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अंग्रेज़ी क चस्का हिंदी पे मस्का / शैलेश त्रिपाठी

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हमारे पास जब इतनी सरल सहज और मधुर भाषा हिंदी है तो
हम अंग्रेज़ी के पीछे क्यों दीवाने है? हमारी भावभूमि भारतीय होनी चाहिए,हमें अपने मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए हमें जूठन खाने की आदत नहीं डालनी चाहिए।
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पता नाही आजक काहे सब अंग्रेज़ी में इतना बोलत बा केहू समझब नाही करत करे!

ए बच्ची इ गुड मॉर्निंग का मतलब का होत हव,हम नाही समझलि सबरे सबरे जब उठली तब उ सब कालेज क लड़कवा कुल गुड मॉर्निंग,गुड़ मॉर्निंग कहन!

अरे चच्चा गुड मॉर्निंग क मतलब बा तोहार दिन मंगल मय हो……..

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ओह्ह! तब इ बात बा

हम का करी इस सबन के नाही समझ में आवत हमार प्रधानमन्त्री जी विदेश में जान त हिंदी बोलन और ई सब अपने देश में अँग्रेज़ी…

अग्रेज़ी क चस्का लगबा ना ई सबहन के…

अरे नाही च्चा….

तब एक कुल कहा से सीखन अरे उ फेसबुक हव ना अउर व्हाट्सऐप ओहि से

धत मरदे ई का होला,अरे आज कल आधुनिक ज़माना बा न का करब ई सब पर सब आप एक दूसरे क जबान से दिल से मोहब्बत और प्यार दिखावा ला…..अच्छा अरे बच्ची एक बात बताई हम फेसबुक चलावली चल हट तू का जनबे हिंदी हमार मातृ भाषा हव और हमके जूठ खाइब पसन्द ना हव अच्छा चलत हई…..तोहरे भाषा में बाय बाय……..हाहाहा हा

एक दिन सुबह-सुबह सोकर उठे तो देखते हैं कि फेसबुक के मोहल्ले में तमाम पोस्ट इधर से उधर...उधर से इधर टहलते हुए मॉर्निंग वाक् कर रहे हैं.! लोग बड़े चिन्तित नजर आ रहे हैं.! हिन्दी को बचाना है..हिन्दी के लिए कुछ करना है.! बाद में पता कि आज हिन्दी दिवस है.! तो उस टाइम फील हुआ कि शायद मातृभाषा के लिए लोगन के मन में सम्मान का कुछ क्रान्तिकारी विचार उपज गवा है.!

देखिए साहेब.! हम बताएँ आप सबको...हम अम्मा को मदर्स डे पर याद करते हैं और बाबू जी को फादर्स डे पर...धरम-पत्नी को एनिवर्सरी पर...दोस्तों को उनके बड्डे पर.! लेकिन इसका मतलब ई थोड़े ही होता है कि हम अम्मा..बाबू जी..पत्नी..या दोस्तों से प्यार नहीं करते हैं...बस क्या है कि सोशल मीडिया पर उनकी याद बस उस दिन ही आती है.! तो ज्ञान देने वाले भाई जनो...रिक्वेस्ट करना चाहेंगे कि अपना फोकट का ज्ञान न दें.! यहाँ सब अपने आप में ज्ञानी हैं.! बस आप जो हिन्दी यूज करते हैं उसका आनन्द लीजिए.! हिन्दी की चिन्ता न करें कृपया...हिन्दी को कुछ नहीं होगा.!

आपकी मोहतरमा.. मने कि आपकी प्रेमिका कितना भी अंग्रेजी गाना सुन लें..अंग्रेजी फिल्में बिना हिन्दी डबिंग के देख लें..अंग्रेजी में गाना गा लें.. यहाँ तक कि वे अपने प्रेम का इजहार भी आपसे अंग्रेजी में ही करें....लेकिन बात कहें साफ-साफ..जब आप उनकी जुल्फों..उनकी आंखों..उनके गालों..आदि की तारीफ करेंगे न..तो वो शर्माती हिन्दी में ही हैं.! ये हमारा पर्सनल एक्सपीरिएंस है कि रोमैंस बोलते तो अंग्रेजी में हैं...पर करते हम जबर वाली हिन्दी में ही हैं.!

दोस्तों को अंग्रेजी में गाली देने वालो भाई साब को देख कर तो मन ही मन मुस्किया लेते हैं.! वो पता नहीं क्यों..पर शायद व्यंग जैसा कुछ.! धत् ससुरा...का बे...अबे...इन सबसे कुछ अलग सा ही भाव फील होता है.! आप खुद फील करेंगे जो सुख उनके "Love You" कहने से मिलता है..उसकी अपेक्षा हजार गुना ज्यादा परम् सुख उनके "हम आपसे प्रेम करते हैं.!" कहने से मिलेगा.! अगर मोहतरमा Hug करने के लिए कहती हैं तो जरा हंसी आती है..लेकिन अगर कहती हैं कि "गले से लगा लो" तो बन्दे का करेजा कुर्बान हो जाता है उनके लिए.!

हाल में ही वैज्ञानिकों ने एक शोध किया..जिसमें ज्ञात हुआ है कि जिन भाई साब की प्रेमिका अंग्रेजी में लड़ाई करतीं हैं उनकी रिलेशनशिप्स में औसतन सुख-समृद्धि ज्यादा बनी रहती है.! कृष्ण जी कितना भी गोपियों में प्यारे थे और राधा जी भी बहुत प्रेम करती थीं उनसे...लेकिन बात कहें एक...अंग्रेजी बोलने वाली कोई औरत जब गुस्से में आ जाए न तो वे भी यही सजेशन दिये हैं कि बन्धु कोई न कोई बहाना करके मौका-ए-वारदात से कल्टी मार लो.! यें बात श्रीमद् भागवत गीता के अध्याय 18 के श्लोक 62 में लिखी हुई है...हिडेन फोल्डर में.!

आपके किसी दोस्त का किसी कन्या से लड़ाई हो जाए...अंग्रेजी में लड़ने वाली कन्या से.! आप देखेंगे कि वो "What Please See Come This" इत्यादि करेंगे.! गुस्से का पारा जरा ऊपर जाएगा तो दनदना के किसी विधायक जैसे उस कन्या के पास  ऐसे कदम बढ़ाएँगे जैसे कि बस पहुँचते ही दो-चार चमाँट धर देंगे तान के.! लेकिन असल माजरा कुछ और ही होगा.! वो जाएँगे भी दनदना के...और गुस्से में भी होंगे...लेकिन पास पहुँचते ही जब वो मोहतरमा अंग्रेजी के निबन्ध जैसे लम्बे-लम्बे सेंटेन्स में गालियाँ देगी न तो बन्दा ऐसे खड़ा हो जाएगा जैसे कि किसी 5 साल पुराने क्रश को प्रपोज करने गया हो..और अभी भूमिका बना कर इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहा हो.! दो-चार मिनट आंखों में आँखें डाल कर देखने के बाद किसी तरह मामले को सल्टा कर निकल लेने में ही भलाई समझेगा.! क्योंकि उसको उस समय तक आत्मदर्शन प्राप्त हो चुका होगा कि इस लड़ाई झगड़े में कुछ नहीं रखा है..बस सब मोह माया है.!

भाषा सम्माननीय होती है और हमारे व आपके लिए वो हिन्दी है.! हिन्दी को हम महसूस करते हैं.! अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं...अपने हिसाब से ढाल लेते हैं और खुद भी ढल जाते हैं.! यह अद्भुत है पर सत्य है..हम कितना भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोल लें पर सोचते हैं हिन्दी में...रोते हैं हिन्दी में...मुस्कुराते हैं हिन्दी में...विचार बनाते हैं हिन्दी में...यहाँ तक कि सपने भी हम हिन्दी में ही देखते हैं.!

बस आखिर में इतना कहना चाहते हैं कि हिन्दी को आपकी नहीं...बल्कि आपको हिन्दी की आवश्यकता है.!

चलते हैं....टाटा.!!

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लेखक परिचय-

शैलेश त्रिपाठी

जन्म 6 अगस्त 1992

स्थान-वाराणसी

स्नातक(हिंदी) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

स्नातकोत्तर(हिंदी) काशी हिंदू विश्वविद्यालय

तेलुगु(एक वर्षीय डिप्लोमा,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय)

चीनी भाषा(दो वर्षीय एडवांस डिप्लोमा,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय)

शोध छात्र-

हिंदी एवम् विदेशीभाषा

अध्ययन विभाग

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

पहली चीनी हिंदी साहित्यिक पत्रिका-संचेतना

भारतीय प्रतिनिधि(क्वांगतोङग वैदेशिक अध्ययन विश्वविद्यालय,क्वांगचौ, चीन)

संपर्क – shaileshguggu@gmail.com


कई विषयों पर लेख प्रकाशित-

)इश्क-ए-बनारस

)महाशिवरात्रि:एक विवाह ऐसा भी

)वेलेंडाइन डे;स्पेशल

)भारतीय संस्कृति और आद्योगिक युग

)चीन में हिंदी से रोमांस

)भारतीय नृत्य और संगीत

)भारत एक वैकल्पिक देश

)लुशुन् और प्रेमचन्द;एक अकाल्पनिक मित्र

)विवाह वाह और आह

)बनारस का बुढ़वा मंगल।

विषय:

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शैलेश जी,
आपका लेख पढ़ने में आया. समझने में मुश्किल हो रही है कि यह सीरियस लेख है या मात्र व्यंग. आपकामुख्य मुद्दा 'मातृभाषा' ही गलत है. यदि आप अपनी मातृभाषा की बात कर रहे हैं तो ठीक पर हिंदी भारतीयों की न मातृभाषा है न राष्ट्र भाषा. यह केवल राजभाषा है.

www.hindikunj.com/p/mr.html
पर आपमेरा.हिंदी के प्रति लगाव देख सकते हैं
8462021340 / 7780116592
laxmirangam@gmail.com
laxmirangam.blogspot.in

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