सोमवार, 31 जुलाई 2017

शब्द सन्धान // खुश है ज़माना // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

खुश है ज़माना, आज पहली तारीख है। पहली तारीख को वेतन मिलता है, आप अपनी आवश्यकता की चीजें खरीद सकते हैं, थोड़ी बहुत विलासता के लिए भी छूट ले सकत...

प्रेमचंद जयन्ती विशेष : " कलम के सिपाही " // वीरेन्द्र त्रिपाठी

आधुनिक हिन्दी साहित्य की चर्चा 'मुंशी प्रेमचंद 'के साहित्य के बगैर अधूरा है। प्रेमचंद ने अपने लेखन में भारतीय समाज में व्याप्त कुरू...

व्यंग्य // साहित्य का अग्निपथ // अमित शर्मा (CA)

चतुर्वेदी जी मंझे हुए साहित्यकार हैं। वे हमेशा साहित्यिक साधना में लीन रहते हैं, उनके चारों और हमेशा साहित्य भिनभिनाता रहता है। साहित्यिक त...

सावधान ! कहीं नज़र न लग जाये ? // डॉ० कुसुमाकर शास्त्री

           हम अपने दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार का व्यवहार करते लोगों का अनुभव लेते रहते हैं । जितने लोग हैं उतनी ही प्रकार की उनकी प्रवृत्...

सर्वकालिक प्रासंगिक -रामचरित मानस // (तुलसी जयंती पर विशेष ) // सुशील शर्मा

तुलसी का ‘रामचरितमानस’ हिन्दी साहित्य का सर्वोत्तम महाकाव्य है जिसकी रचना चैत्र शुक्ल नवमी 1603 वि. में हुई थी। जिसको तैयार करने में 2 वर्ष ...

रविवार, 30 जुलाई 2017

1 जुलाई - प्रेमचंद जयन्ती पर विशेष // प्रेमचंद : संघर्ष और साहस से बने साहित्य-सम्राट // डॉ. चन्द्रकुमार जैन

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का निजी जीवन संघर्ष से भरा रहा। स्मरण रहे कि 8 फरवरी 1921 को मुंशी प्रेमचंद ने महात्मा गाँधी का भाषण सुनकर अपनी 25...

श्रीरामकथा के अल्‍पज्ञात दुर्लभ प्रसंग :- त्रिभुवन में मेघनाद (इन्‍द्रजित्‌) का वध कौन कर सकता था ? मानसश्री डॉ.नरेन्‍द्रकुमार मेहता

श्रीरामकथा के अल् ‍ पज्ञात दुर्लभ प्रसंग :- त्रिभुवन में मेघनाद ( इन् ‍ द्रजित् ‌) का वध कौन कर सकता था ? मानसश्री डॉ . नरेन्...

राजस्थान की लोक संस्कृति :एक विहंगम दृष्टि // यशवंत कोठारी

रंगीले राजस्थान के कई रंग हैं. कहीं रेगिस्तानी बालू पसरी हुई है तो कही अरावली की पर्वत श्रृंखलायें अपना सर ऊँचा कर के खड़ी हुई है .इस प्रदेश ...

कहानी // फुल्की का स्वंयवर // रवि श्रीवास्तव

अरे आज ये बस को क्या हो गया है ? कितनी देर से इंतजार कर रहे हैं? समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है। किसी और के पहुंचने से पहले हमें वहां होना चाह...

॥कविताएँ॥ अशोक गुजराती

॥कविताएँ॥ निश्‍छल         1 नैनीताल गये थे दादाजी परिवार के संग पहाड़ी पर बैठी थी उनके पास उनकी पोती सवा दो साल की माहू फ़ोटो खींच र...

शनिवार, 29 जुलाई 2017

इथियोपिया की लोककथाएँ - 1 // 2 - न्याय में अंतर // सुषमा गुप्ता

इथियोपिया की लोककथाएँ - 1 // 1 - नौ हयीना और शेर यहाँ पढ़ें 2 न्याय में अन्तर एक बार एक शेर और एक हयीना दोनों खाना ढॅूढने निकले। शेर को एक ब...

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