---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 / विज्ञान-कथा चांद की चोरी - -विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी

साझा करें:

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी की घटना है। उत्तरी भारत में करवा चौथ के त्यौहार को धूमधाम से मनाया जा रहा था। करवा चौथ को स्त्रियां व्...

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी की घटना है। उत्तरी भारत में करवा चौथ के त्यौहार को धूमधाम से मनाया जा रहा था। करवा चौथ को स्त्रियां व्रत रखती हैं तथा अपने पति के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की कामना करती हैं। रात्रि में चँद्रमा की पूजा-अर्चना के बाद व्रत पूर्ण होता है। उस दिन भी स्त्रियां सोलह शृंगार कर पूजा का समान सजा कर अपने घरों की छत पर चढ़कर चन्द्रोदय का इन्तजार कर रही थीं। कृष्णपक्ष की चतुर्थी होने के कारण उस दिन चन्द्रमा को 9 बजकर 12 मिनट पर उदित होना था। स्त्रियां 8 बजे से ही अपने घरों की छतों पर चढ़कर पूजा अर्चना की तैयारी करने लग गई थीं। बुजुर्ग महिलाएँ व्रत करने वाली महिलाओं को चौथमाता की कहानी सुना रही थीं। जो महिलाएँ कहानी सुन चुकी थी वे बातें कर के या पारम्परिक गीत गा कर चाँद के निकलने का इन्तजार कर रही थी। हरकौर भी छत पर परिवार की अन्य स्त्रियों के साथ चन्द्रोदय का इन्तजार कर रही थी। आज की करवा चौथ उसके लिए अब तक मनाई गई अन्य करवा चौथ से अलग थी। हरकौर का पति हरभान सिंह भारतीय वायुसेना का होनहार अधिकारी था। हरभान का चयन भारतीय प्रथम समानव चन्द्र अभियान दल के सदस्य के रूप में हुआ था। भारत इससे पूर्व कई मानव रहित चन्द्रयान भेजकर चन्द्र सतह के विषय में बहुत कुछ जानकारी जुटा चुका था। इस समानव अभियान का लक्ष्य चन्द्रमा पर प्रथम मानव बस्ती बसाने की विस्तृत योजना को अन्तिम रूप देना था।  इस अभियान दल का यान चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतर चुका था। चंद्रमा पर उतरने वाले प्रथम तीन भारतीयों में हरकौर का पति हरभान भी था। ?

हरकौर की सहेलियाँ हरकौर से मजाक करते हुए कह रही थी कि आज तो तेरे लिए विशेष चन्द्रोदय होगा। चन्द्रमा के साथ-साथ तेरे साहब भी चाँद पर टहलते हुए नजर आएंगे। हरकौर सहेलियों की बातें सुनते हुए गर्व अनुभव कर रही थी। वह मन ही मन भारतीय अभियान के सफल होने तथा हरभान सिंह के सकुशल लौट आने की कामना कर रही थी। पूर्व का आकाश एकदम साफ था। व्रत करने वाली सभी महिलाएँ तथा उनके परिवारजन इस बात के लिए निश्चिन्त थे कि समय पर चन्द्र दर्शन हो जाएगा। सभी महिलाएँ समय पर पूजा अर्चना कर अपना व्रत पूरा कर सकेंगी। ज्यों-ज्यों चन्द्रोदय का समय समीप आ रहा था सभी की नजरें पूर्व दिशा की ओर केन्द्रित होती जा रही थी। समय होने के बाद भी चन्द्रोदय नहीं हुआ। बहुत इन्तजार करने पर भी चन्द्रमा के दर्शन नहीं हुए तो लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी। कुछ लोग पंचांग वालों की लापरवाही पर झल्ला रहे थे कि समय की गणना ठीक से नहीं करते। कुछ विनोदी स्वभाव के लोग यह कह कर चुटकी ले रहे थे कि नेताओं के लिए तो मशहूर है कि बहुत इंतजार कराने के बाद वे अपने प्रशंसकों के मध्य पहुंचते हैं मगर चन्दामामा को यह बीमारी कब से हो गई। हरकौर के लिए यह चन्द्रोदय बहुत महत्त्व रखता था। चन्द्रोदय में हो रही देरी के साथ उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी। साथ ही वह अपने मन को समझा रही थी कि चाँद को क्या होना है वह तो दुनिया के किसी न किसी भाग में तो चमक ही रहा होगा। आज ही तो सुबह उसने अन्तरिक्ष अनुसंधान केन्द्र के माध्यम से अपने पति से फोन पर बात की थी। कितना खुश था हरभान अपनी उपलब्धि से। बता रहा था कि चन्द्रमा से देखने पर पृथ्वी भी चन्द्रमा की तरह दिखाई दे रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि चरखा कातती हुई बुढ़िया की जगह मुस्कुराती हुई हरकौर दिखाई दे रही है।

इन्तजार करते-करते 10 बज गए। लोगों के धैर्य की सीमा समाप्त होने लगी थी। वैसे भारतीयों के कई त्यौहार वर्षा में आते हैं जब महिलाओं को चन्द्रदर्शन के बाद व्रत खोलना होता है। आकाश में बादलों की उपस्थिति के कारण चन्द्र दर्शन आसानी से नहीं हो पाता है तथा व्रतधारी महिलाएँ भूखी प्यासी रह कर चन्द्र दर्शन का इन्तजार करती रहती हैं। उस दिन पूर्व दिशा तो क्या सम्पूर्ण आकाश में बादल का कहीं नामोनिशान नहीं था। ऐसे में चन्द्रमा का नहीं दिखाई देना सभी के लिए कौतूहल का विषय बन गया था। हरकौर सोच रही थी कि उसने तो अपने व्रत में कोई कमी नहीं की फिर चौथ माता उसकी परीक्षा क्यों ले रही है? इतने में कोई खबर लाया कि टीवी पर समाचार आ रहा है कि पृथ्वी का एक मात्रा प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा पृथ्वी की कक्षा से अचानक हो गायब है। इस समाचार पर यकायक किसी को विश्वास नहीं हुआ। लोग छतों से उतर कर लोग टेलीविजन के सामने एकत्रित होने लगे थे। कुछ टेलीविजन चैनलों ने व्रतधारी महिलाओं को चन्द्रमा के दर्शन टेलीविजन के पर्दे पर कराने की तैयारी कर रखी थी। चन्द्रमा के समय पर नहीं दिखने के कारण समाचार का एक अत्यधिक रोमांचक मुद्दा मिल गया था। वे चैनल अन्तरिक्ष वैज्ञानिकों के हवाले से चन्द्रमा के पृथ्वी की कक्षा में नहीं होने का समाचार प्रसारित कर रहे थे। यह सब क्यों और कैसे हुआ इस विषय में कोई भी कुछ नहीं बता पा रहा था। हरभान के परिवार वालों ने घबराकर भारतीय चन्द्र अभियान नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क किया तो वहाँ केवल इतना ही बताया गया कि चन्द्रयान से उनका सम्पर्क उस समय नहीं हो पा रहा था। कुछ ही समय में पूरे विश्व का ध्यान उस अनहोनी घटना की ओर आकर्षित हो गया था। लोग चन्द्रमा के विषय में अधिक से अधिक जानने को उत्सुक हो चुके थे। नई जानकारी जुटाने के लिए बार बार चैनल बदल रहे थे। लोगों में घबराहट नहीं फैल जावे, इस हेतु धैर्य बनाए रखने की सलाह सरकारों व वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही थी। इसके बावजूद कई लोगों को दिल का दौरा पड़ चुका था। हरभान की पत्नी

भी बेहोश हो चुकी थी। दिन गुजर रहे थे मगर किसी को कुछ पता नहीं चल पा रहा था कि चंद्रमा का क्या हुआ? पांचवें दिन नासा ने घोषणा की कि उनका सम्पर्क भारतीय चन्द्रयान से हुआ है तथा अभियान के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। इस समाचार से भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में खुशी की लहर दौड़ गई थी। सभी यह जानने को उत्सुक थे कि भारतीय अन्तरिक्ष यात्री कहाँ है? चन्द्रमा कहाँ है? कुछ घंटों बाद भारतीय वैज्ञानिकों का सम्पर्क भी चन्द्रयान से हो गया। चन्द्रयान के यात्रियों ने जो बताया वह और भी विस्मयकारी था। उन्होंने बताया कि वे चन्द्रमा की सतह पर ही है मगर चन्द्रयान में कैद है। उन्हें लग रहा था कि किसी ने उनके यान के नियंत्रण को बलात अपने कब्जे में कर लिया है। उसी के कारण उनका सम्पर्क सभी से कट गया था। अब वे पृथ्वीवासियों से सम्पर्क कर पा रहे हैं तो शायद उस अदृश्य शक्ति की इच्छा से ही सम्भव हो पा रहा हैं। जब उन्हें यह बताया गया कि चन्द्रमा पृथ्वी से दिखाई नहीं दे रहा है तो वे चिन्तित हो गए। वे कुछ और बता पाते तभी सम्पर्क कट गया। सम्भावना यह भी थी कि किसी ने सोद्देश्य सम्बन्ध काट दिया था। हरपाल के सुरक्षित होने के समाचार से हरकौर को कुछ राहत मिली। वह होश में आ गई थी मगर उसने चन्द्रमा दिखने या हरपाल के घर लौटने तक व्रत खोलने से मना कर दिया था। चिकित्सक ग्लूकोज व औषधियों के बल पर उसके स्वास्थ्य को सुधारने का प्रयास कर रहे थे। हरकौर के कारण करवा चौथ के व्रत की ओर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई थी। टेलीविजन चैनल चौथमाता के सम्बन्ध में कई कहानियां विभिन्न अंचलों से निकाल कर कई कई बार प्रसारित कर चुके थे। चौथमाता के भजनों के ऑडियो-वीडियो कार्यक्रमों का सैलाब आ चुका था मगर चन्द्रयान की गुत्थी अभी भी ज्यों की त्यों उलझी हुई थी।

एक दिन फिर अचानक चन्द्रयान से भारतीय अन्तरिक्ष नियंत्रण केन्द्र का सम्पर्क हो गया। दल के सदस्यों से टुकड़ों टुकड़ों में जानकारी प्राप्त होने लगी। इस जानकारी से चांद की चोरी के रहस्य पर से पर्दा धीरे धीरे करके उठने लगा। जो जानकारी प्राप्त हो रही थी उसका सार यह था कि चन्द्रमा को पृथ्वी की कक्षा से हटा कर मंगल व बृहस्पति ग्रहों के बीच क्षुद्रग्रह पट्टिका में कुछ बाहर स्थापित कर दिया गया था। पृथ्वी भी बुद्ध व शुक्र की तरह प्राकृतिक उपग्रह विहीन ग्रहों की सूची सम्मिलित हो गई थी। चन्द्रमा को पृथ्वी की कक्षा से निकाल इतनी दूरी पर ले जाने वाले जीव कुम्भ राशि में स्थित शतमिषा नक्षत्र क्षेत्र के निकासी हैं। देखने में वे जीव कैसे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई क्योंकि कोई भी एलियन भारतीय दल के सामने नहीं आया था। वे चन्द्रयान के कम्प्यूटर की स्क्रीन पर ही सांकेतिक आदेश निर्देश दे रहे थे।

चन्द्र अभियान दल के सदस्यों ने बताया कि करवा चौथ की रात (भारतीय समयानुसार) वे अपने यान से निकल कर चन्द्रतल पर विचरण की तैयारी कर रहे थे कि मानीटर क्रमांक 4 पर उभरे दृश्य ने उनके होश उड़ा दिए। उन्होंने देखा कि एक साथ सैकड़ों अन्तरिक्ष यान चन्द्रमा की ओर बढ़ रहे हैं। सभी ने ये अनुमान लगाया कि किसी पृथ्वी बाह्य सभ्यता के प्राणियों ने उन पर हमला पर दिया है। अभियान दल के सभी सदस्य भय से कांपने लगे थे। एक दो ने हिम्मत कर पृथ्वी स्थित नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने का प्रयास किया तो देखा कि संचार प्रणाली ठप्प है। इस पीड़ादायक दृश्य को चन्द्र अभियान दल के सदस्य अधिक देर तक नहीं देख पाए। यह भय का प्रभाव था या हमलावर प्राणियों द्वारा की कोई क्रिया कि देखते ही देखते अभियान दल के सभी सदस्य बेहोश हो गए। जब तन्द्रा टूटी तो संपूर्ण परिदृश्य बदल चुका था। दल के सभी सदस्य अपने आप को जिन्दा पाकर रोमांचित थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि जो दृश्य उनकी स्मृतियों में अंकित था वो सच था या सपना। मगर इतने लोग एक साथ एक ही सपना तो नहीं देख सकते थे। हमलावरों की तरह आए सैकड़ों यान किसके थे? उनका उद्देश्य क्या था? जैसे कई प्रश्न उसके मस्तिष्क को बार-बार बींध रहे थे। यदि वे पृथ्वी के दुश्मन थे तो उन्होंने चन्द्र अभियान दल के सदस्यों को हानि क्यों नहीं पहुँचाई? दल के सभी सदस्य और उनका यान सुरक्षित थे। वे अभी भी चन्द्रमा की सतह पर अपने यान में ही थे। मगर चन्द्रमा के समीप के आकाश की स्थिति पूर्णतः बदल गई थी। पृथ्वी उन्हें नजर नहीं आ रही थी। कुछ समय बाद ही चन्द्र अभियान दल को अज्ञात एलियनों से सांकेतिक भाषा में संदेश मिलने लगे, घबराओ नहीं, पृथ्वी के बहादुर प्रतिनिधियों। तुम हमें नहीं जानते मगर हम तुम्हारी सभी गतिविधियों से परिचित हैं। हमने तुम्हें अपनी उपस्थिति का आभास अभी तक नहीं होने होने दिया किन्तु अब आवश्यक हो गया है कि हस्तक्षेप किया जावे।

हमें मालूम है कि तुम्हारी चन्द्र योजना का उद्देश्य चन्द्रमा को अन्तरिक्ष स्टेशन बना कर बाह्य अन्तरिक्ष में मानव सभ्यता का प्रसार करना है। इसमें कोई बुराई नहीं है। हम भी शतभिषा नक्षत्र से पुष्य नक्षत्र तक की यात्रा करते रहते हैं। इस मार्ग पर अनेक उपग्रहों पर अपनी बस्तियां भी बसा रखी हैं। इस मार्ग पर यात्रा करते हुए हम पृथ्वी वासियों की टोह लेते रहते हैं। अन्तरिक्ष विचरण में पृथ्वी वासियों द्वारा की गई प्रगति से हम प्रभावित हैं। मगर मानव के व्यवहार से हम खिन्न हैं। आप लोगों ने पृथ्वी के वातावरण को इतना दूषित कर दिया है कि आप लोगों के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न लगने लगा है। इसी कारण आप पृथ्वी से पलायन करने की योजना बना रहे हैं। हमारा मानना है कि मानव अभी अन्तरिक्ष में अन्यत्र बसने योग्य नहीं हुआ है। अतः हमने मानव के अन्तरिक्ष अभियान को बाधित किया है। हमने ही पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा को पृथ्वी की कक्षा से उठा कर बृहस्पति की कक्षा में स्थापित कर दिया है। अब आपके लिए अन्तरिक्ष में बसना आसान नहीं होगा। चन्द्रयान के यात्रियों घबराओ नहीं, यदि पृथ्वीवासी तुम्हें यहां से ले जाने में असमर्थ रहते हैं तो हम तुम्हें पृथ्वी पर छोड़ आएंगे। चांद की चोरी ने सम्पूर्ण विश्व में भय का वातावरण बना दिया था। कोई भी देश अपने अन्तरिक्ष यान को बृहस्पति की कक्षा तक तक भेजने को तैयार नहीं था। भारत भी इस स्थिति में नहीं था कि अचानक उपस्थित हुए इस संकट का समाधान निकाल सके। सरकार की ओर से कोई कुछ भी कहने को तैयार नहीं था। मगर हरकौर को हरभजन का अधिक इन्तजार नहीं करना पड़ा। एक दिन हरभजन अचानक घर लौट आया। यह कैसे सम्भव हुआ यह हरभजन भी नहीं बता सका।  हरकौर पूर्ण विश्वास के साथ कहती है कि चौथ माता ने ही उसके सुहाग को सकुशल लौटाया है।

image

ई-मेल ः vishnuprasadchaturvedi20@gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
  1. बढ़िया कहानी। हमे ये बात तो पता है कि चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण का असर ज्वार भाटे पर पड़ता है। अगर इस कहानी में चाँद के गायब होने से उस पर जो असर पड़ता वो दर्शाया जाता तो कहानी और रोचक और यथार्थ के करीब महसूस होती। अच्छी कहानी। विष्णु जी का आभार।

    उत्तर देंहटाएं

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3859,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2809,कहानी,2134,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,859,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,21,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,658,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,60,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,185,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 / विज्ञान-कथा चांद की चोरी - -विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी
विज्ञान-कथा : जुलाई-सितंबर 2017 / विज्ञान-कथा चांद की चोरी - -विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी
https://lh3.googleusercontent.com/-ZnzfPf4U2J0/WVIOfqAes5I/AAAAAAAA5Lo/2Fi_pP1rvig_UahJroNvsCglpNsMwjPzACHMYCw/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-ZnzfPf4U2J0/WVIOfqAes5I/AAAAAAAA5Lo/2Fi_pP1rvig_UahJroNvsCglpNsMwjPzACHMYCw/s72-c/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2017/06/2017_56.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/06/2017_56.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ