रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

बृजमोहन बैरागी का चिंतन / एक यथार्थ आलोचना - प्रवीण चारण


image
बृजमोहन स्वामी 'बैरागी' (जन्म 1 जुलाई सन् 1995) , हिंदी प्रगतिवाद-यतार्थवाद के युवा लेखक और कवि हैं।
इस वर्ष आगामी जुलाई में 'बैरागी' जी का तेईसवां जन्मदिन भी आ रहा है।
'बैरागी' जी आधुनिक काल के युवा वर्ग में महत्वपूर्ण प्रगतिवादी लेखक हैं। यह महत्वपूर्ण बात है कि हिंदी आंचलिक लेखन के साथ साथ उनका विदेशी "काव्य केंद्रीकरण" पर काफ़ी ज़ोर रहा है। 'बैरागी' जी काफ़ी कम उम्र से, लगभग पांचवीं क्लास से ही कविताएँ लिखने लगे थे। इसलिए कुछ लोग इन्हें "हिंदी का सबसे छोटा बेटा" भी कहते हैं। महाप्राण निराला उनके सबसे प्रिय कवि थे। बैरागी की यथार्थ चेतना निराला जी के काफ़ी इर्द गिर्द घूमती सी प्रतीत होती है। इन्होंने कविताओं और फेंटेसियों में समाज और उसकी समस्याओं का यथार्थ चित्रण किया है।
वे मानते हैं कि मानव और मानवता की शक्ति ही एकाकार विश्वास है और ईश्वर के प्रति अनास्था प्रकट करते है;धर्म उसके लिए अफीम का नशा है।
उद्धरण : लाचारी कविता से-

" तुमने जितनी भी बातें
परमात्मा के संबंध में कही हैं,
मेरे पेट पर लात मारकर ही कही हैं
सूरज
पूरी दुनिया के लिये,
पर मेरे रोशनदान से दिखता।
सुनो ,

जहां मैं अपने उपन्यास
जलाकर आया
वहां एक आदमी
मरना चाहता था।
तुम सुन रही हो न ..."

'बैरागी' जी खुद को स्वाभाविक तौर पर एक नास्तिक रूप में देखते हैं। फिर भी, प्रखर एवं उदात्त अभिव्यक्ति की उनकी कविता "लाचारी- जूते बाहर उतारें" ईश्वर के अस्तित्व पर ही प्रकाश डालती हैं।
(गत् दिनों एक सम्मेलन में उनसे हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया कि आस्तिकता और नास्तिकता, साहित्य में बहस के सिवाय कुछ भी करें, हमें पसन्द है)
"ईश्वर और धर्म के लिए आजकल जो युद्ध छिड़ा हुआ है, उसमें एक लेखक का सदैव खुद को आदर्श रूप में ढालना जरूरी है"
बैरागी जी की ये पंक्तियाँ उनकी तटस्थता और धर्म उदासीनता प्रस्तुत करती है।
खैर...अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा एवं प्रगतिवादी विचारधारा के प्रति आकर्षण के कारण अज्ञेय जी इनके के आदर्श रहे हैं इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता है। स्कूली जीवन से ही ये राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन में कूद पड़े और साथ साथ ठोस सृजन-कर्म में निरत रहे। हनुमानगढ़ के नोहर तहसील अंतर्गत बरवाली गांव में जन्मे 'बैरागी' की आंचलिक साहित्यकारों से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए जिनमें चन्द्रसिंह बिरकाळी, करणीदान बारहठ, भूरसिंह राठौड़, शंकरदान सामौर आदि इनके आदर्श रहे।
वर्तमान में रामस्वरूप किसान, दीनदयाल शर्मा, बिश्नाराम बरवाली, हनुमान दीक्षित, जनकवि विनोद स्वामी, डॉ सत्यनारायण सोनी इत्यादि साहित्यकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति से जुड़े हुए है।
' बैरागी' जी ने प्रथम काव्य संकलन "तुम् और मौसम" (2013) को अप्रकाशित रखा। हालाँकि प्रसिद्ध पत्रिका स्वर्गविभा में उनकी काफी रचनाएँ प्रकाशित होती रही। इसके बाद प्रतिलिपि पत्रिका में भी उनकी कलम चली।
अब उनका दूसरा काव्य संग्रह शीघ्र प्रकाशित होने वाला है।
यथार्थ- कल्पना, आशा-निराशा, कोमल-प्रखर, आदि भाव उनके काव्य में विद्यमान हैं।
डॉ. रामशंकर चंचल ने इनके विषय को "उत्तम प्रकृति चित्रण के साथ मानवीय पहलुओं को उजागर करता एक लेखक...."
पिछले दिनों 'बैरागी' जी की कविता,
"तस्लीमा नसरीन कहाँ है?" इंटरनेट पर और पत्र पत्रिकाओं में काफी प्रसिद्ध रही।
ओम पुरी जिन्दा है, ऐश्वर्या रॉय का कमरा, लोग: जो मार दिए गए , और 'मौसम' बैरागी जी की प्रमुख कविताएँ है। उनकी रचनाओं में बहुविध रूप हैं, अनेक आयाम हैं जो इनकी कहानी "तीसरा पिस्तौल" में छुपी हुई है। 'बैरागी' जी ने जीवन को एक ही साथ कई रूपों में देखा है, और उनका तीखा सामन्जस्य बैठाकर साहित्य लिखा है। संसार के प्रगतिवादी एवं गहराईपूर्ण तथ्यों के चुने हुए विषयों का इतना सूक्ष्म विवेचन-विश्लेषण तथा उपमाओं एवं उद्धरणों का इतना तीखा इस्तेमाल वर्तमान बहुत कम लेखकों की रचनाओं में उपलब्ध है।
एक उद्धरण

"तस्लीमा नसरीन कहाँ है" से-
कुछ लेखक/लोग
सोच सकते हैं
की ऊंची आवाज में
घातक दनीश्वरों का विरोध किया जाए।दब जाती है
वो आवाज
लेकिन मरती नहीं
जिंदा हो जाती है अक्सर
नई क्रांति के लिए।

शहरीकरण, तड़क भड़क और पुरस्कारीय लोभ को ठुकरा कर राजस्थान के एक छोटे से गांव में जीवन निर्वाह करने वाले लेखक ग्रामीण जीवन से लेकर विश्वस्तरीय मुद्दों पर काफी वजनदार कविताएँ लिखते आये हैं।
दरअसल उन्होंने हमें सिखाया है कि वर्तमान रूढ़ियों और कुंठाओं से उभरकर जीवन सौन्दर्य का बेहतरीन ढंग से रसास्वादन किस तरह से किया जा सकता है। श्री प्रेमचंद जी ने कहा था कि यथार्थ केवल प्रकाश या केवल अंधकार नहीं है, बल्कि अंधकार के पीछे छिपा प्रकाश और प्रकाश के पीछे छिपा अंधकार है।
कवि बृजमोहन बैरागी को पुनः साधुवाद और श्रेष्ठ रचना लेखन के लिए बधाई।

बैरागी जी विकिपीडिया लिंक-
https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AC%E0%A5%83%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C3081398257

*************
लेखक परिचय-

युवा आलोचक प्रवीण चारण
हनुमानगढ़ [राज०]
+919057245055

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget