रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

व्यंग्य // साहित्य का अग्निपथ // अमित शर्मा (CA)

सत्यभामा माजी की कलाकृति

चतुर्वेदी जी मंझे हुए साहित्यकार हैं। वे हमेशा साहित्यिक साधना में लीन रहते हैं, उनके चारों और हमेशा साहित्य भिनभिनाता रहता है। साहित्यिक तेवर को ही वे अपना ज़ेवर मानते हैं। अपनी रचनात्मक चेत "ना" पर सवार होकर वे काफी लंबी साहित्यिक दूरी तय कर चुके हैं। इतना दूर आने के बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती क्या थी, अपना साहित्यिक सफ़र शुरू करना या फिर सफ़र शुरू करने के बाद तुरंत वापस ना लौट जाना। साहित्य के क्षेत्र में टाटा नैनो से शुरुआत करके वो टाटा-407 तक पहुँच चुके हैं, अब सभी उनके साहित्य को टाटा-टाटा करने की राह देख रहे हैं। उनका सृजित साहित्य काफी दूर तक पहुँचा है, अब दूर दूर के पाठक उनके साहित्य से तौबा कर रहे हैं।

वे बिना डगमगाए साहित्यिक डग भरते हैं जिसके चलते उनके पाठक आहें भरते हैं। अपनी प्रबल साहित्यिक निष्ठा के चलते चतुर्वेदी जी बड़ी ही निष्ठुरता से कविता, कहानी, व्यंग्य, गीत और ग़ज़ल को ठिकाने लगा चुके हैं। चतुर्वेदी जी साहित्यिक कर्मयोगी है, प्रति दिन कुछ ना कुछ नया रचते हैं और अन्य रचनाकारों को भी इसके लिए उकसाते हैं। मेहनत और लगन से चतुर्वेदी जी की छवि साहित्य जगत में ऐसी बन चुकी है कि उनके धतकर्म को भी रचना कर्म मान लिया जाता है। साहित्य विशेषज्ञ "साहित्यिक मनरेगा" शुरू करने का श्रेय चतुर्वेदी जी को ही देते हैं जिसे वो बड़ी विनम्रता से ड़कार देते हैं। उनके द्वारा रचित साहित्य में काफी वजन होता है और इस बात की गवाही उनकी सोसाईटी का रद्दी तोलने वाला कबाड़ी भी देता है।

[ads-post]

साहित्य जगत में चतुर्वेदी जी का नाम काफी इज़्ज़त से लिया जाता है क्योंकि वे उन मुट्ठी भर लोगो में से है जो पहले रात-दिन मेहनत करके साहित्य सृजन करते हैं फिर उससे दुगुनी मेहनत करके अपने ही कमाए धन से उसे प्रकाशित और प्रचारित भी करते हैं। आज के स्वार्थपरक समय में तन-मन-धन से साहित्य की ऐसी निस्वार्थ सेवा करके भी चतुर्वेदी जी को अहम छू तक नहीं पाया है। इतनी ऊँचाई पर पहुँचने के बाद भी चतुर्वेदी जी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। चतुर्वेदी जी के करीबियों का मानना है कि इससे उनको  साहित्य की जड़ें काटने में ज़्यादा दूर नहीं जाना पड़ता।

साहित्य के प्रति उनके समर्पण का आलम यह है कि जिस दिन वो साहित्य सृजन नहीं कर पाते उस दिन बेचैन होकर साहित्य वमन करने लगते हैं।  साहित्य ने उनके मन मस्तिष्क में इस तरह घर कर लिया है कि "हायहुकू-हायहुकू हाय हाय"  भी उन्हें "हाइकु" सुनाई पड़ता है।

चतुर्वेदी जी की रचनाए काफी गहराई लिए होती है, इसलिए पाठक के साथ संपादक भी उसमें उतरने से डरते हैं।  चतुर्वेदी जी तब तक किसी अख़बार या पत्रिका को प्रसिद्ध नहीं मानते जब तक उनकी कोई रचना उसमें प्रकाशित नहीं हो जाती है। बहुत "काशन"(Caution) लेकर उनकी रचनाओं का "प्रकाशन" होता है। साहित्यिक जानकर मानते हैं कि अब समय आ गया है कि चतुर्वेदी जी की रचनाओं को "स्वास्थ्य के लिए हानिकारक" चेतावनी के साथ ही प्रकाशित किया जाए। 

साहित्यिक और रचनात्मक ईमानदारी के मामले में चतुर्वेदी जी का हाथ बिलकुल साफ़ है और इसी के चलते वो सभी सम्मानित पुरस्कारों पर हाथ साफ़ कर चुके हैं। "लिखने से ज़्यादा दिखने" के अपने आदर्श के चलते साहित्यिक चर्चाओं और संगोष्ठियो में भी चतुर्वेदी जी छाए रहते हैं। हर युवा रचनाकार, चतुर्वेदी जी से दोस्ती और संपर्क बनाए रखना चाहता है ताकि वो साहित्य के साथ साथ राजनीति के गुर भी सीख सके। साहित्य में पैर ज़माने के लिए चतुर्वेदी जी ने वरिष्ठ साहित्यकारों के पैर दबाए हैं और वो इस बहुमूल्य परंपरा को केवल अपने तक सीमित रख कर किसी साहित्यिक पाप के भागी नहीं बनना चाहते हैं। साहित्यिक अग्निपथ पर चतुर्वेदी जी की रचनात्मक कदमताल साहित्य की अमूल्य निधि है।

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget