जो इस देश में इस्‍लाम के आगमन और उसके उपरान्‍त भी चलता रहा। उन्‍हीं रोमानियन महिला जो प्रथम भेंट में मुझे भारतीय उद्‌भव की लगी थीं, से रोमानिया के ग्रामीण अंचलों, उसकी पर्वत मालाओं, मैदानों, वनों और ग्रामीण हाटों की, उसमें विविध प्रकार के हाथों की सफाई दिखाने वाले लोगों की (संभवतः रोमा-जिप्‍सीजन), भविष्‍य वक्‍ताओं की और बग्‍गियों पर सामान लेकर एक हाट से दूसरे हाट तक जाने वाले व्‍यापारियों, जिनमें स्‍त्री-पुरूष दोनों सम्‍मिलित होते थे, के विवरण, कुछ कल्‍पना के साथ, मादाम आमू - जो उन रोमानियन महिला की प्रतिरूप थीं, में मिश्रित हैं। निःसंदेह उन रोमानियन, महिला के नयनों में एक विचित्र सा आकर्षण था।

अपने मिस्र की यात्रा की अवधि में इजिप्‍ट-मिस्र जाने के अवसर का लाभ पिरामिडों को देखने, वहाँ की विश्‍व चर्चित सरिता नील- जिसका नामकरण पुराकाल में - वहाँ गये, बसे भारतीयों के द्वारा किया गया था, में नौका विहार और उस विशाल गीजा के पिरामिड में चतुर्दिक फैली सिकता-राशि का मोहक आकर्षण, अरबिक नृत्‍य और ‘‘गहवे’’ - काफी की सुगन्‍धि की भाँति मानस में अंकित है। वहीं पर गाइड ने ‘‘आमेन-रा’’ के विषय में भी बताया था, पर तथ्‍य, फैजाबाद में अवकाश के क्षणों में अपने प्रिय विषय प्राचीन इतिहास पर जब शोध कार्य प्रारम्‍भ किया, उस समय और स्‍पष्‍ट हो गए। मिस्र का फराओ (सम्राट) आमेन हातेन 16 वर्ष की आयु में मिस्र का सम्राट बना था। वह मित्तानी उद्‌भव की एक रानी का पुत्र था। वास्‍तव में मित्तनीजन जो ईराक-सीरिया में पुराकाल में एक बृहत साम्राज्‍य के संस्‍थापक थे, भारतीय मूल के द्रुह्य एवं पुरुजनों के वंशज थे। यह वैदिक शाखा के जन सूर्य उपासक थे। आप सभी इस पौराणिक आख्‍यान से सम्‍भवतः परिचित होंगे कि इला के पुत्र पुरुरवा तथा नहुष आदि प्राचीन युग में देव पूजक अदिति के पुत्र आदित्‍य आदि, तथा असुर पूजक दिति के पुत्रा दैत्‍य और दनु के पुत्र दानव यह सभी महर्षि कश्‍यप की तीना पत्‍नियों के पुत्र थे और साथ-साथ रहा करते थे। इनके वैवाहिक संबंध भी प्रचलित थे।

यह एक ऐतिहासिक सत्‍य है कि ऋग्‍वेद वर्णित नृप ययति के तीन पुत्र द्रुह्यु, अनु एवं पुरु, दानवराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्‍ठा से तथा दूसरी पत्‍नी देवयानी, जो असुर गुरू शुक्राचार्य, जो ऋग्‍वेद में कवि उशना के नाम से स्‍मृत हैं, की पुत्री से दो पुत्र पदु एवं तुर्वसु उत्‍पन्‍न हुए। इन्‍हीं ऋग्‍वैदिक पंच-जनों में से भारत से सर्वप्रथम विसंक्रमित होने वाले द्रुह्यु जन थे जो गंधार से बढ़ते हुए आधुनिक तुर्की तथा समीपस्‍थ अन्‍य देशों के अधिपति हुए।

अब हम पुनः मिस्र के नृप आमेन हातेन की चर्चा पर आते हैं। यह मिस्री सम्राट अपनी मित्तानी माता की ही भाँति सूर्य का प्रबल उपासक था। इसने प्राचीन काल से मिस्र में प्रचलित पशु-पक्षियों की उपासना पर रोक लगाकर सूर्य की उपासना अपने नाम और संस्‍कृत सूर्यवाची शब्‍द रवि को जोड़ कर प्रचलित कर दिया। इस प्रकार मिस्री चित्रलिपि में-जो अपूर्ण उच्‍चारणों से युक्‍त थी-सूर्यवाची शब्‍द रवि ‘‘आमेन-रा’’ बन गया। मिस्र का उपास्‍य देव बन गया। संस्‍कृत भाषा में जो अन्‍तरिक्ष में गतिमान है विचरण करता है-वह रवि कहा जाता है। मदाम-आमू इसी ‘‘आमेन-रा’’ को याद करती है- उससे वरदान माँगती है। यह क्‍या होता है- कथा को पढ़कर स्‍पष्‍ट हो जायेगा। इसी प्रकार इस दीर्घ-कलेवर की कथा के पात्र वास्‍तविक थे उनके नाम-स्‍थान आदि बदल गये हैं। आशा है इस कथा का आनन्‍द आप लेंगे।

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