शनिवार, 19 अगस्त 2017

व्यंग्य // नास्त्रेदमस और मैं.... / सुशील यादव


असित कुमार पटनायक की कला

जनाब नास्र्त्रेदमस ने सन बावन, यानी उन्नीस सौ बावन के बैसाख दसवी तिथि को मध्यभारत इलाके में पैदा हुए किसी शख्श का जिक्र नहीं किया अफसोस।

वे चाहते तो कर सकते थे।

इस इलाके में पैदा हुआ शख्श ,एक दिन साहित्य की आकाशगंगा का भव्य सूरज होगा ?

इसके चारों तरफ फेसबुकिया संसार का हजारों की तादात में लाइक और कमेन्ट जैसा माहौल होगा।

इसके लिखे को न चाहते हुए भी लाखों लोगों को कुनैन की गोली माफिक गुटकना ,पढ़ना होगा।

एक समय ,राष्ट्रीय स्तर पर आकलन या स्टेटिस्टिक्स पर शोध करने वाले आश्चर्य करंगे की हाड-मॉस का एक ऐसा भी शख्श अवतरित हुआ था, जिसने बाहुबली से ज्यादा ख्याति अर्जित की।

उसके सारे रिकार्ड तोड़ दिए।

पुरुस्कारों की झड़ी लगी रहती।

लौटाने का कोई मौक़ा हाथ लगता तो फक्र से कहते ,अरे नत्थू ,देख तो आले में कहीं भजन मण्डली ने पिछले साल फाग लेखन पर जो दिया था,उसे साफ-आफ कर , उसे लौटा के गौरव प्राप्त कर लें।

जनाब नास्त्रेदमस,शायद साहित्य साइड के नहीं थे।

हिंदी साहित्य की तरफ उनके समकालीनों ने ,उनका ध्यान नहीं खीचा ...? तुलसी, रसखान या उर्दू के मियाओं ने उनको प्रभावित करने की बजाय या तो अपने ईस्ट देव में डूबे रहे या बेवड़े राजाओं की जी हुजूरी चापलूसी में लगे रहे। बहरहाल ध्यान खींचा जाना चाहिए था। आज आलम दूसरा कुछ होता। ये सारे विश्व की भाषा होती। कई बार इस कमी पर हिन्दी दिवस में ये बात कहने की इच्छा होती है। खैर ये दीगर बात है।

हाँ तो उस जमाने में गूगल टाइप के उपयोगी तंत्र ईजाद नहीं हुए थे। चट खोला,बोला और हो गया,वाला वो जमाना ही नहीं था। तब बात जूं की तरह, ‘इलाक़ा ऐ ख़ास’ में रेंग कर जाती थी।

अगर हिन्दी दिग्गज विव्द्वानो को पाच सौ साल बाद की तरक्की का मालुम होता तो वे अपने किये को उनके मार्फत विज्ञापित अवश्य करवा लेते। नास्त्रेदमस कहते अमुक के लिखे का दो सौ सालों बाद पाठ कर ले तो मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। हमारे योग आले बाबा दम थोक के कहते हैं उनके सरसों तेल में कोई मिलावट नहीं है ,बतर्ज यही वे कहते ,इनकी लेखनी में सारा दम है ,शुद्ध है ,श्रेष्ठ है। इसमें प्रेयसी से लेकर प्रभु और राजा से अफसर को गाठने की अद्भुत क्षमता है।

वे हिंदी में हजार कहानी, सौ-सौ से ज्यादा पुस्तक लिखने वालो को रत्ती भर वजन नहीं दिया।

इससे हिंदी की अपार क्षति हुई।

भूगोल ,इतिहास ,राजनीति तक केन्द्रित रहे। इसी को अपने "भविष्य-वाणी " का विषय चुना। इन विषयों की भविष्य-वाणियाँ बहुत ही माकूल बैठती है। ऐसी कई की विषयों की भविष्यवाणी की घोषणा हम यहीं से आज बैठे-बैठे कर सकते हैं।

‘आज से पचास साल बाद दुनिया के पश्चिम इलाके में जबर्दस्त सुनामी विपदा आएगी जिसमे जन-धन की भारी क्षति का जोरों से अनुमान लगाया जा सकता है। दुनिया में कुछ आतंकी, इतने तूफान मचाएंगे जो दस हरिकेन की ताकत से ज्यादा होंगी।

एक पुच्छल तारा टूटकर धरती से टकराने को मचलेगा मगर दैनिक वेतन भोगी नासा के नौसिखिये उसका तोड़ निकालने में कामयाब हो जाएंगे।

फतवा देबे वाले एक धर्मगुरु को छै- तलाक का डबल डोज देके, उसकी ब्याहता बैठ जायेगी।

मेरे ख्याल से जनाब नास्त्रेदमस ने "जिसकी लाठी उसकी भैस" जैसी आजकल की विज्ञापन फिल्मो का अंदाजा नहीं किया हो ....? अन्यथा इस विषयक उनकी बात अखबारों में जरूर खुलती।

वे भैस ,गाय ,पशु ,चारा की मिक्स्चर राजनीति पर भी अनुमान लगाते और जरूर कुछ बोले होते ,बशर्ते चौरासिया नुमा कोई मीडिया वाला ,जो उन दिनों नहीं पाये जाते थे ,उनपे बलात टिप्पणी का उनपे दबाव बनाते।

उनके एक-एक भविष्य वाणी का मीडिया में पंचायत बिठा -बिठा के विश्लेषण करवाया जाता।

हर टी वी ऐंकर तब ये दावा करता कि नास्त्रेदमस आली बात , सबसे पहले उनके चैनल ने पकड़ा।

वे जबरिया भारत की राजनीति को उनके गले में बाँध के कहलवाते ,आज से ढ़ाइसौ साल बाद कोई कच्छी, बुलावे का न्योता यूँ भेजता "कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में "

भाई नास्त्रेदमस, आपने बुलावा जो दिया उसका तहे दिल से शुक्रिया। आपके कहे पर हम उधर हो भी आये ,आपने शायद पर्वानुमान लगाया कि उस मुल्कवाले घमासान मचाएंगे जिसके चश्मदीद लोग में कमी न हो इसी का इंतिजाम किये दे रहे थे ....?

नास्त्रेदमस जी आपने योग बाबा,निरोग बाबा ,बलात्कारी बाबा ,सत्ता-बाबा,सट्टा-बाबा,या बैंक -घपला बाबा के समय समय पर पैदा होने की जानकारी ही नहीं दी। आपके भविष्य ज्ञान पर कभी- कभी न खाते हुए भी शक होता है।

ये लोग , कैसे क्या-क्या जुगत भिड़ा के बेख़ौफ़ पीट रहे हैं। दूसरों के जमे-जमाये व्यापार को तरीके से किनारे लगाने वालों में इनके समकक्ष कोई और आयेगा या नहीं ....? आपकी भविष्य डिक्शनरी में कहीं ये है कि नहीं ...?

इंडिया पर आप मन्द बुद्धि के क्यों हो गए ...?

जवाब दो ....?

आपको उस जमाने में आई डी,सीबी आई ,रा ,एफ बी आई,डान या दीगर खुफिया एजेंसियां का खौफ तो था नहीं ...? जो आपका कुछ उखाड़ते ...?

बैंक घोटाले बाजों ,ढहने वाली पुलिया बनाने वालों ,खाकी धारियों पर आपकी नजरें इनायत रही। वे आपके मेप में नजर ही नहीं आये ...? चलो अच्छा हुआ ..। ये सब हमारे लोकल यीशु(ईशु) हैं हम अलग से देख लेंगे। इनका भविष्य तो पॉलिटिकली रिवाल्वर होता है। इनके बारे में कुछ कहने से ज्यादा तो कुछ होगा नहीं ,हाँ दीवाली पर मिलने वाले गिफ्ट पैकेट में थोड़ी कमी आ जायेगी बस।

आगे क्या कहें .....?

आजकल यूँ ही अनाप –शनाप सपने देखने के दिन चल रहे है अपने......

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सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर Zone 1 Street 3 ,दुर्ग (छ.ग.)

09408807420

susyadav7@gmail.com


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