गुरुवार, 31 अगस्त 2017

लाल पान की बेगम - फणीश्वर नाथ रेणु

दृश्य:- 1 बिरजू:- माँ, एक शकरकंद खाने को दो ना। माँ: - एक दो तमाचा मारती है ले ले शकरकंद और कितना शकरकंद लेगा? बिरजू मार खाकर आँगन में लोट र...

कहानी // एक लेखनी की मौत // स्वराज सेनानी

सुधाकर अपनी पहली साहित्यिक कृति के प्रकाशन के वक्त, बच्चा पैदा होने जैसे दर्द और कष्ट के सामान अनुभवों से गुज़र रहा था । कविताओं की अपनी पहली...

नीरजा हेमेन्‍द्र की कविताएँ

नीरजा हेमेन्‍द्र 1-     ’’ परिवर्तन शाश्‍वत्‌ है ’’ कोहरे-सी घनीभूत होती जा रही हैं भावनायें तुम्‍हारी स्‍मृतियों के साथ देने लगी हैं दस...

बुधवार, 30 अगस्त 2017

अजीत कौर से इंटरव्यू - वीणा भाटिया व मनोज कुमार झा

जब तक दलित-वंचित महिलाओं का संघर्ष सामने नहीं आता तो ऊंचे तबकों की महिलाओं का फेमिनिज्म बेकार है ये आजादी हमें आसानी से नहीं मिली है। हमने ब...

कविता गीत ग़ज़ल आदि // डॉ. कुसुमाकर शास्त्री

जंजीरा १ -   घर के सब लोग बिलाय गये ,                    कहु, कौन सहायकबाहर के। हर के हरि ने जब मात-पिता ,             दुख-दर्द दिये दुनिय...

व्यंग्य // समय, परिस्थिति और भाईलोग // कुबेर

समय और परिस्थिति दोनों अभिन्न मित्र हैं। एक दिन, समय जब आराम करने जा रहा था, उसके मोबाइल की घंटी बजने लगी। उसने फोन रिसीव किया। फोन परिस्थित...

प्रतीति (व्यंग्य)-प्रदीप कुमार साह

अपने चारों तरफ घेरा बनाए खड़ी तमाशाई भीड़ को देखते हुए मदारी अपना डमरू जोर-जोर से बजाने लगा. वैसा करते हुए मदारी को जब महसूस हुआ कि सभी तमाशाई...

साहित्य में विज्ञान लेखन // सुशील शर्मा

विज्ञान उन सभी मनोवृत्ति के तरीकों को जुटाता है जो कि सारभूत रूप में संवेदनाओं और मनोभावों के विपरीत है। विज्ञान के कड़े नियमों का अनुराग और ...

सबसे ज़्यादा बदनाम साहित्यकार - मनोज कुमार झा

बदनाम लेखक मंटो पर उनके जीवन काल में ही कई किताबें लिखी गईं। मुहम्मद असदुल्लाह की किताब 'मंटो-मेरा दोस्त' और उपेन्द्रनाथ अश्क की ...

मंगलवार, 29 अगस्त 2017

दानवीर सेठ किरोड़ीमल // बसन्त राघव // रायगढ़

वर्तमान रायगढ़ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी है, औद्योगिक नगरी के रूप में इसका तेजी से विकास हो रहा है।छत्तीसगढ़ के पूर्वी सीमान्त पर हावड़ा-ब...

सोमवार, 28 अगस्त 2017

कहानी // मैं लड़की नहीं हूँ क्या? // अमिताभ वर्मा

शाम हौले से अपना पल्लू समेट रुख़सत हो चुकी थी। रात को जवानी की दहलीज़ पर कदम रखने में देर थी। सुरेखा अपने कमरे में थी, दुतल्ले पर। छोटा-सा एक ...

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