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समीक्षा : श्रीराम महिमा

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बुजुर्ग दंपति ने फुर्सत के क्षणों में हिंदी गद्य में लिखी श्रीराम महिमा पुस्तक


भोपाल। राजधानी के बुजुर्ग दंपति ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले बच्चों की समस्या को समझा और जीवन की सांझ में कुछ समय निकालकर हिंदी गद्य में श्रीराम महिमा पुस्तक लिख डाली। अब ये पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है और बच्चे पढ़कर आनंदित हो रहे हैं।
  

आमतौर पर श्रीराम चरित मानस अथवा रामायण पद्य में मिलता है जिसे नई पीढ़ी के बच्चे ठीक से पूरी तरह नहीं समझ पाते हैं, इस समस्या का समाधान करते हुए गद्य में ''श्रीराम महिमा'' पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। पुस्तक में सामान्य बोलचाल की भाषा में रामायण पढ़ी और समझी जा सकती है। इस पुस्तक के लेखक श्री रघुवीर सहॉय श्रीवास्तव हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद अपने लेखन के शौक को पूरा करने के लिए पहले हाथ से पूरी रामायण लिखी और फिर उसे प्रकाशित कराया। इस नेक कार्य में उनकी पत्नी श्रीमती राधा श्रीवास्तव ने भी पूरा सहयोग प्रदान किया। पति-पत्नी ने मिलकर यह पुस्तक तैयार की।


कई बार देखा गया कि अंग्रेजी माध्यम के बच्चों की कमजोर हिन्दी के कारण वे तुकबंदी में लिखी गई धार्मिक पुस्तकें समझ नहीं पाते, बस देखादेखी लय ताल में गा लेते हैं। इस मुश्किल को दूर करने के लिए ही सामान्य बोलचाल की भाषा में श्री राम महिमा पुस्तक लिखी गई है, जिसे पढ़ना और समझना आसान होगा। तुलसीकृत रामायण की प्रेरणा से लेखक ने राम चरित मानस के सातों काण्ड का गद्यांश के रूप में वर्णन किया है। पुस्तक के लेखक श्री रघुवीर सहाय श्रीवास्तव ने बताया कि सरल भाषा में लिखी गई यह धार्मिक पुस्तक पढ़ने में उपयोगी है और पुस्तक में श्रीराम के जीवन चरित्र को जानने के प्रति लोगों में रूचि जाग्रत होगी। पुस्तक लिखने का उद्देश्य यह है कि पुस्तक को पढ़कर पाठक मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के विचार और कर्तव्यों से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
  

लेखक ने बताया कि पुस्तक अपने आपने में एक पाठशाला जैसी है जो जीवन जीने और संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। यह हमें अहं का त्याग करने, बुराईयों से दूर रहने, धैर्य, क्षमा, माता-पिता, गुरूजनों और बड़े बुजुर्गों का आदर करने, मर्यादा में रहने और लालच तथा मोह में न पड़ने की सीख देती है।

पुस्तक के दूसरे भाग में ज्योतिष के बारे में भी बताया गया है। इसमें लक्ष्य प्राप्ति में जन्मपत्रिका किस प्रकार सहायक यह समझाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक प्राप्त करने के लिए एल.आई.जी-204 कोटरा सुल्तानाबाद, भोपाल मप्र में अथवा मोबाइल नंबर 9893410840 पर संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी पिछली तीन पीढ़ी में परिवार के मुखिया ने कम-से-कम एक पुस्तक आने वाली पीढ़ी के लिए अवश्य प्रकाशित कराई है। इसी परंपरा को कायम रखते हुए उनके मन में गद्य में श्रीराम महिमा लिखने का विचार आया।

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(लेखक दम्पत्ति)

अधिक जानकारी के लिए संपर्क : मोबाइल नंबर  9893410840

प्रस्तुति - आशीष श्रीवास्तव

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