शनिवार, 3 जून 2017

अंधेर नगरी , चौपट ----------- / मधु त्रिवेदी

डॉ मधु त्रिवेदी

सोने की चिड़िया कहलाने वाला मेरा देश भारत समय -समय पर आक्रमणकारियों के द्वारा लूटा जाता । हमारी विवश्ता कि हम अपने को लुटवाते रहे । महमूद गजनवी से लेकर मुगल सल्तनत के नष्ट होने तक भारत की अपार सम्पदा , धरोहर एवं संस्कृति को लूटा जाता रहा ।

रामकृष्ण , विश्वामित्र , वशिष्ठ , अपाला गार्गी आदि विद्वतजनों की यह भूमि , यदि वर्तमान पर दृष्टिपात करें, तो 'अंधेर नगरी के सिवा कुछ और नजर नहीं आती । स्वार्थ लिप्सा में लिप्त हम किसी के मान सम्मान की हत्या करने में जरा भी चूक नहीं करते है , मान - सम्मान को छोड़ इंसान की भी हत्या कर देते हैं।

[ads-post]
महत्वाकांक्षा की पूर्ति में उतावले हम उस अंधे धृतराष्ट्र तथा आप उस दुर्योधन की की भाँति है है जो पूरे कुल का विनाशक है ।

हर युगीन परिस्थितियाँ बदलती है जिस समय भारतेन्दु के इस नाटक की रचना हुई तब से आज तक परिस्थितियों में अन्तर आया है । अंधेर नगरी तो हर युग में मौजूद रही , बस उसका स्वरूप बदला है । भ्रष्टाचार , सत्ता की जड़ता , अन्याय पर आधारित व्यवस्था जो किसी मूल्य की नहीं है । यह तो हर युग की विशेषता रही है । जिस राज्य में विवेक - अविवेक का भेद नहीं होता उस राज्य में प्रजा कैसे सुखी रह सकती है ? क्योंकि भ्रष्टाचार व्यवस्था की आत्मा में गहराई से समाया हुआ है और बड़े - बड़े चोर सरेआम घूमते रहते है ।
महत्वाकांक्षा की पूर्ति मेंआमादा हम उस शिष्य की के सदृश है जो भारतेन्दु के नाटक " अंधेर नगरी " में अपने गुरू को छोड़ अय्याशी जीवन व्यतीत करने के लिए अंधेर नगरी रूक जाता है । जहाँ पर हर चीज का भाव ' टका सेर ' पाता है । टका सेर से मेरा आशय वोटों को बटोरने की राजनीति की आड़ में एवं वर्गगत समानता की आड़ में सत्तापक्ष द्वारा चली गयी कूटनीति
चालों से है , ये कूटनीतिक चालें आरक्षण एवं सामाजिक समानता के नाम पर लोगों से छल कर रही है ।

"रिश्वत की संस्कृति " सरकारी और गैर सरकारी महकमे में पूरे प्रभाव के साथ जीवित है जो घोटालों का ही सुधरा रूप है कहीं भी किसी भी डिपार्टमेंट में छोटे से छोटा , बड़े से बडा काम बिना रिश्वत नही होता । सत्ता में कोई भी आये , सभी जनता का खून चूसते है जनता को इन्तजार रहता है कि कोई उद्वारक आयेगा और युगों से चली आ रही व्यवस्था में सुधार होगा । जिसके कर्मों से कुशासन रूपी अंधा राजा फाँसी पर लटकेगा ।

और सुशासन रूपी चेला (शिष्य ) दूसरे शब्दों में जनता या देशवासियों को मुक्ति मिलेगी ।
यहीं हालात न्यायलयों की है "जिसकी लाठी , उसकी भैंस "। न्याय उसी को मिलेगा जिसकी लाठी में दम है । काफी लम्बी प्रक्रिया के बाद अपराधी साफ बच जाता है निर्दोष को ही सजा मिलती है और गरीब तारीख पर तारीख लेते - लेते या तो मर जाता है या सुसाइड कर लेता है ।
'अंधेर नगरी की " यहीं प्रासंगिकता है कि दुनियाँ के किसी भी देश की बदलती शासन की परम्परा का लम्बा इतिहास "अंधेर नगरी " से स्वत: जुड़ जाता है । "अंधेर नगरी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रजातंत्र की घोर असफलताओं और व्यवस्थाओं के पतन का प्रतीक है ।

संक्षिप्त परिचय
--------------------------- .
पूरा नाम : डॉ मधु त्रिवेदी
पदस्थ : शान्ति निकेतन कालेज आॅफ
बिजनेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर
साइंस आगरा
प्राचार्या,
पोस्ट ग्रेडुएट कालेज आगरा
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
उप संपादक   "मौसम " पत्रिका में
☞☜☞☜☞☜☞☜☞☜☞☜
2012 से फेसबुक पर सक्रिय
♬♬♬♬♬♬♬♬♬♬

साहित्यिक सफरनामा :
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
विद्यार्थी जीवन स्कूल की मैगजीन
में छपा करती थी
तत्पश्चात कैरियर की वजह ब्रेक हुआ
फिर वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारी के कारण
बाधित जनवरी , 2015 में
"सत्य अनुभव है "
☀☀☀☀☀☀☀
आन लाईन पत्रिका में प्रकाशित हुई ।
मैगजीन जिनमें प्रकाशित
♿♿♿♿♿♿♿

India Ahead
स्वर्गविभा आन लाइन पत्रिका
अटूट बन्धन आफ लाइन पत्रिका
झकास डॉट काम
हिंदी लेखक डॉट काम
हारीजन हिन्द
अनुभव पत्रिका
जय विजय
वेब दुनिया
मातृभाषा मंच
भोजपुरी मंच
शब्द नगरी
रचनाकार
पाख़ुरी
शब्दों का प्याला
सहज साहित्य
साहित्य पीडिया
पल -पल मीडिया
होप्स आन लाइन पत्रिका
भारतदर्शन अन्तराष्टीय पत्रिका

अखबार जिनमें प्रकाशित
❇❇❇❇❇❇❇❇❇❇
हिलव्यू (जयपुर )
सान्ध्य दैनिक (भोपाल )
सच का हौसला अखबार
लोकजंग
ज्ञान बसेरा
शिखर विजय
नवएक्सप्रेस
अदबी किरण
सान्ध्य दैनिक
ट्र टाइम्स दिल्ली
आदि अखबारों में रचनायें
विभिन्न साइट्स पर परमानेन्ट लेखिका
इसके अतिरिक्त विभिन्न शैक्षिक शोध पत्रिकाओं
में लेख एवं शोध पत्र
आगरा मंच से जुड़ी

Blog Meri Dunia
❤❤❤❤❤❤❤❤❤

Postal Address
Dr Madhu Parashar
123 P.P.Nagar Sikandra Agra
Pincode 282007
mob 9412652484
8171248456

साझा संकलन
काव्योदय
गजल ए गुलदस्त
विहंग गीत
शब्दों का प्याला
❤❤❤❤❤❤❤❤❤
email -madhuparashar2551974@gmail.com
trivedimadhu785@gmail.com
रूचि --
लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू लेख
150 से अधिक प्रकाशित 
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन
नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
  अन्य Text Books FOR M.ed ,B.ed
ANVIKSHKI शोध पत्रिका  BANARAS
JYOTIRGAMAY JOURNAL OF EDUCATION CHITRAKUT , MEMBER OF ADVISORY BOARD
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

FOR INDIAN STREAM RESEARCH JOURNAL FROM SOLARPUR MUMBAI INDIA
☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀

डॉ मधु त्रिवेदी

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------