बुधवार, 7 जून 2017

आतंकवाद विरोध दिवस 21 मई–वक्तव्य और काव्यपाठ

*आतंकवाद का हर तरह से विरोध होना चाहिए*

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     नारायणी साहित्य अकादमी द्वारा आतंकवाद विरोध दिवस 21 मई के दिन स्थानीय जैतु साव मठ पुरानी बस्ती,रायपुर    में वक्तव्य एवं काव्य समागम का आयोजन किया गया।
       अकादमी की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. श्रीमती मृणालिका ओझा ने बताया  कि इस अवसर पर उपस्थित समस्त साहित्यकारों ने सर्वप्रथम आतंकवाद के शिकार हुए लोगों के प्रति  सम्वेदनाएँ प्रकट की  एवं आतंकवाद का हर सम्भव तरीके से विरोध करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री की नृशंस हत्या होने के कारण इस दिन को आतंकवाद विरोध दिवस के रूप में मनाया जाता है । आतंकवाद केवल समाज और देश को तोड़ने का काम करता है अतः इसका विरोध हर समय और हर जगह होना चाहिए।

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    कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात उर्दू  गज़लकार श्री गौहर जमाली ने की और विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ी के प्रख्यात कवि श्री चेतन भारती ने की। कार्यक्रम के मुख्य आतिथ्य श्री तुहिन देव, निदेशक, स्टेट रिसोर्स सेंटर ने स्वीकार किया ।
   कार्यक्रम में शहर के युवा कवि श्री अभिनव झा ने मातृशक्ति पर अपनी कविता प्रस्तुत की।  श्रीमती जयश्री शर्मा ने नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि  "देश सिकुड़ रहा है, हम श्रद्धांजलि दे रहे हैं "।
   आसुकवि के नाम से विख्यात श्री गोपाल सोलंकी ने कहा कि "दंडकारण्य में नक्सलवाद अब जड से मिटाना है, बस्तर की लाल मिट्टी में, फिर से हरियाली लाना है ।
   वरिष्ठ इतिहासकार एवं साहित्यकार  डॉ. रामकुमार बेहार ने अपनी कविता " दरिन्दों की कोई बस्ती नहीं होती, दरिन्दों की कोई हस्ती नहीं होती । जियो और जीने दो, यही हमारा मंत्र, भूलो मत असीम शक्ति का है तंत्र" प्रस्तुत की।


   नन्ही कवि कुमारी ओज शर्मा ने आतंकवाद के कारण अपमानित होती  अपनी जन्मभूमि के लिए अपनी बात कहीं "  अंजान ओज हूँ कहती सबसे, इस माता का मान करें हम, इसका ही अभिमान करें हम, इसके हित इसके चरणों में, अपना हित बलिदान करें हम। संस्था की जिलाध्यक्ष एवं डेफोडिल स्कूल प्राचार्या श्रीमती आशा विग ने आतंकवाद का चित्रण " एक मासूम दौड़कर आया, मुझे देख थोड़ा घबराया, चिथड़े कपडे उलझे बाल, रोकर उसका बूरा हाल, हाथ पकड़कर किया इशारा, कुछ मंजर उस पार था सारा"।


      कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री तुहिन देव ने आतंकवाद पर विस्तार से अपनी बात कही। उन्होंने आतंकवाद को धर्म व जाति  से जोड़ने को गलत बताया । उन्होंने विभिन्न स्थितियों का आकलन करते हुए आतंकवाद के परिप्रेक्ष्य में उचित पहल की बात कही और कहा कि यह इंसानियत का सबसे बडा दुश्मन है।


   कवयित्री शिवानी मोइत्रा ने " खून की बहती नदियाँ, उजाड रही है जीवन, ईंसा बन गया है, ईंसा का दुश्मन।
कार्यक्रम में ईरा पंत, कमल बाजपेयी, संजीव ठाकुर, दिलीप झा, जे.पी.डागर, के.पी. सक्सेना दूसरे  आदि ने भी अपनी कविताएँ प्रस्तुत की।
   कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मृणालिका ओझा एवं धन्यवाद ज्ञापन राजेंद्र ओझा ने किया ।

डॉ. श्रीमती मृणालिका ओझा
छत्तीसगढ की लोककथाओं का अनुशीलन विषय पर डाक्टरेट।
पहाड़ी तालाब के सामने
बंजारी मंदिर के पास
कुशालपुर
रायपुर 

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