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शब्द संधान ॥ ‘ज़रा सा टेढ़ो हो जा’ ॥ डा. सुरेन्द्र वर्मा


आदमी का टेढा होना कई बातों पर निर्भर करता है | वह शुरू से ही टेढ़ा हो सकता है, या किन्हीं कारणों से जानबूझ कर टेढ़ा हो जाता है, अथवा उस पर टेढापन लाद दिया जाता है | शेक्सपियर ने महानता के लिए कहा था न - कुछ लोग जन्मजात महान होते हैं, कुछ महान बन जाते हैं और कुछ लोगों पर महानता थोप दी जाती है | वही बात आदमी के टेढ़ेपन पर लागू होती है | और जो बात आदमी पर सही बैठती है वह किसी राष्ट्र या देश पर भी उतनी ही सटीक हो सकती है | अब आप चीन को ही ले लें | शुरू से टेढ़ा रहा है | उसे इस बार ज़रा सा मौक़ा क्या मिल गया कि उसने डोकलाम (डोका ला) क्षेत्र पर अपनी टेढ़ी नज़र डालना शुरू कर दी | भारत को टेढ़ी आँख से देखने लगा | ज़ाहिर है कि यह केवल गीदड़ भभकी ही है | लेकिन ऐसे टेढ़े देश से निबटना भी तो टेढ़ी-खीर ही है |

‘टेढा’ सीधे का विलोम है | सीधा सच्चा इंसान टेढ़ा नहीं होता जब तक कि उसे मजबूर न कर दिया जाए | जो सीधी नहीं है वह लकीर टेढ़ी होती है | सीधी लकीर खींचना बड़ा मुश्किल होता है, लेकिन कभी कभी जानबूझ कर टेढ़ी लकीर खींचनी पड़ती है | सीधे मुंह बात न करना टेढ़ा बोलना है | सामने वाले को नाराज़ करना है और अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करना है | टेढ़ा कुटिल होता है, दु:साहसी होता है | हटी और चिड़चिड़ा होता है | उजड्ड और विनय रहित होता है | वह सीधा-सादा रास्ता नहीं अपनाता | टेढ़े मेढ़े मार्ग पर चलता है | उसकी चाल में वक्रता होती है | उसका अगला कदम कहाँ पडेगा, कोई नहीं जानता | उसकी चाल गुमराह करने वाली होती है | टेढ़े के साथ जब सीधा जुड़ जाता है तो वह भी टेढ़ा ही हो जाता है | टेढ़ी-सीधी सुनाना टेढ़ी बात कहना ही है | टेढ़ा -सीधा बोलना भी टेढ़ा ही बोलना है |

टेढ़ा कुछ भी हो सकता है | अगर किसी बच्चे के दांत टेढ़े हैं तो उन्हें सीधे करने की तरकीब दन्त चिकित्सक के पास रहती है | फैशन के हिसाब से हम अपने घुंघराले बालों को सीधा बना लेते हैं और सीधे बालों में पेंच-ओ-ख़म डाल लेते हैं | कभी अपनी मांग सीधी कर लेते हैं तो कभी टेढ़ी निकालते हैं | सीधा हमेशा ही सीधा नहीं बना रहना चाहता | टेढ़े रहने का भी अपना एक आकर्षण है | हमारे कृष्ण-कन्हाई बांके बिहारी थे त्रिभंगी लाल थे | राजस्थानी नायिका का जब पल्ला गिर जाता है तो वह शिद्दत से चाहती तो यही है कि उसका प्रेमी उसे नज़र भर देख ले लेकिन जाहिरा तौर पर कहती यही है, “ज़रा सा टेढ़ो हो जा बालमा म्हारो पल्लू लटके !”

टेढ़ा अन्य टेढ़े शब्दों से अपना जोड़ा बनाने में चूकता नहीं | जैसे,‘टेढ़ा -मेढ़ा’,‘टेढ़ा -बकचा’ ,‘टेढ़ा -बैंचा’ इत्यादि; कोई नहीं मिलता तो खुद का ही जोड़ा बना लेता है – टेढ़ा -टेढ़ा | शतरंज की जब कोई गोट प्यादे से फर्जी हो जाती है तो ‘टेढ़ी-टेढ़ी’ चलने लगती है | यह बात आदमी-औरतों पर भी लागू होती है – कौन नहीं जानता !

कहते हैं पीसा की मीनार धीरे धीरे बराबर झुकती ही चली जा रही है, और दिन-ब-दिन टेढ़ी होती जा रही है | भारत में भी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ज्वालामुखी के पास एक राम-मंदिर है | कहते हैं वनवास के दौरान पांडवों ने इसका निर्माण किया था | सौ सवा साल पहले एक भूकंप में यह टेढ़ा हो गया | इसकी चारदीवारी से लेकर दरवाज़े तक, सभी टेढ़े हो गए और आज तक टेढ़े ही हैं | इस मंदिर तक पहुँचने का मार्ग भी जंगल से होकर है | बड़ा डरावना और टेढ़ा -मेढ़ा है | आदमी की तरह इमारतें भी मूलत: टेढ़ी नहीं होतीं, बाद में किन्हीं कारणों से अलबत्ता हो सकती हैं, और बेशर्मी से खड़ी भी रह सकती हैं |

कुल मिला कर टेढ़ापन, वह इंसानों में हो या इमारतों में अच्छा नहीं माना जाता | लेकिन कभी कभी अपना काम निकालने के लिए टेढ़ा होना ज़रूरी भी हो जाता है | कहावत है न, घी टेढ़ी उंगली से ही निकलता है | फल तोड़ने के लिए जिस लग्गी का इस्तेमाल करते हैँ , वह भी सिरे पर टेढ़ी ही होती है, कहते भी उसे “टेढ़ी” ही हैं |


डा. सुरेन्द्र वर्मा ( मो.९६२१२२२७७८)
१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड इलाहाबाद -२११००१
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टेढ़े के जोड़ीदार बहुत आकर्षक है।जानकारी प्रदान करने वाला बहुत मज़ेदार लेख।

बहुत खूबसूरत ढंग से पेशकारी!!मनोरंजक !!

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