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दो लघुकथाएँ / एक पैर की चिड़िया / जिजीविषा / सुशील कुमार शर्मा

दो लघु कथाएं

1 एक पैर की चिड़िया

कल सुबह नींद खुली तो मैंने देखा कि एक चिड़िया जिसका सिर्फ एक पैर था आँगन में फुदक रही थी। बहुत मुश्किल से वह अपना संतुलन बना पा रही थी। वह फुदक कर दाना उठाती और उड़कर वह घोंसले में जाने की कोशिश करती लेकिन उड़ नहीं पा रही थी। उसके चूजे घोंसले से उसे पुकार रहे थे। उसने बहुत कोशिश की लेकिन वह घोंसले में नहीं जा पा रही थी। तभी चिड़िया ने देखा कि एक बिल्ली दबे पैर उसके चूजों की ओर बढ़ रही है न जाने उसमें कहाँ से ताकत आ गई वह बिजली की तेजी से उड़ी और चीखती हुई बिल्ली के पास पहुंच कर पीछे से बिल्ली पर चोंच मारी। बिल्ली बिलबिला कर उसपर झपटी तबतक चिड़िया फुदक कर दूर जा बैठी।

मैं सोच रहा था कि जिस चिड़िया से दो कदम उड़ते नहीं बन रहा था उस चिड़िया ने हमला कर बिल्ली से अपने बच्चों को बचा लिया जो उसकी अदम्य इच्छा शक्ति का ही परिणाम था।

2.जिजीविषा

मुम्बई से बिहार जाने वाली ट्रेन से वह सफर कर रहा था। अत्यधिक गर्मी थी बोगी ठसाठस भरी थी। वह बोगी के गेट पर बैठा था। अचानक नींद का झोंका आया और वह छिटक कर ट्रेन के नीचे आ गया। एक चीख के साथ ट्रैन धड़धड़ाती निकल गई। जब उसे होश आया तो उसने देखा कि उसके दोनों पैर कट चुके है उनमें से खून बह रहा। उसने सोचा कि अब तो जिंदगी के कुछ पल शेष हैं। उसने देखा कि पैर अभी पूरे नहीं कटे हैं लटके है। उसने हिम्मत नहीं हारी दोनों पैरों को उसने फिर से जमाया पास ही उसका बेग पड़ा था उसमें से गमछा निकाल कर उसने किसी तरह बांध लिया। सांसे आधी अधूरी सी चल रही थीं धीरे धीरे बेहोशी छाने लगी और वह फिर से बेहोश हो गया लगा सब कुछ खत्म। सुबह की पो फटने वाली थी। जब उसे फिर होश आया तो एक ट्रेन की आवाज़ सुनाई दी। न जाने उसमें कहाँ से इतनी शक्ति आ गई वह लुढ़क कर पटरियों के बाजू हो गया और खून से लथपथ शर्ट हिलाने लगा। ट्रेन के ड्राइवर ने उसे दूर से ही देख लिया और उसने ट्रैन रोकी। कुछ साहसी युवकों ने उसे ट्रेन में उठा कर चढ़ाया तब तक वह बेहोश हो चुका था।

उसे जब होश आया तो उसने देखा कि वह अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में है उसके दोनों पैरों का ऑपरेशन हो चुका है। दोनों पैर कट गए हैं किंतु उसका जीवन बच गया।

डॉ सहित सभी लोग हैरान थे कि यह व्यक्ति बच कैसे गया? आखिरकार जीने की जिजीविषा ने उसे नया जीवन प्रदान किया।

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