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**आतंकवाद के प्रति सतर्कता, जागरूकता, और क्रियान्वयन** / बलबीर राणा "अडिग"

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संदिग्ध वस्तु एवं संदिग्ध आदमी के विषय में हमारे देश में अभी तक कोई आम सतर्कता और जागरूकता नहीं है, जहां देश के अंदर अपने को सम्भ्रान्त सुश...

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संदिग्ध वस्तु एवं संदिग्ध आदमी के विषय में हमारे देश में अभी तक कोई आम सतर्कता और जागरूकता नहीं है, जहां देश के अंदर अपने को सम्भ्रान्त सुशिक्षित कहने वाले व्यक्तियों में भी आतंकवादियों के खतरे के प्रति अवेयरनेस लगभग ना के बराबर है तो आम जनता का क्या कहना, हमारे देश में इतने खतरनाक मुद्दे पर सतर्कता एवं जागरूकता नगण्य के बराबर है यह मात्र कुछ विज्ञापनों, हवाई, रेलवे व कुछ बस स्टेशनों और सरकारी कार्यक्रमों की इतिश्री तक सीमित है, बाकी आम जगह बाजार, शॉपिंग मॉल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, भीड़ भाड़ वाली जगह, मेले, उत्सव और धार्मिक स्थलों पर सिफर है, देश की 90 फीसदी आम शहरी को पता ही नहीं कि अगर आतंकवादी वारदात मेरे सामने हो जाय तो मुझे क्या करना है और आज भी देश में लावारिस वस्तु का मिलना किस्मत या तोहफा मिलने का नजरिया ज्यों का त्यों है या किसी की भलाई के लिए वस्तु को संभाल के रखने की मानवता विद्यमान है।

वैश्विक पटल पर चल रही चरम आतंकी घटनाएं जिनका वर्तमान trained बॉम्बिंग (IED ब्लास्ट), PBIED (personal Born IED) अर्थात सुसाईड बॉम्बिंग, VBIED (Vehicle Born IED) बारूद से लैस गाड़ी जिसे IED की तरह इस्तेमाल करना या आत्मघाती की तरह, भीड़ के बीच आर्म्ड अटैक, या स्टैंड ऑफ अटैक इत्यादि नये-नये तरीकों से मानव त्रासदी को अंजाम दिया जा रहा है और इनोसेंट जनता बेमौत कीड़े मकोड़ों की तरह मारी जा रही है। IED धमाकों और वीभत्स आर्म्ड आतंकी घटनाओं से हमारा देश भी अछूता नहीं है देश का आधा हिस्सा जम्मू कश्मीर, नार्थ ईष्ट और नक्सल प्रभावित क्षेत्र (रेड कॉरिडोर) जहां पूर्ण प्रभावित है वहीं देश की राजधानी व आर्थिक राजधानी सहित देश का बाकी हिस्सा आंशिक रूप से प्रभावित है। देश के अंदर बहुतायत मात्रा में ANE (anty nationalist elements) की मौजूदगी है ये कब कहाँ घटना को अंजाम दे दें , देश की खुफिया एजेंसी और सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी है।

कहते हैं जब तक आदमी को ठोकर नहीं लगती वह संभालता नहीं परंतु ऐसा नहीं कि हमारे देश पर ठोकर नहीं लगी 26/11 जैसे जघन्य आत्मघाती हमला मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट, सुकुमा, दंतेवाड़ा आदि जैसे IED हमलों से निर्दोषों के खून के धब्बे अभी सूखे नहीं और आये दिन इन घटनाओं से मानवता की आत्मा कराह उठती है, किसी व्यक्ति विशेष के परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो कहते हैं दर्द उसी को होता जिसका मरता है यही आम जन भावना देश के आम आदमी पर हावी है जिस परिवार का खेवनहार, चिराग या प्रिय ऐसी घटनाओं का शिकार हुआ है चाहे उसमें सुरक्षाबल हो या आम निर्दोष उन परिवारों की आत्मा में झांके तो फिर पता चलेगा जीवन जीते जी कैसे कष्टप्रद जहन्नुम बन जाता है। आज हमारे देश में सरकार व सम्बंधित विभागों और मीडिया द्वारा आतंकी घटनाओं की जानकारी सूक्ष्म रूप में दी जाती है और घटना के बाद हाईप्रोफाइल मीटिंग, डिबेट, सेमिनार संगोष्ठियां, रिसर्च और प्रिवेंशन की चिन्ता चिता की आग के साथ बुझ जाती है इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा। विश्व की वृहद लोकतंत्र की स्वतंत्र मीडिया का हाल ये है कि आम जनजागरण और राष्ट्र रक्षा के मुद्दों को छोड़ कर किसी एक राजनीतिक पार्टी की गोद में बैठ चाटुकारिता से जनता को दिग्भ्रमित करती आयी है और सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने वालों का जाल बना है ऐसे में इस संवेदनशील मसले पर सतर्कता और जागरूकता आम जन के जीवन व्यवहार में कैसे लाया जाय यह देश के बुद्धिजीवियों और नीति नियन्ताओं के लिए मंथन व चुनौती का काम है। ISIS, अलकायदा जैसे दुर्दांत वैश्विक आतंकी संगठनों का अंकुर देश में अंकुरित हो चुका है और इस अंकुर को नष्ट करने में आम जनता की सतर्कता और जागरूकता सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ा कारगर हथियार साबित हो सकता है व देश के अंदर मौजूद आतंकियों के सफेद संरक्षकों के मंसूबों को ध्वस्त किया जा सकता है। आज जिस प्रकार देश की राजनीति पतितता कुर्सी की भूख के चलते व्यग्र हुई है और विरोध का उग्र तरीका इस्तेमाल किया जा रहा है ऐसी वारदातों और उग्र लोगों की भावनाओं का आतंकी आराम से फायदा उठा सकते है इसलिए देश में ऐसे हिंसक प्रदर्शनों के लिए कड़े कानून की जरूरत है। सुरक्षा बलों के साथ आम जनता को चाहिए कि ऐसी भीड़ का बारीकी से अवलोकन करें कि इस प्रदर्शन की आड़ में कोई देश का दुश्मन बड़ी अनहोनी न कर दे यह एक भारतीय होने के नाते अपने हित के संघर्ष के साथ देश हित और जनहित के लिए आवश्यक है ताकि कोई बड़ी जनहानि होने से बचाया जा सके।

वर्तमान में सूचना और सोशल मीडिया क्रांति का प्रभाव जहां एक ओर ऐसे जघन्य आतंकी घटनाओं के लिए ईँधन का काम कर रहा है वहीं इन माध्यमों को सतर्कता व बचाव प्रक्रिया (Prevention Measure) के रूप में बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता। आज स्मार्टफोन लगभग देश की आधा से अधिक जनता के हाथों में है इन स्मार्ट फोनों के माध्यम से संदिग्ध व्यक्ति और डिवाइज (वस्तु) की सही स्थिति और उपस्थिति सुरक्षा एजेंसी के साथ अन्य लोगों को कम समय में पहुंचाई जा सकती है लेकिन ध्यान रहे भ्रामकता से बचा जाय और न ही हर खबर को भ्रम समझा जाय , विश्व के कतिपय देशों में घटित आतंकी घटनाओं का कम प्रभाव और कम समय में आतंकियों के खात्मे में वहां की जनता की अवेयरनेस काम आयी है उसमें जनवरी 16 पेरिस सीरियल आर्म्ड अटैक हो या अभी हाल में हुए मेनचेस्टर हमला आदि शामिल हैं। आज के माहौल को देखते हुए चाहिए कि देश के हर नागरिक विशेषकर महानगरों में रहने वाले व्यक्ति के जेब में अनिवार्य एक दिशा निर्देश पुस्तिका दी जाय और हर एक सार्वजनिक जगह पर पोस्टर बैनर और ऑडियो विज़ुअल जागरूक संदेश दिया जाय ताकि आम आदमी की सोच से यह बेचारा और हर लावारिस वस्तु किस्मत से मिली या मेरा क्या छोड़ो का नजरिया बदला जा सके।

आतंकवाद और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में हर दिन एक न एक धमाका हो रहा है और कोई न कोई इनोसेंट चपेटा जा रहा है फिर भी वहां के व्यक्ति विशेष और सरकारी सतर्कता व जागरूकता में कोई बदलाव नहीं आ रहा है जिसका मर रहा है वह रो रहा है जो बच गया अल्लाह की रहमत समझता है। अगर हर व्यक्ति किसी संदिग्ध वस्तु के बारे में अवेयरनेस रखता है तो समय रहते एक बड़ी घटना को रोक जा सकता है या उसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। मैं तो यह मांग करूँगा की ऐसे क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से बतौर IED awareness ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। अंत में मैं देश हित और जनहित के लिए हमारी सिखलाई व मेरे व्यक्तिगत कुछ सुझाव हैं जिन पर अमल किया जाय तो आज आक्रांत इस चैलेंज का मुक़ाबला किया जा सकता और अपने परिवार को बचाने के साथ देश के निर्दोष नागरिकों को बचाने का पुण्य कमाया जा सकता है।

आम व्यक्ति विशेष को ध्यान देने और करने वाली बातें:-

1. कहीं भी किसी भी लावारिस चीज को न छुएं और उसे संदिग्ध मान कर जल्द से जल्द नजदीक सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करे ये आम तौर पर लालच वाली होती है जैसे लेपटॉप, टेब, मंहगा बैग, सूटकेस, घड़ी , ट्रांजिस्टर, मोबाइल फोन, टॉर्च, पॉवर बैंक, खाने का टिफिन, खाने की वस्तु बच्चों के खिलौने इत्यादि।

2. ऐसी चीजों या जगह को इग्नोर न करें जो आपको अपनी वास्तविक स्थिति से हट कर अलग थलग लगे।

3. अगर आप रिमोट एरिया से हो या वहां किसी कार्य को अंजाम दे रहे हो तो किसी भी रास्ते को सेफ न माने कहीं अनप्रोपर बिजली की तार, ट्रिप वायर, कोई टिन, मरा हुआ जानवर, पत्थरों की ढेरी, खुदी मिट्टी , दबी घास इत्यादि अनप्रोपर लगती है तो उसे संदिग्ध माने।

3. भीड़ भाड़ वाले इलाके में लावारिस खड़ी साइकिल, मोटर साइकिल, कार इत्यादि वाहन कोई छोड़ जाता या कोई व्यक्ति इन वाहनों में कोई चीज रख के तुरंत निकल जाता हो तो सुरक्षाबलों को तुरंत जितना जल्दी हो सूचित करें।

4. कहीं किसी बड़े आयोजन जैसे रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिता, धार्मिक आयोजन, कोई सेरेमनी इत्यादि होने से पहले या दौरान संदिग्ध व्यक्ति टोह लेता मिले, ऐसे व्यक्ति के हाव भाव, नजर, व्यवहार, पहनावे जैसे बड़े और ज्यादा कपड़े, बड़ा बैग व अलग हरकत से अनुमान लगाया जा सकता वैसे यह अनुमान लगाना आम व्यक्ति के लिए मुश्किल है लेकिन शकिया नजर और थोड़ा मनोविज्ञान का इस्तेमाल करके अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है ध्यान रहे आपने केवल शक करना है छानबीन नहीं।

5. किसी भी प्रकार के वाहन को कोई लापरवाही और अंधाधुंध स्पीड में चला रहा हो और रोड सेफ्टी प्रिवेन्शन का ध्यान न रख कर चल रहा हो उसकी रिपोर्ट तुरंत पुलिस या सेक्युरिटी फोर्स को दें।

6. कोई व्यक्ति कहीं भी सुरक्षा जांच से बच निकलने की कोशिश कर रहा हो या बच निकल गया हो इस प्रकार का व्यक्ति पक्का क्राईमर है बशर्ते वह आतंकी न हो।

7. कोई व्यक्ति अनप्रोपर तरीके या कोड वर्ड में बात कर रहा हो या किसी पब्लिक साईबर बूथ में रोज कॉल या इंटरनेट सर्फिंग करता हो उसे भी संदिग्ध माने और निगरानी रखें।

संक्षेप में कहें तो आतंकवाद की तकनीकी इतनी वृहद और आधुनिक है कोई भी वस्तु या जगह नहीं बची जिसका इस्तेमाल आतंकियों द्वारा IED के लिए न किया गया हो, जहां सुरक्षा एजेंसियां एक का तोड़ निकालती आतंकवादी एक कदम आगे नई तकनीकी को ईजाद करते आये हैं।

सुरक्षाबल के सदस्य को ध्यान व अमल में लाने वाली बातें:-

1. देश के सुरक्षा तंत्र से जुड़े सभी सैनिक, अर्धसैनिक, केंद्रीय पुलिस बल, राज्य पुलिस बल व गुप्चर संस्थाओं के मेंबर्स का नैतिक दायित्व है कि उपरोक्त सभी बातों का ध्यान देने के साथ अमल में लाना अनिवार्य है साथ ही खुद भी सतर्क रहना होगा और अपने आस-पास के लोगों को भी सतर्क रखना है और जानकारी देकर जागरूक करना होगा चाहे ड्यूटी, आकस्मिक ड्यूटी या छुट्टी पर ही क्यों न हो अपनी शकिया निगाह हमेशा दौड़ाते रहना चाहिए।

2. मेरा तो क्या है चुप-चाप निकले का रवैया छोड़ना जरूरी है।

3. किसी अनप्रोपर जगह जहां तैनाती न हो या छुट्टी पर हो ऐसे स्थानों पर फिजिकल पहल से ज्यादा वहां के नजदीकी सुरक्षा एजेंसी को सही इतला देना और सहयोग करना हितकर होगा।

4. बिना जानकारी, अधूरी जानकारी या बिना RSP (रेंडरिंग सेफ प्रोसीजर) अर्थात इलाके को बम थ्रेट से सुरक्षित करने वाले इक्विपमेंट के बिना किसी संदिग्ध वस्तु को न छेड़ें या कार्यवाही न करे यानी डेड हीरो न बने।

5. बिना हुकम के सस्पेक्टिव डिवाईस पर कार्यवाही न करें और बम डिस्पोजल स्क्वॉड को इतला करें व उत्सुकता से बचें।

6. सिविल जनता को इलाके से सेफ करें, भीड़ इकठ्ठा न होने दें और जनता को भरोसा दिलाएं दहशत न फैलाएं दहशत फैलाने से रोकें जनता जल्दी भगदड़ मचाती है जिससे ज्यादा जान माल का नुकसान होता है।

अन्य सरकारी महकमे और प्राइवेट संस्थाओं द्वारा उठाये जाने वाले कदम:-

देश की इंटेलिजेंस एजेंसी और सुरक्षा बलों द्वारा हरसम्भव पर्याप्त कार्यवाही की जाती रही है और करते आये हैं लेकिन इनके अलावा गैर गुप्चर या गैर सुरक्षा एजेंससियों व प्राइवेट संस्थाओं को निम्न आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।

1. सभी पब्लिक प्लेस पर पोस्टर बैनर और हर समय अनाउंस से सतर्कता संदेश व सुरक्षित बचाव की कार्यवाही को ब्रॉड कास्ट किया जाय।

2. प्रिंट मीडिया दैनिक, साप्ताहिक, मासिक समाचार पत्र, न्यूज लेटर, मैगजीन आदि में नित्य आतंकवादी घटनाओं से संबंधित सतर्कता व प्रिवेन्शन मेजर कॉलम कॉमर्शियल विज्ञापन की तरह अन्यवार्यता से छपवाये जाय।

2. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आकाशवाणी, एफ एम रेडियो, टीवी इत्यादि में हर कॉमर्शियल ब्रेक में सतर्कता ऐड अनिवार्य रूप से प्रसारित किये जाय।

3. सोशल मीडिया में सरकार के वैध अकाउंट से नित्य अलर्ट और प्रिवेन्शन मेजर पोस्ट करना व उचित खबर व सजेशन देने वालों को ईनाम देने का प्रबंध किया जाय।

4. सभी प्रकार के प्राइवेट पब्लिक प्लेस जैसे शॉपिंग मॉल , रेस्तरां, पिकनिक हब, धार्मिक स्थल, सिनेमा हॉल, बड़े मार्केट, मेले, रैलियां व खेल स्थलों इत्यादि जमावड़ा की जगह पर जिम्मेवार संस्था द्वारा अलर्ट, डू और डोनट्स लिखित, ऑडियो विज़ुअल रूप में नित्य प्रसारित किया जाय और पर्याप्त सुरक्षा चैकिंग स्क्वॉड की नियुक्ति की जाय।

5. सभी प्रकार के पब्लिक वाहनों पर सतर्कता विज्ञापन चिपकाए जांय।

6. स्वैच्छिक स्वयं सेवी संस्थाओं को जनजागरूकता अभियान के लिए प्रोत्साहित किया जाय।

7. देश के अंदर एक हेल्प लाईन नंबर और मोबाईल ऐप इस प्रकार की घटना की सूचना के लिए जारी किया जाय।

उपरोक्त सर्वत्र जगहों पर आतंकवाद सतर्कता संदेश और निरोधक कार्यवाही करना या होने का मेरा मतलब देश के अंदर दहशत फैलाना या दहशत का माहौल बनाना नहीं बल्कि हर व्यक्ति के मसल मेमोरी में हर समय खुद चौकन्ना रहना और दूसरे को रखना है ताकि अपने देश को इराक सीरिया बनाने से रोका जा सके। देश के सबसे निम्न वर्ग के वासिंदा जो अभी सूचना क्रांति से नहीं जुड़ा है तक ये संदेश पहुंचना जरूरी है कि खुद की उन्नति जानसलामती और राष्ट्र अखंडता के लिए उसका थोड़े से पैसों का लालच खतरनाक हो सकता है साथ ही देश के नागरिक को ये समझना होगा कि कोई भी भड़काऊ संदेश कट्टर धार्मिक उन्माद से कैसे बच सकते हैं उपद्रवी तत्व आम गरीब को ही हथियार बनाता हैं। एक रिक्शे और ऑटो वाले को बखूबी पता हो कि मेरे वाहन में छूटा हुआ समान बैग और बैठा हुआ व्यक्ति संदिग्ध हो सकता है उसे अपनी सुरक्षा एजेंसी पर इतना भरोसा हो कि वह बिना लेट लतीफ के निर्भीक हो कर सुरक्षा एजेंसी को सूचित करें इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों को अपनी पहले वाली दमन नीति से उठकर जनता से कैसे सहयोग लिया जा सकता है के लिए कदम उठाने होंगे तभी आतंकवाद रूपी दानव के कहर से विशाल भारतवर्ष को बचाया जा सकता है।

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जय हिन्द

राष्ट्रहित में जारी

लेखक :- बलबीर राणा "अडिग"

चमोली उत्तराखंड

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रचनाकार: **आतंकवाद के प्रति सतर्कता, जागरूकता, और क्रियान्वयन** / बलबीर राणा "अडिग"
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