---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

समीक्षा ओम वर्मा : आपके कर कमलों से (व्यंग्य संग्रह)

साझा करें:

समीक्षा ओम वर्मा : आपके कर कमलों से (व्यंग्य संग्रह) / वनिका पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली / २०१७ / पृष्ठ, ११२ / मूल्य, रु.१७०/- सुविचारित और सुसंस...

snip_20170626111253

समीक्षा

ओम वर्मा : आपके कर कमलों से (व्यंग्य संग्रह) / वनिका पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली / २०१७ / पृष्ठ, ११२ / मूल्य, रु.१७०/-

सुविचारित और सुसंस्कृत व्यंग्य

डा. सुरेन्द्र वर्मा

मध्य-प्रदेश व्यंग्य लेखन के लिए एक उर्वरा भूमि साबित हुई है | व्यंग्य लेखन के दो दिग्गज – शरद जोशी और हरिशंकर परसाई – मध्य-प्रदेश की ही देन हैं | ज्ञान चतुर्वेदी और हरि जोशी जैसे सुप्रसिद्ध व्यंग्य कार भी इसी धरती से आए हैं | इसके अतिरिक्त भी आज यहाँ के कई अन्य लेखकों ने व्यंग्य के क्षेत्र में अपना नाम रोशन किया है | ओम वर्मा (पूरा नाम, ओमप्रकाश वर्मा) का जन्म विदिशा, म. प्र, में ही हुआ है | और उनकी पहली पुस्तक – “आपके कर कमलों से” - व्यंग्य आलेखों का ही एक संग्रह है |

ओम वर्मा के व्यंग्य-आलेखों के साथ सैर करते समय जो बात सबसे पहले सामने आती है वह यह है कि ये व्यंग्य अत्यंत सुविचारित और सुसंस्कृत व्यंग्य हैं | आज व्यंग्य लेखन की एक बाड़ सी आई हुई है, और लगभग हर हिन्दी दैनिक समाचार पत्र में प्राय: फूहड़ और अश्लील, गाली गलौज से भरे हुए, राजनीति के प्रतिदिन के कार्य कलापों से सम्बंधित व्यंग्य कालम देखे जा सकते हैं | और इसके लिए एक सुविधा जनक दलील यह दी जाती है कि वर्तमान में जब राजनीति में ही इतनी कीचड उछाली जा रही हो तो व्यंग्य लेखक स्वयं को भला कैसे बचा कर रख सकता है ! ओम वर्मा को राजनीति से कोई परहेज़ नहीं है, बल्कि उन्हें व्यंग्य लेखन के लिए अधिकतर मसाला राजनीति से ही प्राप्त होता है | लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि उनके व्यंग्य आलेखों में राजनीति में आजकल जो फूहड़ भाषा बोली जा रही है, वह छू तक नहीं गई है | वे अपने शब्दों पर विशेष ध्यान देते हैं और लगभग एक शब्द-शास्त्री के रूप में उनका विश्लेषण करते हैं और तब धीरे से उन्हें व्यंग्य को सौंप देते हैं | यह काम सही अर्थों में एक अत्यंत शिक्षित व्यक्ति ही कर सकता है |

बड़ी हस्तियों के हाथ, हाथ नहीं कहलाते | वे कर-कमल होते हैं | लेकिन कर-कमल समास के दोनों पदों को, जैसा कि ओम वर्मा कहते हैं, हम अलग करके देखें तो पावेंगे कि “देश पर कभी कर हावी था, अब कमल हावी है|” कर-कमल की बात तो अब केवल काव्य में सीमित रह गई है | अब तो ‘कर’ कमल मुक्त सरोवर तथा कमल, भारत माँ की ‘कर-मुक्त’ तस्वीर बनाना चाहता है | लिहाजा दोनों एक दूसरे को उखाड़ फेंकने में जी जान से भिड़े हैं | और तो और, राजनैतिक गलियारों में कई जगह ‘करों’ का ‘कमलीकरण” तक हो चुका है | (आलेख २४)

ओम वर्मा इसी तरह ‘राजनीति’ को भी एक समास बताते हैं, जिसका पहला पद ‘राज’ कुछ गिने-चुने लोग या घराने हथिया चुके हैं | बचा दूसरा पद, ‘नीति’ | इसे कुछेक लोगों ने कुछ ऐसा जकड या पकड़ रखा है कि किसी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं हैं | वे शायद गांधी या जे पी बनाना चाहते हैं | और शासन को बस तंग करने में जुटे हैं | अत: वर्मा जी कहते हैं कि राजनीति में अब दो तरह के लोग हो गए हैं “एक वे जो सिर्फ राज करना चाहते हैं, नीति चाहे कोई भी हो | और दूसरे वे जो सिर्फ नीति पर चलना चाहते हैं, चाहे राज करने को मिले या न मिले |” (आ, ३४)

एक अन्य आलेख में ओम वर्मा ने अपेक्षित और उपेक्षित में अंतर समझाया है | कहते हैं, “देश और समाज को उनसे बहुत कुछ अपेक्षित है | मगर वे हैं कि देश-सेवा से किनारा किए हुए हैं | इसकी वजह बड़ी सीरिअस हैं | उन्हें मलाल है कि वे आज पूरी तरह से उपेक्षित हैं |” वे आगे कहते हैं कि राजनीति में तो सारा खेल ही अपेक्षा और उपेक्षा के बीच खेला जा रहा है | कई उदीयमान व संभावनाशील नेताओं का राजनैतक करियर अपेक्षा से शुरू होकर उपेक्षा पर आकर ख़त्म हो गया | पर इतना ही नहीं, उन्होंने एक टिप्पणी यह भी की कि बिहार के युवा नेता के मुख से शपथ ग्रहण में मुंह से अपेक्षित की बजाय उपेक्षित निकल गया तो उनपर हंसने, झुंझलाने या तंज कसने की कोई आवश्यकता नहीं है | सही बात है | समरथ को नहिं दोष गुंसाई!

बड़े बड़े विद्वान आज तक कुछ समस्याएँ नहीं सुलझा पाए हैं | जैसे, मुर्गी पहले आई या अंडा? अथवा, गिलास आधा खाली है कि आधा भरा हुआ ? ओम वर्मा बड़ी चतुराई के साथ इन समस्याओं का हल करते हैं | मुर्गी और अंडे की समस्या को वे पुनर्परिभाषित करते हुए कहते हैं कि आज के प्रसंग में समस्या तो वस्तुत: यह है कि किस पक्ष को पहले खत्म किया जाए? – मुर्गी को या अंडे को! अंडे पक्ष वाले मुर्गी को और मुर्गी पक्ष वाले अंडे को खत्म करने की बात करते हैं | पर दोनों को ही यह समझ में क्यों नहीं आता कि अंतत: उदारस्त तो दोनों को ही किया जाना है | और फिर, बड़े शातिराना अंदाज़ से वर्मा जी बताते हैं कि आज ये संसद इसलिए ठप कर रहे है कि कल उन्होंने की थी | या अगली बार सत्ता में ये आ गए तो कल वे करेंगे | ये उनको इसलिए मार रहे हैं कि कल जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने इनको मारा था | कल अगर उनके दिन फिर गए तो इनकी खैर नहीं | मरना तो बारी बारी से दोनों को ही है ! पर असली प्रश्न तो यही है कि क्या दोनों में से कोई एक कभी समझदारी दिखा पाएगा? (आ.४३)

आधे खाली और आधे भरे गिलास के लिए तो ओम वर्मा ने पूरी एक जांच कमिटी ही बैठा दी है | क्या करे? नाम लिए बगैर वे कहते हैं कि एक योग-गुरु ने आरोप लगाया है कि पूरे भरे गिलास का आधा पानी विदेशी बैंकों में जमा है और इसे वापस लाकर ही उसे पूरा भरा जा सकता है | तगड़ी फीस लेकर जीवन जीने की कला सिखाने वाले एक अन्य आध्यात्मिक गुरू ने ‘गहन गंभीर’ बात यह बताई की गिलास को खाली मत कहो | उसमे आधा पानी है तो बाक़ी जगह में हवा भी तो है ! समस्या वस्तुत: उलझती ही जा रही थी } और ऐसी समस्याओं से पिंड छुडाने के लिए सरकार जांच कमीशन बैठा देती है | अगर ऐसा कोई जांच कमीशन बैठाया गया तो निश्चित ही वह निम्न बिन्दुओं की जांच करेगा –

(१) गिलास को आधा भरा हुआ कहा जाए या आधा खाली कहा जाए ?

(२) गिलास को पूरा भर देने में फ़ायदा है या बचा हुआ भी ढोल देने में ?

(३) इस गिलास को फिर से भरवा लिया जाए या नया गिलास भरवाया जाए ?

(४) गिलास की सुरक्षा में कहाँ कमी थी ? आयोग सुरक्षा के लिए अपने सुझाव भी दे |

(५) आयोग यह भी पता लगाएगा कि गिलास भरते समय आधा रह गया था या भरे हुए से खाली करते समय अधूरा छूट गया था | (आ १७)

जय हो |

आज का व्यंग्यकार चारों और से इतने विरोधाभासों और विसंगतियों से घिरा हुआ है की वह समझ नी नहीं पा रहा है किस पर लिखे और किसे छोड़ दे | एक अंग्रेज़ी निबंधकार को उद्धृत करते हुए ओम वर्मा कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि विषय बहुत कम हैं, बल्कि दिक्कत यह है कि विषय बहुत ज्यादह हैं | यह दिक्कत बहुत कुछ, बकौल एक अन्य दार्शनिक के, उस गधे की तरह हो गई है जो इसलिए भूखा मर गया था की सामने पडी घास की ढेरियों में से कौन सी पहले खाए, यह फैसला नहीं कर पाया | (आ. २१) लेकिन ओम वर्मा हार मानने वालों में से नहीं हैं | उन्होंने एक अच्छी तरकीब ढूँढ़ निकाली है | वे विरोधाभासी और विसंगत स्थितियों पर अलग अलग व्यंग्य न लिखकर अनेकों को एक ही आलेख में, उनपर कटाक्ष करते हुए, समेट लेते हैं | उनके “पास्ट परफेक्ट टेन्स का फेर” और “जो जहां होने थे” इसी प्रकार के आलेख हैं |

मुझे याद है कि हमें भी अपने स्कूल में अंग्रेज़ी की कक्षा में पास्ट परफेक्ट टेन्स क्या होता है, बताया गया था | उन दिनों अंग्रेज़ी की ग्रामर पर बड़ा ध्यान दिया जाता है | समझें न समझें बात अलग है | मैंने भी इस टेन्स के कुछ उदाहरण रट लिए थे | ओम वर्मा खुश किस्मत हैं कि उन्हें अपने अंग्रेज़ी अध्यापक के बताए कुछ उदाहरण याद रह गए और उन्होंने उनका व्यंग्यात्मक इस्तेमाल अपने पास्ट परफेक टेन्स वाले आलेख में करके अन्य तमाम और उदाहरण भी उसमें जोड़ दिए जिनपर वे चाहते तो स्वतन्त्र व्यंग्य आलेख तक लिख सकते थे | कुछ उदाहरणों पर गौर करें | हर उदाहरण व्यंग्य का नायाब नमूना है | “पुलिस के आने से पहले चोर भाग चुका था |” “कन्या पक्ष के यहाँ बरात के पहुँचाने के पूर्व दुल्हन अपने प्रेमी के संग भाग चुकी थी |” “इससे पहले कि बी जे पी जम्मू कश्मीर में सरकार से समर्थन वापसी पर विचार करती, वे खौफनाक आतंकी को रिहा कर चुके थे |” “ नोटबंदी के बाद गुलाबी नोट की शक्ल में लक्ष्मी साहूकारों की तिजोरियों में कैद हो चुकी थी |” कहाँ तक गिनाएं, ऐसे ४०-५० पास्ट परफेक्ट टेन्स के व्यंग्य-वाक्य आपको इस आलेख में एक साथ मिल सकते हैं | सारे समाज को टेन्स करने के लिए ये काफी होने चाहिए | (आ.०२)

लेखक की मनोवैज्ञानिक सूझ-बूझ देखिए | हर असंतुष्ट की उसने सही ‘रग’ पकड़ ली है | “जो जहां होने थे” वे वहां नहीं हैं | “किसे कहाँ होना था और वो कहाँ है |” बड़ी गड्ड-बड्ड वाली स्थिति है | ऐसी स्थितियों के भी ओम वर्मा जी ने बीसियों उदाहरण दे दिए हैं | और हर उदाहरण एक कटाक्ष है | साहित्य और पत्रिकारिता के ही क्षेत्र को ले लें | कौन पत्रकार है और कौन साहित्यकार, पता ही नहीं चलता | जिन्होंने राजनीतिशास्त्र में प्रथम श्रेणी में एम ए किया है वे राजनीति के शिकार हो रहे हैं और राजनीतिज्ञों को मलाल है कि उन्होंने राजनीति शास्त्र नहीं पढ़ा | डाक्टर चूना लगाते हैं, और पान बेचने वाले मुंह के छालों के लिए मुफ्त दवा तजबीज़ करते है | अटल जी के लिए तो अक्सर कहा ही जाता था कि सही व्यक्ति गलत जगह पर है | ओम वर्मा को पूरा विश्वास है कि पूर्व चुनाव आयुक्त शेषन यदि सर्कस के रिंग मास्टर होते तो भी वे उतने ही प्रसिद्ध होते | शेषन जी तो खुद ही यह कहने में नहीं झिझकते थे कि वे शेषन नहीं अल्सेशन हैं ! (आ.०३)

पत्रकार को जब समाचार नहीं मिलता तो वह बॉडी-लैंगुएज (शारीरिक हाव-भाव) पर ध्यान देता है | लेकिन क्या यह इतना आसान है ? कई लोग “अन्दर से कुछ और बाहर से कुछ और नज़र आते हैं |” कुछ हैं कि बड़ा से बड़ा ज़ख्म छिपाकर भी जोकर की तरह हंसते मुस्कराते हैं, तो कुछ कवि सुरेन्द्र शर्मा की तरह हंसाने के लिए भी मनहूसियत ओढ़ लेते हैं | आखिर अभिनेता ठहरे | पर ओम वर्मा के अनुसार कुछ की बौडी-लैंगुएज किन्हीं समानताओं के कारण आसानी से पड़ी जा सकती है | वे उदाहरण देते हैं, गौर फरमाइए, कि व्यंग्य में संवेदनशीलता का निर्वाह कैसे हुआ है | “जवान बेटियों के लिए विवाह की मंडी में ‘योग्य-वर’ ढूँढ़ते बाप और नौकरी की तलाश में चप्पलें घिसते युवा की बौडी-लेंगुएज एक सी होती है |” “कवि, पागल और प्रेमियों की बौडी-लैगुएज में भी समानता देखी जा सकती है |” नवजात बच्चे की बौडी-लैंगुएज को माँ से बेहतर कौन जान सकता है ?” (आ.४२) क्या आप ऐसा कोई इंसान तलाश कर सकते हैं जो एक साथ कायर भी हो तथा चतुर और बहादुर भी | बीरबल के मार्फ़त ऐसा ही एक शख्स तलाश किया जा चुका है | जी हाँ, ‘असंतुष्ट; एक ऐसा ही शख्स है | यह अपने ही दल के मुख्य मंत्री के खिलाफ सरे आम बगावत कर चुका है इसलिए हम उसे बहादुर कह सकते है | यही शख्स आला कमान की झिड़की सुनकर तुरंत ही मुख्यमंत्री के प्रति बफादारी का बयान जारी भी कर चुका है – यह इसकी कायरता है और रहा सवाल चतुराई का तो हुजूर, जब से यह शख्स राजनीति में आया है, चाहे किसी की भी सरकार बनी हो, सदा खिले रहने वाले किसी बारहमासी फूल की तरह तरह सदा कुरसी पर लाभ के पद पर विराजित रहता आया है | चतुराई का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता ई ? (आ.१५)

ओम वर्मा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बड़ी उत्साहवर्धक है | उनके पिताश्री एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं | वे स्वयं विज्ञान के परास्नातक होने के साथ साथ अंग्रेज़ी साहित्य में भी एम ए हैं | हिन्दी उनकी मातृभाषा है और कि जिससे उन्हें नैसर्गिक प्रेम है | वे हिन्दी साहित्य के पाठक होने के साथ साथ,व्यंग्य आलेखों के अलावा दोहे और गज़लें भी लिखते हैं | विलास गुप्ते की एक नाट्य-कृति (१९८४) का शीर्षक था, “आपके कर कमलों से” | संभवत: वर्माजी ने भी अपने इस व्यंग्य-संग्रह का शीर्षक वहीं से लिया होगा | इस संग्रह में आपको तमाम लेखक और अपने अपने क्षेत्र के दिग्गज टहलते हुए मिल जाएंगे | कहीं प्रसिद्ध अंग्रेज़ी निबंधकार फ्रांसिस बेकन, कहीं एजी गार्डिनर तो कहीं टीएस ईलियट से आपकी मुलाक़ात हो जाएगी | नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पाई जाने वाली ख़ाक हाथ में लिए आपको धरती पर दिखाई दे जाएंगे | इन आलेखों में आप आसानी से जार्ज बर्नार्ड शा और एनीबिसेंट का विवाह जो नहीं हो पाया का सन्दर्भ खोज निकालेंगे | भारतीय साहित्यकारों में महादेवी वर्मा, धूमिल, कमलेश्वर, बच्चन, माखनलाल चतुर्वेदी, रघुवीर सहाय, इत्यादि, भी विचरते हुए दिखाई दे सकते हैं |

ओम वर्मा का यह पहला व्यंग्य संग्रह है | यह एक सुशिक्षित व्यक्ति की सुसंस्कृत कृति है | वर्मा जी के व्यंग्य आलेखों में न तो कटुता का समावेश है न हास्य का | वे केवल व्यंग्य स्थितियों को वाणी देते हैं और उनके पीछे छिपे व्यंग्य को पाठक के हवाले कर देते हैं | वर्मा जी के व्यंग्य-पाठकों से यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि वह स्वयं भी सुशिक्षित और सुसंस्कृत हो, अन्यथा व्यंग्य उनकी पकड़ से छूट सकता है | मैं ओम वर्मा के इस व्यंग्य संग्रह में एक महान व्यंग्यकार के “चीकने-पात” देखता हूँ |

- डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड

इलाहाबाद – २११००१

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
  1. शुक्रिया डॉ सुरेंद्र वर्मा जी, शुक्रिया रवि रतलामी जी !

    उत्तर देंहटाएं

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3864,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2812,कहानी,2137,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,865,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,659,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: समीक्षा ओम वर्मा : आपके कर कमलों से (व्यंग्य संग्रह)
समीक्षा ओम वर्मा : आपके कर कमलों से (व्यंग्य संग्रह)
https://lh3.googleusercontent.com/-cldO0WpoAwc/WVIFXs4LefI/AAAAAAAA5LU/J3B8tkz7UH4BRhsu8z-4vahhmX2A0QmNACHMYCw/snip_20170626111253_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-cldO0WpoAwc/WVIFXs4LefI/AAAAAAAA5LU/J3B8tkz7UH4BRhsu8z-4vahhmX2A0QmNACHMYCw/s72-c/snip_20170626111253_thumb?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2017/06/blog-post_27.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/06/blog-post_27.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ