मंगलवार, 15 अगस्त 2017

व्यंग्य // वॉट्‌सएप की दुनिया // राजशेखर चौबे

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जिस तरह खराब मुद्रा अच्‍छी मुद्रा को बाहर का रास्‍ता दिखा देती है उसी तरह नया आविष्कार या एप पुराने आविष्कार या एप को बाहर कर सकता हैं । पहले फिल्‍मों का क्रेज था बाद में लोग टी.वी. से चिपके रहने लगे अभी इंटरनेट का क्रेज है ‘फेसबुक का क्रेज कुछ कम हुआ है। वॉट्‌सएप का क्रेज बंदस्‍तूर बना हुआ हैं । शायद खाना खाने से भी अधिक जरूरी हैं मैसेज फारवर्ड करना । लोग एक मिनट भी उधार नहीं रखना चाहते । हर कोई बेचैन है कि जल्‍दी से जल्‍दी मैसेज फारवर्ड कर चैन की सांस लें। अच्‍छा मैसेज अपने ग्रुप में सबसे पहले भेजने पर वही खुशी मिलती है जो सुबह-सुबह पेट हल्‍का होने पर मिलती है।

इस फेसबुक व वॉट्‌स्‌एप के जमाने में प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति कवि, साहित्‍यकार लेखक, चुटकुला मास्‍टर, गीतकार आदि और न जाने क्‍या-क्‍या बन चुका है। भले ही आपको हिन्‍दी अंग्रेजी व अन्‍य भाषाएं नहीं आती हो लेकिन आप उन भाषाओं पर भी अपना अधिकार जता सकते हैं। किसी भी भाषा में कविता, लेख, जोक आदि फारवर्ड कर सकते हैं बशर्तें किसी जानकार की सलाह लेकर ही भेजें । भाषाई अकिंचन लोगों की हाई-फाई हिन्‍दी अंग्रेजी देखकर आप भी मेरी तरह भौंचक हो सकते हैं ।

यह भी हो सकता है कि आपने कड़ी मेहनत से बहुत अच्‍छी कविता, चुटकुला या लेख तैयार कर अपने सभी ग्रुप (आजकल प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति कई ग्रुप में सदस्‍य हैं ) में भेजा । हो और आपको एक महीने के बाद कहीं से वही मैसेज वापस आए और लिखा हो कि ‘एकदम नया है‘ आपको लालू की तरह सिर पकड़कर बैठ जाना पड़ेगा। एक अजीब तरह का माहौल बन गया है। अफवाह विवाद एवं दंगा फैलाने वालों को एक डिजिटल हथियार मिल गया है। अच्‍छी चीजों का प्रचार-प्रसार कम है परन्‍तु नफरत घृणा विवाद का प्रचार प्रसार अधिक है नफरत की राजनीति करने वाले चांदी काट रहे हैं। अच्‍छा यही होगा कि इस पर आने वाले मैसेज को हम गंभीरता पूर्वक ग्रहण न करें क्‍योंकि उसकी प्रामाणिकता हमेशा ही संदेह के घेरे में रहेगी ।

ऐसा नहीं है कि इसमें सब कुछ गलत हो रहा हो । इसके फायदे अधिक हैं और नुकसान कम । एक बार में ही ग्रुप के सभी सदस्‍यों को संदेश पहुंचाया जा सकता है। भले ही वे विदेश में ही क्‍यों न हो । समाजवाद का सबसे सशक्‍त माध्‍यम वॉट्‌स एप है। एक ग्रुप में ही देशी दारू पीने वला मजदूर एवं अरबपति दोनों ही सदस्‍य हो सकते हैं । छोटे व बड़े दोनों सदस्‍य एक दूसरे से विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं । एक दूसरे के जोक पर हंस सकते हैं। किसी गंभीर विषय पर एकमत हो सकते हैं या विपरीत ध्रुव पर खड़े हो सकते हैं। एक ही ब्रांड की बीड़ी पीने वाले एवं शराब पीने वाले के बीच जो भाईचारा होता है वही भाईचारा एक ग्रुप के सदस्‍यों के बीच पाया जाता है ।

ग्रुप के सदस्‍यों की संख्‍या 100 से बढ़कर 256 कर दी गई है, भला हो उनके मैनेजमेंट का अब 100 के बदले 256 लोगों के विचारों का आदान-प्रदान होगा। क्‍या होगा यदि यह संख्‍या 125 करोड़ कर दी जाए । लोगों को कुछ करना नहीं पड़ेगा । एकल खिड़की प्रणाली की तरह प्रत्‍येक काम एक ही जगह संभव हो जाएगा । एक जगह ही भाषण, आलोचना एवं मतदान हो सकेगा। देश के सबसे लोकप्रिय नेता का भाषण भी एक ग्रुप में ही लोड हो जाएगा । वह कुछ इस प्रकार होगा-

‘मित्रों मैं वॉट्‌स एप मैनेजमेंट का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जिसने ग्रुप की संख्‍या 256 से बढ़ाकर 125 करोड़ कर दिया है। और पूरे भारतवर्ष के लोगों को इसका सदस्‍य बना दिया है। इसके माध्‍यम से मैं अब अपने प्‍यारे देशवासियों से रोज मन की बात कर सकूंगा । मेरी मैनेजमेंट से गुजारिश है कि 125 करोड़ जनता से उस व्‍यक्‍ति को जिसकी बुद्धि सबसे कम हो उसे इस ग्रुप से बाहर किया जाए और बुद्धि विकास के लिए  माल्‍या के पास भेज दिया जाए‘ ।

राजशेखर चौबे

रायपुर

1 blogger-facebook:

  1. सामयिक परिस्थितियों का सचल आकलन और समीक्षा ।बधाई

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