सोमवार, 10 जुलाई 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 42 –बरसात की बहारें–नज़ीर अकबराबादी की हास्य-व्यंग्य कविता

व्यंग्य की जुगलबंदी जारी है. 42 हफ़्ते से निरंतर. बहुतों को लग रहा है कि एक ही विषय पर 25 लोग लिखें तो रिपीटीशन ही रिपीटीशन. तो आइए, इस सप्ताह कुछ बदलाव करते हैं, और, कोई दो सौ साल पुरानी हास्य व्यंग्य रचना आपके समक्ष रखते हैं. विषय, जाहिर है – बरसात है.

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उर्दू की प्रतिनिधि हास्य व्यंग्य कविताएँ से साभार.

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