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व्यंग्य // पनामा का नाम न लें // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

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कहते हैं पनामा एक राज्य है। यह मध्य अमेरिका का दक्षिणतम राज्य है। उस राज्य में एक शहर है, जिसका नाम भी पनामा है। वह राज्य की राजधानी है। पनामा राज्य से होकर एक नहर भी जाती है। उसे बड़े यत्न से बनाया गया है। यह नहर प्रशांत महासागर और अटलांटिक सागर को जोड़ती है। इसे भी पनामा नहर कहा जाता है। मैंने पनामा देखा नहीं है, पर पनामा का नाम जब से खबरों की सुर्ख़ियों में आया है मेरा बड़ा मन करता है कि कभी पनामा जाऊं और वहां स्थित पनामा शहर और पनामा नहर के दर्शन करूं।

वैसे पनाना नाम से मेरी आशिक़ी बड़ी पुरानी है। कॉलेज के दिनों में मेरा एक दोस्त था, सिगरेट पीता था। उसी ने मुझे भी सिगरेट फूँकने का चसका लगाया। उन दिनों पनामा नाम की एक सिगरेट आती थी। हम लोग वही पिया करते थे। पता नहीं अब वो मिलाती है या नहीं क्योंकि सिगरेट छोड़े अब वर्षों हो गए। ज्यादह दिन यह आशिकी चल नहीं पाई। मेरी सुनामा नाम की एक माशूका थी। बोली, सिगरेट या मैं – इन दोनों में से तुम्हें एक का चुनाव करना पडेगा। आखिर पनामा का साथ छोड़ना ही पडा।

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वो भी क्या दिन थे ! ‘पनामा सिगरेट’ पीता था और ‘पनामा ब्लेड’ दाढी बनाने के लिए इस्तेमाल करता था। अब तो शायद पनामा ब्लेड मिलता ही नहीं। नए नए ब्रांड आ गए हैं। एक से बढ़कर एक। पनामा ब्लेड का तो नाम ही भूल गया हूँ। लेकिन मानना पडेगा पनामा की धार आज भी बादस्तूर कायम है, साथ ही पनामा सिगरेट का जलवा भी।

पनामा की ही इस तेज़ धार ने नवाज़ शरीफ की सता ही क़तर दी और खुद उन्हें धुंए में उड़ा दिया। उनकी ‘शराफत’ की डुगडुगी पिट गई। राजनीति में बेचारे कहीं के न रहे।

पनामा पेपर्स। पहले न कभी सुने थे न देखे थे। मुदर्रिस रहा हूँ सो परिक्षा में दिए जाने वाले एक्सामिनेशन पेपर्स से तो पुराना परिचय है। इनमें से छात्रों की दृष्टि से कुछ सरल होते हैं तो कुछ पेपर्स टफ होते हैं। इनकम टैक्स के पेपर्स भी तैयार करता रहा हूँ ताकि, एक ईमानदार नागरिक होने के नाते वक्त पर टैक्स जमा कर सकूँ। कुछ पेपर्स जिन पर हम रफ काम करते हैं रफ पेपर्स कहलाते हैं। कुछ ऐसे भी टफ पेपर्स हो सकते हैं जो मोटे और मजबूत हों। कुछ बारीक पेपर्स भी होते हैं। कार्बन पेपर और टॉयलेट पेपर्स भी होते हैं। लेकिन पनामा पेपर्स ?

बताया जाता है कि पनामा पेपर्स वो गुप्त और सुरक्षित दस्तावेज़ हैं जिन्हें कुछ नेताओं और ‘संभ्रांत’ व्यक्तियों ने अपने टैक्स की चोरी को छिपाने के लिए पनामा की एक कम्पनी में उन्हें न ज़ाहिर किए जाने की शर्त पर रख दिया है और उसमे अपना पैसा लगाया है। ज़ाहिर है इन पनामा पेपर्स में चोरी का माल छिपाया गया है। लेकिन ताड़ने वाले भी गज़ब की नज़र रखते हैं। ब्रिटेन में पनामा पेपर्स “लीक” कर गए। (ये तो ऐसे ही हुआ जैसे लीकेज बैड-रूम में हो और ड्राइंग-रूम ‘लीक’ कर जाए !) बहरहाल इस लीकेज से थोड़ा न बहुत १.१५ करोड़ का खुलासा हुआ। बताया गया की कैसे दुनिया भर के करीब १४० रईसों और कंपनियों ने टैक्स के लिए स्वर्ग माने जाने वाले देशों में अपना चोरी का पैसा लगाया था।

इन लोगों में पाकिस्तान के पी.एम. नवाज़ शरीफ का भी नाम था। बस नवाब के विरोधियों को मौका हाथ लग गया। झटपट पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट एक्शन में आई और .. अब क्या बताना, बाद की कहानी आप सबको पता ही है, बेचारे नवाज़ शरीफ की सारी शराफत धरी की धरी रह गई। पूरी दुनिया ही उजड़ गई।

भारत सरकार को पता था, ऐसा भी हो सकता है। पनामा पेपर्स में भारत के भी कुछ नेताओं आदि के नाम थे लेकिन सरकार ने उनके ऊपर कोई ध्यान ही नहीं दिया। वरना पता नहीं कौन कौन धर लिया जाता। कई नेता तो नेता, अमिताभ बच्चन तक बच गए। भारत की शराफत को मानना पडेगा ! बस एक चेतावनी जारी कर दी गई। पनामा नाम से तोबा कीजिए। सिगरेट पीना बंद कर दीजिए, दाढी बनाने के लिए इस नाम का ब्लेड इस्तेमाल कभी न कीजिए, सैर-सपाटे के लिए भी पनामा राज्य जाने की बात तो कभी सोचिए ही नहीं, भूल से भी उधर का रुख न करें। पनामा से तौबा कीजिए।

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डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी,

१, सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१

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पनामा ने नैया डुबो दी

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