व्यंग्य जुगलबंदी 42 –बरसात की बहारें–नज़ीर अकबराबादी की हास्य-व्यंग्य कविता

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

व्यंग्य की जुगलबंदी जारी है. 42 हफ़्ते से निरंतर. बहुतों को लग रहा है कि एक ही विषय पर 25 लोग लिखें तो रिपीटीशन ही रिपीटीशन. तो आइए, इस सप्ताह कुछ बदलाव करते हैं, और, कोई दो सौ साल पुरानी हास्य व्यंग्य रचना आपके समक्ष रखते हैं. विषय, जाहिर है – बरसात है.

najeer1

najeer2

najeer3


najeer4

najeer5

najeer6

najeer7

----

उर्दू की प्रतिनिधि हास्य व्यंग्य कविताएँ से साभार.

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "व्यंग्य जुगलबंदी 42 –बरसात की बहारें–नज़ीर अकबराबादी की हास्य-व्यंग्य कविता"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.