सोमवार, 10 जुलाई 2017

व्यंग्य - नजर लागि राजा – सुशील यादव

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एक गाना,"नजर लागी राजा,तोरे बंगले पर " जो बरसो पहले सुना था जिसके लिखने वाले ने शायद सोच लिया हो कि , आज से पचास साल बाद,किसी बिहार-प्रांत के कथित राजा के बंगले पर सरकारी अमले की नजर लग जायेगी |

कथित राजा पर सरकारी-तंत्र के तजुर्बे-टोटके आजमाए जाएंगे |

सरकारी अमलो में व्यर्थ दौरा-भत्ता बनाने वालों को, कुछ काम सौंप कर, उनकी मारक- क्षमता का पूर्वाभास, किसी युद्ध के ठीक पहले की, रिहल्सल की तरह कर ली जायेगी |

देखने वाली बात ये होगी कि,कतिपय सरकारी फार्म के घास चरने वालों में ये चरितार्थ कर पाने का माद्दा है या नहीं कि "जो मैं होती राजा बन की कोयलिया" अंदाज में कुहकने के लिए वे सही बंगला तलाश कर पाते हैं अथवा नहीं ?

सरकारी अमले के कुछ "जग्गू किस्म के जासूस", इस बहाने राजा के बंगले पर कुछ दिन के लिए छोड़े गए |

- 'क्या खबर लाये हो धौलिया', अंदाज मे आका रिपोर्ट लेते |

-वे रिपोर्टते कि मैं माई-बाप बेनामी संपत्ति का मामला फिट हो सकता है |आगे बढ़ें ....? वे अस्पष्ट गाली सहित गुर्राते ..... सीधे -सीधे घूस का मामला नहीं बनता क्या .....?अगला इतने दिनों तक बड़े-बड़े गाय -बछिया के खटाल लगाए बैठे रहे तुम तनिक से छाछ का तोता बताये रहे हो | निक्कम्मे हो सब के सब | पूरे मोहकमे का नाम मिटटी में मिला दिए रहे हो ....|

- क्या सोच के आये थे ,आलाकमान खुश होगा ...... शाबासी देगा ....| नालायकों ! कहे देते हैं , आज से ठीक महीने बाद फिर पुख्ता सबूत के साथ इधरिच रिपोटो |

अफसर अफसोसियाते| खिसियाते | और अपनी बारी की प्रतीक्षा में मौक़ा पाते ही खिसक लेने में महारत हासिल करते |

मायूस अंदाज में खिसकते हुए सोचते ,काश कि ,.....

-मुँहफट जूनियर लोग सजेस्ट करते साहेब ,

"जो मैं होती राजा बेला चमेलिया ,

लिपट रहती राजा तोरे बंगले पर "

वाले अंदाज में कार्यवाही करें .....?

वैसे इस गाने के रचयिता को लगभग आभास था, कि 'विज्ञान' 'बिहार-नालन्दा क्षेत्र' में भी कुछ हद तक तरक्की कर लेगा |

सी सी केमेरा वगेरा उधर आ जाएंगे | और केमेरा को 'बेला-चमेलिया' की आड़ में रखने की जुगत , खुफिया तौर खुफिया विभाग के लोग कर लेंगे | पे फिट करने के खुफियापंथी काम को आसान बनाये जा सकने वाले प्लान ढूंढने लगे |

जूनियर की बात को तवज्जो दी गई | हमारे तरफ जूनियर की बात को सीधे सीधे भाव नहीं दिए जाने का चलन है, इसी के चलते सीनियर ने हिदायती फतवा भी पढ़ दिया ;

देखो ...! राजा के बंगले के खिलाप काम ज़रा जोखिम का दीखता है | वहां सिक्युरिटी तगड़ी होती है देख सम्हल के करना | बात लीक तो होनी ही नही चाहिए |

- मगर सरकारी मोहकमे में जो ये जोखिम कर ले उसकी नैया बिना रोक-टोक दूर तक निकल जाती है | प्रमोशन और पदक का मामला आगे बढ़ता है |इस हिम्मत को कहीं हिमाकत भी कहते हैं ये अलग किस्सा है |

वे लाख कोशिशों "बेला-चमेलिया" में कुछ फिट नहीं कर पाये |राजा के बंगले पर फकत दीवाली के समय झालर लटकाने के बीच -बीच में खुफिया कैमरा लटकाया जा सकता है,उन लोगों ने मीटिंग में तय करके ये आलाओं को बतला दिया |रिपोर्ट में साफ लिखा कि दीवाली आने पर झालर बंधाई के समय कुछ किया जा सकेगा |

दीवाली आते तक के समय और दूरी का गणित खुरापाती अफसर जल्द समझ गए | तोड़ निलालने के नाम पर इस आइडिया में लोकल मजदूरी बेसिस पर, टपोरी मुखबिरों से काम निकल सकने का बंदोबस्त किया गया|

उनके आका ने फिर तलब किया ,ये क्या सुन रहा हूँ, तुम लोग "कारी-बदरिया" प्लान पर जाने की सोच रहे हो ,वो जो गाने में मुखड़े के बाद की लाइन है

"जो मैं होती राजा कारी बदरिया ,बरस रहती राजा तोरे बंगले पर "

गाने के लेखक के दूर दृष्ठि पर पीठ ठोकने नहीं थपथपाने का मन करता है | ये अंदाजा कि किसी आषाड शुक्ल पक्ष में गुरुपूर्णिमा से पूर्व किसी बंगले पर एक घनघोर 'आर्टिफिशियल कारी बदरी' छाएगी | जिसकी बाढ़ सब कुछ बहा ले जायेगी |

आला अफसर ने सर को दिया झटका .... देखो भाई ....!आवाम की सेमपेथी उधर नहीं करने का | बेजा, बेमौसम बरस के बंगला उजाड़ देने से गड़बड़ हो जाना माँगता | बंगला सेफ रहे ,अपने सेफ-अली माफिक |

मालिक लोगों को भाड़ में झोंकना है, किसी कीमत पर ,हर हाल में ,ये तुम्हारे प्लाटून कमांडर को समझा दो |

जो हुकुम मेरे आका की तर्ज पर अभियान की राकेट गति जारी हो चुकी है | इस यान को हर हाल ठीक इलेक्शन के पहले लेंड हो जाना है |

इससे पहले कि अंत वाले अंतरे पर पहुँचूँ जिसमे कहा है कि.

"जो मैं होती राजा तोरी दुल्हनिया,

मटक रहती राजा तोरे बंगले पर "इस सीन को शूट नहीं कर सका ,दरअसल ,

पानी के चन्द ठंडे छीटे मुझ पर पड़े ,रात सोने से पहले काले घनेरे बादल देखे थे|यही मेरे बिस्तर की खिड़की में बौछार बन के चहरे पर पड़ने लगे |

मैं उठ कर खिड़की बंद करने लगा |

पता नहीं अनजाने मेरी नजर खिड़की के नीचे, सी आई डी वाले प्रधुम्न की आशंका में यूँ ही चली गई |और हाँ , मनी प्लांट की एक बेल जो ,बस खिड़की को छूने वाली है, उसे किसी केमेरे से सेफ पाया |

जम्हाई लेते फिर बिस्तर में घुस गया | बारिश सुबह तक जोर की हुई|

सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर Zone 1 Street 3

दुर्ग (छ.ग.)

09408807420

susyadav7@gmail.com

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