मंगलवार, 6 जून 2017

व्यंग्य की जुगलबंदी-36–मानहानि / अनूप शुक्ल

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(चित्र – साभार समीर लाल - उड़नतश्तरी)

व्यंग्य की जुगलबंदी -36 में अभी तक 11 साथियों ने लेख लिखे। समीरलाल उर्फ़ Udan Tashtari ने दो बार ’मानहानि’ की। इसलिये लेख बन गये 12 अब जब Shefali Pandeलिख लेंगी तब लेखक और लेख क्रमश: 12 और 13 हो जायेंगे ।

अभी तक के लेखों से जो पंच/,मजेदार वाक्य हमको नजर आये वे इधर मुलाहिजा फ़र्मायें। मजेदार बात यह कि हमारे और Anil Upadhyay के कुछ वाक्य एक जैसी भावना के निकले। हमने इसी बहाने अपन को भी महान समझ लिया क्योंकि महान लोग ही एक जैसा सोचते हैं।

Kamlesh Pandey के पंच सबसे ज्यादा निकले। मन करता है कि उनको इस बार की जुगलबंदी का ’पंचटॉपर’ चुन लिया जाये। लेकिन बिहार के टॉपरों की गति देखकर हमने इरादा त्याग दिया।

ताऊ रामपुरिया ने खुद घर के लोगों पर मानहानि का उपाय सुझाया है। खतरनाक है ।

देखिये कुछ पंच यहां पेश हैं:

1. इस संसार की समस्त गतिविधियाँ मानहानि संचालित हैं I Anil Upadhyay

2. नेता अगर भ्रष्टाचार नहीं करेगा तो बचेगा नहीं I Anil Upadhyay

3. आजकल सभ्य आदमी को नेता बता दो तो उसे लगता है कि आपने उसे गाली दी है।Arvind Tiwari

4. हमारे शहर का रिक्शेवाला रोज गालियाँ खाता है,पर मानहानि का केस नहीं कर पाता।जबसे उसने सुना है कि जेटली साहब ने एक गाली के दस करोड़ मांगे हैं,तब से वह बेचैन है।उसे रोज गालियाँ मिलती हैं,पर वह पांच सौ का हर्जाना भी नहीं मांग सकता। Arvind Tiwari

5. रेडियो पर सुने पर विश्वास करना सीखो..वे वहीं से बोलते हैं. हमारे यहाँ उनसे हिसाब मांगना पाप माना जाता है..यह धर्म के खिलाफ है. Udan Tashtari

6. राजनीती में मान और मानहानि एकहि साथ फर्राटा मारते हैं! ALok Khare

7. बेशर्मी एक तरह का एंटी वायरस टूल है जो मानहानि टाइप के मालवेयर को दूर से देखते ही फ़िल्टर कर देता है ALok Khare

8. अगर आपने बेशर्मी का चोला ओढ़ रखा है तो मानहानी आपका कुछ नही बिगाड़ सकती ALok Khare

9. बचपन से अब तक हुए मेरे मान की हानि के हर्जाने का हिसाब लगाने का काम करवा लूँ किसी अच्छे सी ए को खोज कर, बिना पूछे लड़कियों के काँधे पर घर-परिवार ,समाज ,गांव,तक के मान के रखवाली का जिम्मा जबरन थोपने के लिए …... सी ए से बेहतर कोई नेता ही हायर क्यों न कर लूं हजार नहीं तो सौ नहीं तो दस करोड़ तो मिल ही सकते हैं, क्या ख़याल है ? अर्चना चावजी

10. व्यापार में हुये लॉस को निगेटिव प्राफिट भी कहते हैं, वैसे ही मानहानि को आपमान में वॄद्धि भी कह सकते हैं. लेकिन नेताओं को पब्लिक में यह कहना अच्छा नहीं लगता, इस हेतु मानहानि को जुमले के तौर पर इस्तेमाल किये जाने का फैशन है. Udan Tashtari

11. व्यंग्य के हर पंच पर किसी न किसी की मानहानि ही की जाती है , ये और बात है कि सामने वाला उसका नोटिस लेता है या नही , और व्यंगकार को मानहानि का नोटिस भेजता है या नही . Vivek Ranjan Shrivastava

12. सार्वजनिक जीवन में स्वयं को बहुचर्चित व अति लोकप्रिय होने का भ्रम पाले हुये किसी शख्सियत को जब कोई सीधे ही मुंह पर कालिख मल जाये तो तुरंत डैमेज कंट्रोल में , बतौर फेसवाश मानहानि का मुकदमा किया जाता है . Vivek Ranjan Shrivastava

13. लोक जीवन में देख लेने की धमकी ,धौंस जमाकर निकल लेना आदि मानहानि के मुकदमें से बचने के सरल उपाय हैं .@Vivek Ranjan Shrivastava

14. शिकायतें होती रहें, इसी में शिकायतकर्ता से लेकर हम सब का लाभ है..!” विनय कुमार तिवारी

15. सभी आरोप आपके प्रतिद्वंद्वियों की साजिश होते हैं Kamlesh Pandey

16. जैसे-जैसे आप अपनी राजनितिक और आर्थिक हैसियत में ऊपर उठते गए, आपका मान वापस लौटने लगा. हमाम में चाहे आप नंगे ही पड़े रहते हों, पर सार्वजनिक तौर पर माननीय हो चले. Kamlesh Pandey

17. मानहानि पैसों में ही तुलती है क्योंकि आपने ये सारा मान ज़्यादातर पैसों से ही खरीदा है. Kamlesh Pandey

18. हानि-लाभ और यश–अपयश विधि अर्थात क़ानून के हाथ में होते हैं. अतः अपने यश या मान की हानि का मामला एक बार कोर्ट के हाथों में सौंप देने के बाद आप निश्चिन्त हो जाते हैं. Kamlesh Pandey

19. क़ानून अपने लम्बे हाथों से लम्बे समय तक काम करता है. तब तक बेचारे आरोप और कई मामलों में आरोपी भी ठंढे पड़ जाते हैं. Kamlesh Pandey

20. अपने देश में ऐसा है कि बच्चा पैदा होते ही अपने साथ एक अदद मानहानि साथ लेकर आता है. Ravishankar Shrivastava

21. भारत में आदमी आदमी से मिलता है तो प्रकटतः भले ही मौसम की बात करे, पर उसके मुंह में एक अदृश्य प्रश्न सबसे पहले तैरता है – कौन जात हो? Ravishankar Shrivastava

22. लेखक-पाठक के बीच भी मानहानि का परस्पर सीधा सच्चा संबंध है. खासकर हिंदी लेखकों-पाठकों का. मुझे मिलाकर (मुझमें कोई सुर्खाब के पर नहीं लगे हैं इसकी तसदीक मैंने भली प्रकार से कर ली है!) अधिकांश हिंदी लेखक टेबल-राइटिंग के शिकार हैं और वो जो भी घोर-अपठनीय लिखते-प्रकाशित करते हैं, उसका सीधा अर्थ होता है – पाठकीय मानहानि. Ravishankar Shrivastava

23. मानहानि का मुकदमा ही लगाना है तो घर के किसी सदस्य पर लगावो, उसकी वसूली पक्की है। Taau Rampuria

24. दुनिया में जित्ती भी बड़े काम हुये सबमें मानहानि का योगदान है। अनूप शुक्ल

25. मानहानि जो है न वह लक्ष्मी की तरह चंचला होती है। कब किस रूप में हो जाये पता नहीं चलता। अनूप शुक्ल

26. मानहानि महसूस होने पर होती है। मानो तो मानहानि। वर्ना आम बात। अनूप शुक्ल

पूरे लेख बांचने के लिये इधर पहुंचिये:

1. https://www.facebook.com/137.anil/posts/10213253452592974 Anil Upadhyay

2. https://www.facebook.com/permalink.php… Arvind Tiwari

3. https://www.facebook.com/udantashtari/posts/10155070297636928Udan Tashtari

4. https://www.facebook.com/alok.khare3/posts/10210800576465444 ALok Khare

5. https://www.facebook.com/archana.ch…/posts/10209577635579964अर्चना चावजी

6. https://www.facebook.com/udantashtari/posts/10155064361031928Udan Tashtari

7. https://www.facebook.com/vivek1959/posts/10209607848448158 Vivek Ranjan Shrivastava

8. https://www.facebook.com/vinaykumartiwari31/posts/1296653600452596विनय कुमार तिवारी

9. https://www.facebook.com/kamleshpande/posts/10209654659143246Kamlesh Pandey

10. http://raviratlami.blogspot.in/2017/05/36.html Ravishankar Shrivastava

11. https://www.facebook.com/taau.rampuria/posts/10212901156434795Taau Rampuria

12. https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10211556264675688अनूप शुक्ल

इस जुगलबंदी में फ़िलहाल इतना ही। अगली जुगलबंदी के लिये इंतजार कीजिये।

बताइयेगा कैसी लगी यह जुगलबंदी?

अपडेट: इसीक्रम में Suresh Kant जी लेख से कुछ पंच:

1. चूंकि देश में अन्य सभी चीजों की तरह मान भी नेताओं ने ही सबसे ज्यादा पाया और खोया, अत: मान की हानि होने का खौफ़ भी उन्हें ही सबसे ज्यादा सताता है।

2. मान जाओ नेताओं वरना तुम्हारे मान की जनता ऐसी हानि करेगी कि सारा मान-सम्मान भूल जाओगे।

लेख यहां पहुंचकर बांच सकते हैं:
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1981233122104966&set=p.1981233122104966&type=3&theater

एक और अपडेट:

Kamlesh Pandey के पंच ’बिना शीर्षक’ वाली जुगलबंदी के थे। इधर लग गये। अब सही कर दिया मामला। ये तो कहो शनिवार को अदालतें बंद हो गयी हो गयी होंगी वर्ना क्या पता ठोंक देते मुकदमा मानहानि का। खैर पुराने पंच भी यहां रहने देते हैं लिंक यह रहा

https://www.facebook.com/kamleshpande/posts/10209601738060252

1. गाय बड़ी सीधी होती है. इस हद तक कि आदमी अपनी सीधी-सादी औरतों को गाय कह कर पुकार लेता है. Kamlesh Pandey

2. गाय अपनी फैमिली नहीं बनाती, पर बच्चे हर साल जरुर देती है. दुग्ध-प्रेमी ही उसके गंधर्व-विवाह की व्यवस्था करते हैं और प्राप्त संतान पर अपना हक रखते हैं. Kamlesh Pandey

3. गोरक्षा को मिशन भाव से अपनाने वाले स्वयंसेवक मार्ग में आने वाले इंसानों की भी जम कर कुटाई और कभी कभी ह्त्या भी कर देते हैं.@@Kamlesh Pandey

4. गाय के प्रति एक जबरदस्त संवेदना की लहर है. ऐसी लहरें चुनावी राजनीति को भी लहरा देती हैं. Kamlesh Pandey

5. गायों पर आदमी वैसे ही मालिकाना हक़ रखते हैं, जैसे नेता-गण अपने वोटरों को ‘अपना आदमी’ कहते हैं. Kamlesh Pandey

#व्यंग्य, #व्यंग्यकीजुगलबंदी #vyangy

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