रविवार, 13 अगस्त 2017

आलेख // श्वेत श्याम रंग भेद // डा.सुरेन्द्र वर्मा

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भगवान का रंग क्या है ? गोरा या काला, श्वेत या श्याम ? हिन्दू लोग राम और कृष्ण को भगवान मानते हैं और ज़रा गौर करें, दोनों ही श्याम रंग हैं। कृष्ण को तो ‘श्याम” कहकर ही पुकारते हैं। लेकिन आज भगवान को मानता ही कौन है ? लोग गोरे रंग पर फ़िदा हैं। कोई गोरा है तो उसके हज़ार अवगुण माफ़। जिसे देखो वही कालों की मज़ाक उड़ाने से बाज़ नहीं आता। खेल भावना तो मानों गायब ही हो गई है।

भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज़, अभिनव मुकुंद, तक को रंग-भेद का शिकार होना पड़ा है। उनके रंग को लेकर कुछ नस्लीय टिप्पणियों ने उन्हें स्वाभाविक रूप से आहत किया है। मुकुंद एक दक्षिण भारतीय हैं और दक्षिण भारत के अधिकतर लोग गोरे नहीं होते। अभिनव मुकुंद का रंग भी सांवला है। वे बताते हैं कि बचपन से ही उनकी चमड़ी को लेकर लोगों का रवैया उनके लिए हैरानी का सबब बन गया। लेकिन आज जब वे भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज़ हैं लोगों का बचपना कायम है; यह, ज़ाहिर है, और भी हैरानी की बात है। मुकुंद को कोई मलाल नहीं है कि उनका रंग सांवला है। लेकिन नस्लवादी नासमझ टिप्पणियों ने मुकुंद को निराश किया है। पर उन्होंने भी इनका डटकर माकूल जवाब दिया। अच्छा किया। बताते चलें, मुकुंद से पहले मुहम्मद अली, प्रसिद्द मुक्केबाज़, और सेरेना विलियम्स, जानी मानी टेनिस स्टार भी, बावजूद अपनी शोहरत के, अपनी चमड़ी के रंग को लेकर नस्ली टिप्पणियों से आहत हो चुके हैं।

क्या आपको कोई ऐसा पिता मिला है जो अपनी बेटी को उसके गहरे रंग की वजह से प्यार न करता हो ? क्या कोई आपको कोई ऐसा कवि या चित्रकार मिला है जो अपनी कृति का सम्मान न करता हो ? कुमार विकल अपनी एक कविता, ‘रंग-भेद’, में कहते हैं ,

मेरी कविता गौर वर्ण नहीं है / ज़रा सांवली सी है / एक संथाल बच्ची की तरह खुरदरी / जो बड़ी होकर / गुलाबी फ्राक नहीं पहनेगी / आइसक्रीम नहीं खाएगी / ....लेकिन भाई ... मेरी बच्ची / मुझे अपनी सांवली मुस्कान से हर्षाती है ...

इसी तरह कवियित्री, यशस्वी, अपनी एक कविता ‘रंग’ में बड़े शातिर अंदाज़ से कहती हैं,

रंग / रंग-भेद नहीं करते / रंगों का भेद बताते हैं / ...रंग कहते हैं / चुनों / खुद के रंग को / जो तुम्हारे रंग से हो मिलता / या फिर परे / रंग आज़ादी देते हैं / रंग सोच देते हैं / रंग देते हैं हौसला / खुद के निर्माण का / रंग रंग हैं / रंग ने नहीं दिया हक़ / उसे बांटने का / रंग / मशाल हैं / खुद की रोशनी तय करने का / रंग रंग है / रंग भाव है

काली घटाएं, काली काली आँखें, काले लम्बे बाल, देखकर सभी मोहित हो जाते हैं। प्रकृति में श्वेत और श्याम साथ साथ रहते हैं। बल्कि साथ रहकर एक दूसरे की शोभा ही बढाते हैं। कभी शीशे में अपनी आँख देखिए। श्वेत और श्याम दोनों ही रंग हैं वहां – एक दूसरे को उभारते हुए। कभी सोचा है, आँख से काली पुतली हटा दी जाए तो क्या हाल होगा आँख का ! मैं कवि के नाम पर नहीं जाता। वह कवि गोविन्द हों या बिहारी हों या फिर रसलीन हों। आँख का सौन्दर्य वर्णन करते हुए जिसने भी यह दोहा लिखा है क्या खूब लिखा है !

“अमिय, हलाहल, मद भरे श्वेत,श्याम, रतनार। जियत मरत झुकि झुकि परत जिंहि चितवहिं इक बार।|”

कितने आश्चर्य की बात है कि हमारी ही काली काली आँखें काले रंग से परहेज़ करने लगीं और गोरों पर, गोरियों पर, फ़िदा हैं ! वक्त आ गया है कि हम अपनी इस नकारात्मक मानसिकता को बदलें और ज़रा ध्यान से देखें और गुनें --

श्याम सुन्दर है (Black is Beautiful)

श्याम रहस्यमय है (Black is Mysterious)

श्याम करिश्मा है ( Black is Charismatic)

श्याम सम्मोहक है (Black is Seductive)

श्याम जादुई है (Black is Magical)

श्याम बलवान है (Black is Powerful)

श्याम सजीला है (Black is Stylish )

श्याम सुविज्ञ है (Black is Sophisticated )

ये केवल मुहावरे नहीं, हकीकत है।

डा. सुरेन्द्र वर्मा ( ९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड, / इलाहाबाद- २११००१

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  1. बेहतरीन लेख .... तारीफ-ए-काबिल .... Share करने के लिए धन्यवाद...!! :) :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. श्याम संबंधित मुहावरे पहली बार पढ़े मज़ेदार हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी7:52 pm

    लोग tv serials और films मैँ गोरे लोगों की ईज्जत शोहरत और कमाई देखकर ज्यादा रँगभेद समर्थक बन चुके हैँ ।

    उत्तर देंहटाएं

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